Bihar News: शराबबंदी कानून से एक्साइज विभाग के अफसर-सिपाही और माफियाओं की बल्ले-बल्ले है. जो राजस्व पहले सरकारी खजाने में जाता था, वो सीधे इनके पैकेट में जा रहा. स्वाभाविक है ये लोग तो यही चाहेंगे, शराबबंदी कानून आगे भी बरकरार रहे. जानकार बताते हैं कि, शराब रोकने वाले विभाग के अफसरों ने सेवा काल में जितनी कमाई नहीं की होगी, उतना शराबबंदी काल में कर चुके हैं. एक्साइज विभाग के अदना सा सिपाही के पास महंगी गाड़ियों का बेड़ा है. सहायक आयुक्त पटना से लेकर राज्य से बाहर अकूत संपत्ति अर्जित कर रहे. एक ऐसे ही सहायक आयुक्त हैं , जो इन दिनों खूब चर्चा में हैं. जिनकी पोस्टिंग पड़ोसी राज्य के इंट्री प्वाइंट वाले काफी संवेदनशील जिले में है. विभाग के अंदर चर्चा है कि शादी की सालगिरह पर राजधानी में हाल में जलसा करने वाले सहायक आयुक्त ने मार्च 2026 में राजधानी में 1 करोड़ के फ्लैट की खऱीद की है.  

एक्साइज के सहायक आयुक्त चर्चा में हैं....

''अराजकता ! एक्साइज के 'सहायक आयुक्त' का कमाऊ पूत सब पर भारी....शराबबंदी वाले राज्य में यह क्या हो रहा ? शराब से अकूत संपत्ति अर्जित कर रहे अफसर- माफिया'' . हमने 27 मई को इस खबर से लोगों को रूबरू कराया था. इसके बाद इस जोड़ी के बारे में और भी खबरें निकल कर सामने आ रही हैं. हमने बताया था कि इस हिट जोड़ी की अगली खबर से भी आप सभी को अवगत करायेंगे. 

मार्च के पहले हफ्ते में राजधानी में खरीदी प्रॉपर्टी 

दरअसल, उत्पाद विभाग के सहायक आयुक्त जो महत्वपूर्ण जिले में पदस्थापित हैं, इनके कमाऊ पूत की चर्चा तो है ही, इनकी भी खूब चर्चा हो रही है. विभाग के लोग बताते हैं कि वर्तमान पदस्थापन वाली जगह पर साहेब ने खूब कमाई की है. कमाई को राजधानी में खपाई जा रही है. बताया जाता है कि सहायक आयुक्त ने राजधानी का दानापुर इलाके में मार्च 2026 के पहले हफ्ते में फ्लैट की खरीद की है. जिसका सरकारी मूल्य लगभग 50 लाख रू है. यह तो सरकारी मूल्य हुआ, वैसे बाजार भाव करीब 1 से डेढ़ करोड़ के करीब है. पूर्व में क्रय किए गए फ्लैट और जमीन की बात तो छोड़ ही दीजिए. जब इस चर्चा की सत्यता के बारे में पड़ताल की गई तब इस बात की पुष्टि हुई है कि इन्होंने मार्च के पहले हफ्ते में राजधानी में प्रॉपर्टी की खरीद की है.  

वैध तरीके से संपत्ति अर्जित करना अपराध नहीं 

स्पष्ट कर दें, वैध तरीके से संपत्ति अर्जित करना अपराध नहीं. चाहे वो आम आदमी हो या सरकारी सेवक.अब सहायक आयुक्त ने प्रॉपर्टी कहां से खरीदी, वैध कमाई से या अवैध से, यह तो वही बता सकते हैं. वैसे जांच एजेंसी को अधिकार है कि वो सरकारी सेवक के आय के श्रोत की जांच करे. विभाग के अंदर  चर्चा है कि वर्तमान जिले में खूब कमाई हो रही, कमाऊ पूत भी खूब कमा कर दे रहा. लिहाजा संपत्ति अर्जित की जा रही. 

जांच एजेंसियों की कमाई करने वाले सरकारी सेवकों पर है नजर 

हालांकि सम्राट सरकार ने जांच एजेंसियों को खुली छूट दे दी है कि वे अकूत संपत्ति अर्जित करने वाले सरकारी सेवकों की जांच कर उचित कार्रवाई करें. आर्थिक अपराध इकाई, विशेष निगरानी इकाई और निगरानी ब्यूरो लगातार कार्रवाई कर भी रही हैं. निगरानी ब्यूरो की तरफ से हाल ही में कहा गया है कि 80 सरकारी सेवक उनके टारगेट पर हैं.  

कमाऊ पूत के पास महंगी गाड़ियों का बेड़ा 

एक्साइज के सहायक आयुक्त  के बारे में और भी खबरे हैं. जिसे आगे बतायेंगे. अब इनके कमाऊ पूत के बारे में बता दें. सहायक आयुक्त का कमाऊ पूत सिपाही है. यह सिपाही लंबे समय के साहब के साथ है. इसके बारे में विभागीय लोग बताते हैं कि इनके पास गाड़ियों का बेड़ा है. बेड़े में तरह-तरह की महंगी गाड़ियां हैं. बताया जाता है कि कई गाड़ियों को दूसरे के नाम पर क्रय किया गया है. इन महंगी गाड़ियों का सचिवालय में बैठे उत्पाद के अन्य हाकिम सेवा लेते रहते हैं

सहायक आयुक्त के कमाऊ पूत की खूब हो रही चर्चा 

सहायक आयुक्त का एक कमाऊ पूत सब पर भारी है. उसके आगे दारोगा-इंस्पेक्टर कुछ नहीं. शख्स का कानून से कोई मतलब नहीं, मतलब सिर्फ पैसे से है. विभाग के ही सूत्र बताते हैं कि उक्त सिपाही पर सहायक आयुक्त का सीधा हाथ है. लिहाजा दारोगा-इंस्पेक्टर को रत्ती भर भी वैल्यू नहीं देता. सहायक आयुक्त के खास सिपाही को मतलब सिर्फ वसूली से है. रात भर जमकर वसूली...सुबह में साहब की हिस्सेदारी. इसी फार्मूले के तहत उक्त सिपाही का लूट राज जारी है.

साहब आगे-आगे सिपाही पीछे से पहुंच जा रहा....

दरअसल, सिपाही के बिना सहायक आयुक्त का काम चल ही नहीं सकता. साहब जहां जाते हैं,पीछे से उक्त सिपाही को अपने यहां पदस्थापित करा लेते. यह खेल कई सालों से जारी है. इसके पहले साहब जिस जिले (सारण प्रमंडल का एक जिला) में थे, वहां भी यह जोड़ी कमाई में मामले में हिट थी. इस बार सहायक आयुक्त जिस महत्वपूर्ण जिले ( पड़ोसी राज्य का इंट्री वाला जिला) में पदस्थापित हैं, वहां तो यह कमाऊ पूत आतंक मचा रखा है. बताया जाता है कि आमलोगों से जबरन वसूली की जा रही. दारोगा-इंस्पेक्टर के मना करने के बाद भी उसकी ठसक ऐसी की, फर्क नहीं पड़ता. बेचारे दारोगा-इंस्पेक्टर करें तो क्या, सिपाही के सिर पर साहब का हाथ जो है. मन मसोस कर रह जा रहे. ऐसा नहीं कि जिस जिले में यह खेल किया जा रहा. वो राजधानी से बहुत दूर है, जहां की बात मुख्यालय नहीं पहुंच रही. सारी बात मुख्यालय पहुंचती है, पर....। 

उत्पाद विभाग के सहायक आयुक्त और उनके कमाऊ पूत के द्वारा खेला उस महत्वपूर्ण जिले में खेला जा रहा, जो काफी महत्वपूर्ण जिला है. सीमाई राज्य से सटा हुआ जिला है. शराब की इंट्री प्वाइंट वाला जिला है. ऐसे जिले में साहब के कमाऊ पूत का आतंक जारी है. समझ जाइए, शराबबंदी कानून को ऐसे अफसर-कर्मी सफल करा रहे हैं या विफल ? 

हाल में राजधानी में किया था बड़ा जलसा

बताया जाता है कि, साहब की पूरी व्यवस्था कमाऊ पूत(सिपाही) के ही जिम्मे है. इस महीने यानि मई के तीसरे हफ्ते में ही साहब (सहायक आयुक्त) ने राजधानी में शादी की सालगिरह पर बड़ा जलसा किया था. मैरेज हॉल में राजशाही व्यवस्था की गई थी. 400-500 गेस्ट शामिल हुए थे. जिसमें विभाग के छोटे-बड़े अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे थे. मेहमानवाजी में पानी की तरह पैसे बहाये गए. वो पैसे किसी दूसरे ने नहीं बल्कि कमाऊ पूत ने ही खर्च किए थे. अब समझ जाइए,जिस सिपाही के भरोसे साहब हैं, उसका जलवा तो रहेगा.