Bihar Education : शिक्षा विभाग के अधिकारी माल कमाने में सबसे आगे दिख रहे. सरकारी सेवा में आते ही दोनों हाथ से माल बटोरते हैं. विभाग के अधिकारी अब सरस्वती के नहीं बल्कि लक्ष्मी के उपासक बन बैठे हैं. डीपीओ अजीत अमर इसके प्रमाण हैं. इस अधिकारी को साढ़े चार की सरकारी सेवा में सिर्फ 38 लाख रू वेतन मिला. पर संपत्ति करोड़ों की बना ली. डीपीओ अजीत अमर इकलौते ऐसे नहीं हैं, जिन्होंने छोटे कार्यकाल में करोड़ों की संपत्ति बनाई. शिक्षा विभाग के कई अफसर हैं जिन्होंने जमीन से लेकर पेट्रोल पंप तक खुलवा लिए।
अजीत अमर अकेले नहीं, कमाई में एक और अधिकारी काफी आगे
डीपीओ अजीत अमर सिवान के रहने वाले हैं. वैसे सिवान गृह जिला निवासी शिक्षा विभाग के कई ऐसे अफसर हैं, जो लक्ष्मी के सबसे बड़े उपासक साबित हुए हैं. इस जिले व आसपास के रहने वाले शिक्षा विभाग के कई डीईओ-डीपीओ पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे. अकूत संपत्ति अर्जित करने के आरोप हैं. हालांकि वैसे लोगों की सेटिंग तगड़ी है, मनचाही पोस्टिंग लेकर मौज कर रहे. शिक्षा विभाग के एक अधिकारी जिनका पैतृक जिला सिवान है, उनके बारे में बता देते हैं. वर्तमान में वे एक जिले में विभागीय प्रमुख हैं. इसके पहले वे अपने गृह जिला के पड़ोस में पदस्थापित थे. इस दौरान उन पर गंभीर आरोप लगे थे. मोटी रकम वसूली की गूुंज विधान परिषद में सुनाई पड़ी थी. खैर..समय के साथ सब कुछ सामान्य हो गया, अब तो मनचाही और कमाई वाला बड़ा पोस्ट मिल गया. ये साहब इससे पहले गांधी की कर्मभूमि में पदस्थापित रहे. वहां भी लक्ष्मी के सबसे बड़े उपासक साबित हुए. ये इतने बड़े उपासक बन गए, कि सबको पीछे छोड़ दिया. स्थापना का काम देखने वाले शिक्षा विभाग के इस अधिकारी ने उस जिले से इतनी कमाई की, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती.
गांधी की कर्म भूमि वाले जिले में लक्ष्मी के सबसे बड़े उपासक बन बैठे
गांधी की कर्मभूमि में रहने के दौरान अकूत संपत्ति अर्जित करने की बात सामने आई. यहां भी उक्त अधिकारी का विवादों से चोली-दामन का रिश्ता रहा. लक्ष्मी की उपासना में कोई कसर नहीं छोड़ी. डीपीओ रहते इन पर दोनों हाथ से कमाई करने के आरोप लगे. बताया जाता है कि, दो-ढाई सालों के कार्यकाल में इस अधिकारी ने मोटी कमाई की. कमाई का पैसा पत्नी के परिवारवालों के नाम पर खपाया. विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि उक्त डीपीओ ने कमाई कर कई जगहों पर इंवेस्ट किया. साले व अन्य नजदीकी के नाम पर पेट्रोल पंप से लेकर अन्य अचल संपत्ति की खरीद की है. हालांकि लक्ष्मी के सबसे बड़े उपासक की पोल-पट्टी धीरे-धीरे खुलती जा रही है.
डीपीओ अजीत अमर तो एक उदाहरण हैं...
शिक्षा विभाग का एक डीपीओ अजीत अमर ने 4.5 साल के सेवाकाल में अकूत संपत्ति अर्जित कर ली. गांव में बंगलानुमा मकान बनवाया. पत्नी के नाम पर 6.5 बीघा जमीन, लग्जरी गाड़ी,सोना-चांदी की खरीद कर ली. हालांकि अपनी करनी की वजह से जाल में फंस गया है. आर्थिक अपराध इकाई ने केस दर्ज कर आरोपी डीपीओ के चार ठिकानों पर छापेमारी की,जिसमें अकूत संपत्ति का पता चला है. 4 फरवरी 2022 को सरकारी सेवा में आए डीपीओ ने 4.5 साल के कार्यकाल में अपने गांव में भव्य बंगला बनवाया . साथ ही 6.5 बीघा जमीन, स्कॉर्पियो क्लासिक वाहन की खरीद की. सारण में प्रति नियुक्ति के दौरान इन पर भ्रष्टाचार के माध्यम से अवैध धन अर्जन के आरोप लगे. सारण जिला प्रशासन ने इनके खिलाफ जांच की. इसके बाद इन्हें मूल पदस्थापन स्थान सहरसा भेज दिया गया.
आर्थिक अपराध इकाई ने बताया है कि अजीत अमर को अपने 4.5 वर्ष के कार्यकाल में वेतन मद में मात्र 38 लाख रुपए मिले . इस दौरान इन्होंने अपने गांव में एक भव्य मकान का निर्माण कराया, जिसकी अनुमानित कीमत 40 लाख से अधिक है. हालांकि मकान एवं बाउंड्री की लागत वृद्धि बढ़ाने की संभावना है. सरकारी सेवा में आने के बाद स्कॉर्पियो क्लासिक की खरीद की. 6.5 बीघा जमीन जिसकी सरकारी वैल्यू 48 लाख ₹50000 है. इसके अभिलेख दस्तावेज बरामद किए गए हैं.
तलाशी के क्रम में अजीत अमर के सिवान के रैनी गांव स्थित निजी भव्य मकान है. इसके साज-सज्जा का मूल्यांकन कराया जाएगा. मकान निर्माण से संबंधित 30 बिल मिले हैं. गांव के निजी आवास से लगभग 40 लाख रुपए मूल्य के आभूषण भी मिले हैं. छपरा स्थित सरकारी आवास की तलाशी में पत्नी पूजा कुमारी के नाम पर 2025 को खरीदी गई 6 बीघा 9 कट्ठा 8 धूर (481 डिसमिल) भूखंड निबंधन से संबंधित दस्तावेज मिले हैं. 2023 में स्कॉर्पियो महिंद्र गाड़ी की खऱीद की गई, जिसकी कीमत 15 लाख से अधिक है. यामाहा एफजेड बाइक मिली है. 27 लख रुपए के ज्वेलरी रसीद मिले हैं. यह खरीद वर्ष 2023 से 25 के मध्य की गई है. अजीत अमर एवं उनकी पत्नी पूजा कुमारी के नाम पर चार बैंक खाता मिले हैं, अन्य निवेश के कागजात बरामद हुए हैं.