Jharkhand High Court: झारखंड के हजारों युवाओं, खासकर JSSC-CGL परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के लिए झारखंड हाईकोर्ट का फैसला किसी दिवाली गिफ्ट से कम नहीं है। हाईकोर्ट ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के बड़े पैमाने पर रद्दीकरण (मास कैंसिलेशन) के राज्य सरकार के फैसले को अवैध ठहराते हुए खारिज कर दिया है। अदालत के इस फैसले से करीब 1,932 से 2,000 चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है और उनकी नौकरी पर मंडरा रहा खतरा फिलहाल टल गया है।





शुक्रवार को जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने रमेश उरांव, आकाश गौरव, निरोज खेस समेत अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने सरकार के उस निर्णय पर सवाल उठाए, जिसके तहत पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी जांच में नई सामग्री सामने आने या कुछ लोगों की गिरफ्तारी होने मात्र से पूरी परीक्षा अथवा संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया को रद्द नहीं किया जा सकता। सरकार इस आधार पर पहले दिए गए न्यायिक फैसलों को भी निष्प्रभावी नहीं कर सकती।





हाईकोर्ट ने कहा कि किसी अभ्यर्थी के खिलाफ आपराधिक आरोप या जांच मात्र के आधार पर उसे नौकरी से बर्खास्त नहीं किया जा सकता। जब तक संबंधित उम्मीदवार के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया में दोष साबित नहीं होता, तब तक उसके अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्यपालिका का कोई भी फैसला न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के विपरीत नहीं हो सकता। सरकार न्यायिक आदेशों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से कोई निर्णय नहीं ले सकती।





सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश पहले की तरह लागू रहेंगे। इसका अर्थ है कि यदि जांच एजेंसी किसी विशेष अभ्यर्थी को भ्रष्टाचार या परीक्षा में गड़बड़ी में संलिप्त पाती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है और उसे भविष्य में रोजगार से प्रतिबंधित भी किया जा सकता है।





हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी को पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जारी रखने का निर्देश दिया। अदालत ने उम्मीद जताई कि जांच में तेजी लाई जाएगी और याचिकाकर्ता भी जांच में पूरा सहयोग करेंगे। साथ ही कोर्ट ने साफ किया कि उसके इस आदेश से चल रही आपराधिक जांच पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।





इस महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई में राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने पक्ष रखा। वहीं, सफल अभ्यर्थियों और याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन, गोपाल शंकर नारायण, इंद्रजीत सिन्हा और अमरीश वत्स ने अदालत में दलीलें पेश कीं।





झारखंड हाईकोर्ट का यह फैसला लंबे समय से अनिश्चितता और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हजारों चयनित अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। इस फैसले से स्पष्ट संदेश गया है कि प्रशासनिक निर्णयों में कानून और न्यायिक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।