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20-Nov-2025 11:10 AM
By First Bihar
Samrat Chaudhary Oath : बिहार की राजनीति में आज एक और अहम अध्याय जुड़ गया, जब भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता सम्राट चौधरी ने दूसरी बार उपमुख्यमंत्री बनने के साथ मंत्री पद की शपथ ली। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ सम्राट चौधरी ने भी शपथ ली। समारोह में हजारों की भीड़, एनडीए गठबंधन के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी और सशक्त राजनीतिक संदेशों ने इसे खास बना दिया।
दूसरी बार उपमुख्यमंत्री बनने का अवसर
सम्राट चौधरी पहले भी बिहार के उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं। इस बार भी बीजेपी ने उनके ऊपर भरोसा जताते हुए उन्हें उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी है। यह फैसला कई राजनीतिक संकेत देता है। एक ओर बीजेपी यह दिखाना चाहती है कि संगठन और सरकार दोनों में अनुभवी और आक्रामक नेताओं को प्रमुख जगह दी जाए, वहीं दूसरी ओर सम्राट चौधरी की राजनीतिक पकड़ और संगठनात्मक कौशल को भी इसका बड़ा कारण माना जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में सम्राट चौधरी बिहार की राजनीति का एक मजबूत चेहरा बनकर उभरे हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई। उनकी आक्रामक शैली और विपक्ष पर तीखे हमलों ने उन्हें राज्य की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना दिया था। यही कारण है कि एनडीए गठबंधन ने उन्हें एक बार फिर उपमुख्यमंत्री बनाकर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।
शपथ ग्रहण में दिखा राजनीतिक दमखम
गांधी मैदान में हुए शपथ ग्रहण समारोह में एनडीए सरकार की मजबूती का प्रदर्शन साफ दिखाई दिया। मंच पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दोनों उपमुख्यमंत्री — जिनमें एक सम्राट चौधरी भी शामिल — भाजपा-जदयू के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय नेतृत्व के प्रतिनिधि मौजूद थे। समारोह में जनता की भारी भीड़ ने यह संकेत दिया कि नए कार्यकाल के प्रति लोगों में खासा उत्साह है।
सम्राट चौधरी ने शपथ लेने के पहले मीडिया से बातचीत में कहा कि वे बिहार के विकास के लिए संकल्पित हैं और केंद्र व राज्य सरकार मिलकर बिहार को नए दौर की ओर ले जाएंगी। उन्होंने कानून-व्यवस्था, रोजगार, शिक्षा और बुनियादी ढांचे को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल बताया।
राजनीतिक संदेश और भविष्य की रणनीति
सम्राट चौधरी की दोबारा ताजपोशी कई मायनों में 2025 की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण है। यह संदेश है कि भाजपा बिहार में नेतृत्व क्षमता से लैस चेहरों को आगे बढ़ाना चाहती है। साथ ही, यह भी कि गठबंधन की राजनीति में सम्राट चौधरी एक संतुलन साधने वाले नेता के रूप में उभरे हैं।
विपक्ष के लिए यह एक चुनौती है क्योंकि सम्राट चौधरी अपनी तेज तर्रार बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं। विधानसभा में उनकी मौजूदगी पर नजर रहेगी, खासकर तब, जब वे विकास मुद्दों को लेकर विपक्ष को कठघरे में खड़ा करते हैं।
आगे की राह
उपमुख्यमंत्री बनने के साथ सम्राट चौधरी के सामने कई चुनौतियाँ होंगी। बिहार को विकास के पथ पर तेज़ी से आगे ले जाना, बेरोजगारी कम करना, उद्योगों को बढ़ावा देना और नए निवेश लाना उनकी प्राथमिकताओं में होगा। केंद्र और राज्य की संयुक्त परियोजनाओं को तेज़ी से लागू करना भी उनकी जिम्मेदारी होगी। राजनीति के जानकारों का मानना है कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार में भाजपा की भूमिका और भी मजबूत होगी और एनडीए में नई ऊर्जा का संचार होगा। कुल मिलाकर, सम्राट चौधरी की दूसरी बार उपमुख्यमंत्री के रूप में वापसी बिहार की राजनीति में एक बड़ा संकेत है — स्थिरता, रणनीति और नए उत्साह का।