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03-Nov-2025 01:21 PM
By First Bihar
Dularchand Yadav murder : बिहार की मोकामा विधानसभा सीट इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक विवादों के केंद्र में बनी हुई है। इस सीट से जुड़ी खबरें न केवल स्थानीय लोगों बल्कि राज्य और राष्ट्रीय मीडिया के लिए भी बड़ी चर्चाओं का विषय बन गई हैं। इस बार चर्चा का केंद्र बनी है जनसुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या की घटना, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। यह घटना 30 अक्टूबर की शाम घटित हुई, जब मोकामा में जेडीयू और अन्य समर्थकों के बीच गाड़ियों को साइड करवाने को लेकर अनबन शुरू हुई। देखते ही देखते मामूली विवाद ने भयावह रूप ले लिया और पत्थरबाजी और हिंसक झड़प की स्थिति बन गई। इस झड़प में सबसे बड़ी कीमत दुलारचंद यादव ने चुकाई और उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन एफआईआर दर्ज की, जिसमें एक नामजद एफआईआर में पूर्व विधायक और जेडीयू कैंडिडेट अनंत सिंह का नाम शामिल किया गया। इसके बाद अनंत सिंह को गिरफ्तार कर 14 दिनों के न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। गिरफ्तारी के बाद मोकामा का राजनीतिक और सामाजिक माहौल और भी गर्म हो गया। विपक्षी दल और स्थानीय समर्थक इस मामले को लेकर प्रदर्शन करने लगे, वहीं सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर चर्चाओं का बाजार गरम हो गया।
हालांकि इस मामले में अब नया मोड़ आया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दुलारचंद यादव खुद कुर्ता खोलते हुए और सफ़ेद रंग की कार का दरवाजा खोलते हुए नजर आ रहे हैं। यह वीडियो पहले सामने आई जानकारी और परिजनों के आरोपों से पूरी तरह अलग है। पहले यह दावा किया गया था कि दुलारचंद यादव को कुर्ता फाड़कर पीटा गया, फिर गोली मारी गई और उनकी गाड़ी पर चढ़ाई की गई। लेकिन वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि घटना से जुड़ी प्रारंभिक जानकारी पूरी तरह सही नहीं है और यह मामला अब नए आयाम पर पहुँच गया है।
इससे पहले भी सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें दुलारचंद यादव को पत्थर चलाते हुए देखा गया। यह वीडियो लोगों के बीच बहुत तेजी से फैल गया और इसकी वजह से स्थानीय प्रशासन और पुलिस के ऊपर भी सवाल उठने लगे। वायरल वीडियो के कारण अब पुलिस ने और अधिक सतर्कता बरतने का निर्णय लिया और मामले की जांच तेज कर दी गई।
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इस पूरे मामले ने मोकामा विधानसभा सीट पर राजनीतिक सरगर्मी को भी बढ़ा दिया है। अनंत सिंह की गिरफ्तारी और वायरल वीडियो के बीच राजनीतिक दलों ने अपने-अपने बयान जारी किए और जनता को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया। विपक्षी दल इस मामले का इस्तेमाल सरकार और प्रशासन की नाकामी दिखाने के लिए कर रहे हैं, जबकि प्रशासन यह दावा कर रहा है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि मोकामा विधानसभा सीट अब सिर्फ राजनीतिक बहस का केंद्र नहीं रह गई है, बल्कि सामाजिक और न्यायिक दृष्टि से भी यह एक महत्वपूर्ण मामला बन गया है। वायरल वीडियो और एफआईआर के खुलासे ने जनता के बीच सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या पुलिस और प्रशासन ने वास्तविक तथ्यों की पूरी तरह जांच की या नहीं।
अंततः, यह मामला न केवल मोकामा बल्कि पूरे बिहार के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में अपनी गहरी छाप छोड़ रहा है। जनता, राजनीतिक दल और मीडिया सभी इस पर नजर बनाए हुए हैं। आगे आने वाले दिनों में वायरल वीडियो, एफआईआर और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट होगी कि इस मामले का वास्तविक सच क्या है और जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कब तक की जाएगी।