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06-Nov-2025 01:17 PM
By First Bihar
Bihar Election 2025: आज बिहार की सियासत के कई दिग्गज नेताओं का भाग्य ईवीएम में कैद हो जाएगा। इंडिया गठबंधन (INDIA bloc) के मुख्यमंत्री पद के चेहरा तेजस्वी यादव, वहीं भाजपा की ओर से उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा समेत कुल 16 मंत्रियों की किस्मत आज तय होगी। इस बीच, तेजस्वी यादव के बड़े भाई तेज प्रताप यादव, जो इस बार जनशक्ति जनता दल के टिकट पर मैदान में हैं, अपनी पुरानी पार्टी आरजेडी के उम्मीदवार मुकेश रौशन और अन्य निर्दलीय प्रत्याशियों के साथ एक बहुकोणीय मुकाबले में फंसे हुए हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार फर्जी वोटिंग पर रोक लगाने के लिए चुनाव आयोग ने एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। पहली बार हर मतदान केंद्र पर एक आंगनबाड़ी सेविका को तैनात किया गया है। इन सेविकाओं का काम उन महिलाओं की पहचान की जांच करना है, जो बुर्का या घूंघट में मतदान करने आती हैं। यदि किसी सेविका को यह आशंका होती है कि कोई महिला फर्जी पहचान के साथ वोट डालने की कोशिश कर रही है, तो वह तुरंत उसकी पहचान पत्र से पुष्टि करती है।
फर्जी वोटिंग की रोकथाम के लिए बूथों पर तैनात इन आंगनबाड़ी सेविकाओं को जिला स्तर पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण में उन्हें सिखाया गया है कि पहचान पत्रों का सटीक मिलान कैसे करना है और यह प्रक्रिया किस तरह व्यवहार कुशलता के साथ पूरी करनी है ताकि किसी को अपमानित महसूस न हो।
दरअसल, चुनावों के दौरान घूंघट और बुर्का में आने वाली महिलाओं की पहचान करना चुनाव अधिकारियों के लिए हमेशा से एक चुनौती रहा है। इसी मुद्दे पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कुछ समय पहले चुनाव आयोग से मांग की थी कि फर्जी वोटिंग रोकने के लिए बुर्का पहनी महिलाओं की वोटर कार्ड से पहचान की व्यवस्था की जाए। आयोग ने इस सुझाव पर गंभीरता से विचार करते हुए इसे लागू करने का निर्णय लिया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस व्यवस्था को लेकर साफ कहा कि यह कदम किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य केवल पारदर्शी और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि चुनाव की हर प्रक्रिया का एक निर्धारित तरीका होता है, और इस व्यवस्था से सिर्फ यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी व्यक्ति की जगह कोई दूसरा व्यक्ति वोट न डाले।
उन्होंने आगे चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति पहचान छुपाकर या किसी और की जगह वोट डालने की कोशिश करता पकड़ा गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम बिहार के चुनाव इतिहास में पहली बार उठाया गया है जब महिलाओं की पहचान सत्यापन के लिए अलग से महिला कर्मियों की तैनाती की गई है। इससे ग्रामीण इलाकों में मतदान की पारदर्शिता और महिला मतदाताओं की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित होंगी। आयोग का मानना है कि इस व्यवस्था से न सिर्फ फर्जी वोटिंग पर लगाम लगेगी, बल्कि मतदान प्रक्रिया में जनता का भरोसा भी मजबूत होगा।