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09-Nov-2025 10:00 AM
By First Bihar
Bihar Politics : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण में चार सीटें—जहानाबाद, घोसी, कुर्था और अरवल—ऐसी हैं, जहां एनडीए और महागठबंधन दोनों गठबंधन ने अपने उम्मीदवारों में बड़ा फेरबदल किया है। यह बदलाव न सिर्फ स्थानीय समीकरणों का परिणाम है, बल्कि इन सीटों पर नए चेहरों के जरिए जनता के मूड को परखने की रणनीति भी मानी जा रही है। दोनों गठबंधनों ने कुल चार में दो-दो सीटों पर प्रयोग किए हैं।
जहानाबाद: दोनों गठबंधनों का दांव नया
जहानाबाद सीट पर इस बार एनडीए और महागठबंधन दोनों ने अपने उम्मीदवार बदले हैं। वर्ष 2020 में इस सीट से राजद के सुदय यादव ने जीत दर्ज की थी। लेकिन इस बार राजद ने उन्हें टिकट न देकर राहुल शर्मा पर भरोसा जताया है। राहुल शर्मा पहले जदयू के टिकट पर घोसी से चुनाव लड़ चुके हैं, बाद में उन्होंने राजद का दामन थाम लिया। अब उन्हें जहानाबाद से प्रत्याशी बनाकर राजद ने एक बड़ा राजनीतिक प्रयोग किया है।
दूसरी ओर, एनडीए ने इस सीट पर चंद्रेश्वर चंद्रवंशी को उतारा है। चंद्रवंशी जदयू के टिकट पर जहानाबाद से सांसद रह चुके हैं। उनका स्थानीय प्रभाव और पुराना अनुभव एनडीए के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। यानी, जहानाबाद में इस बार दोनों गठबंधन नए समीकरणों के साथ मैदान में हैं।
कुर्था: सुदय यादव बनाम पप्पू कुमार वर्मा
कुर्था सीट पर भी स्थिति दिलचस्प है। 2020 में राजद के बागी उम्मीदवार कुमार वर्मा ने जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार राजद ने उन्हें टिकट से वंचित कर दिया। पार्टी ने जहानाबाद के पूर्व विधायक सुदय यादव को कुर्था से उतारा है। यानी, जहानाबाद के पूर्व विधायक अब कुर्था में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
एनडीए की ओर से यह सीट जदयू के खाते में गई है। पिछली बार यहां जदयू के सत्यदेव कुशवाहा को हार का सामना करना पड़ा था। इस बार जदयू ने भी चेहरा बदलते हुए पप्पू कुमार वर्मा को प्रत्याशी बनाया है। कुर्था की लड़ाई में दोनों पक्षों के नए चेहरों की परीक्षा होगी।
घोसी: पिता की विरासत को संभालेंगे ऋतुराज
घोसी विधानसभा क्षेत्र में जदयू ने बड़ा प्रयोग किया है। जहानाबाद के पूर्व सांसद अरुण कुमार हाल ही में अपने पुत्र ऋतुराज के साथ जदयू में शामिल हुए थे। पार्टी ने उन्हें तुरंत टिकट देकर घोसी से प्रत्याशी बना दिया। यह एनडीए के लिए नया प्रयोग है, जिसमें युवा नेतृत्व को मौका दिया गया है।
महागठबंधन की ओर से यह सीट भाकपा (माले) के पास है। माले ने अपने वर्तमान विधायक रामबली सिंह यादव को ही दोबारा प्रत्याशी बनाया है। रामबली सिंह यादव का स्थानीय संगठन मजबूत माना जाता है, और उनकी जमीनी पकड़ एनडीए के नए प्रत्याशी के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
अरवल: भाजपा ने फिर से बदला चेहरा
अरवल सीट पर एनडीए की ओर से भाजपा ने अपने पुराने प्रत्याशी को बदल दिया है। 2020 में दीपक कुमार शर्मा यहां से भाजपा उम्मीदवार थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इस बार भाजपा ने मनोज शर्मा को मौका दिया है। भाजपा का यह कदम स्थानीय समीकरणों और प्रत्याशी की लोकप्रियता को ध्यान में रखकर उठाया गया माना जा रहा है।
महागठबंधन की ओर से अरवल सीट फिर से भाकपा (माले) के खाते में है। वर्तमान विधायक महानंद सिंह को पार्टी ने पुनः उम्मीदवार बनाया है। माले ने अपने पुराने चेहरों पर भरोसा जताया है, जबकि भाजपा नए प्रत्याशी के साथ मैदान में उतरी है।
चार सीटें, चार प्रयोग, बड़ा दांव
जहानाबाद, घोसी, कुर्था और अरवल—इन चारों सीटों पर प्रत्याशियों के बदलाव से साफ है कि दोनों गठबंधन जनता के मूड और स्थानीय समीकरणों को लेकर नए प्रयोग कर रहे हैं। राजद ने जहां अपने दो विधायकों को बदल दिया है, वहीं एनडीए ने उन चेहरों पर दांव लगाया है जो पिछली बार जीत नहीं सके थे, लेकिन राजनीतिक अनुभव रखते हैं।
इन सीटों पर मुकाबला इस बार न केवल उम्मीदवारों का है, बल्कि यह दोनों गठबंधनों के रणनीतिक सोच की भी परीक्षा है। 11 नवंबर को होने वाले मतदान में यह तय होगा कि जनता इन प्रयोगों को मंजूर करती है या पुराने चेहरों को याद करती है। कुल मिलाकर, दूसरा चरण बिहार की सियासत में कई नए समीकरणों को जन्म देने वाला साबित हो सकता है।