Bihar News: बिहार के एक अधिकारी का आचरण गंदा है.महिला सिपाहियो के साथ छेड़छाड़-अश्लील हरकत करते हैं. डर के मारे महिला कर्मी शिकायत नहीं करतीं. उत्पाद विभाग के अधीक्षक दलालों के माध्यम से मोटी कमाई कर रहे, उत्पाद थानेदार से पैसा वसूली का दबाव बनाते हैं,पैसा नहीं देने पर हटा देते हैं. बिहार की सत्ताधारी पार्टी भाजपा के एक विधायक के पत्र से हड़कंप मच गया है. मुख्य सचिव से शिकायत के बाद मद्य निषेध विभाग के सचिव ने 15 दिनों में जांच रिपोर्ट देने को कहा, 24 दिन हो गए, अभी भी जांच रिपोर्ट नहीं आई है.
समस्तीपुर के अधीक्षक करते हैं गंदा काम....
मामला समस्तीपुर के उत्पाद अधीक्षक से जुड़ा है. मोहद्दीननगर के भाजपा विधायक राजेश कुमार सिंह ने जुलाई माह की शुरूआत में ही मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत से समस्तीपुर के उत्पाद अधीक्षक के क्रियाकलाप की शिकायत की. मुख्य सचिव को लिखे पत्र में भाजपा विधायक ने समस्तीपुर में पदस्थापित भ्रष्ट एवं आचरणहीन उत्पाद अधीक्षक के खिलाफ जांच कर कार्रवाई करने का अनुरोध किया है. भाजपा विधायक ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि समस्तीपुर जिले में पदस्थापित उत्पाद अधीक्षक का आचरण काफी गंदा है. ये अपने कई विभागीय दलालों के माध्यम से पैसा की वसूली कर काली कमाई करते हैं. साथ ही मद्य निषेध की महिला पुलिसकर्मियों के साथ अश्लील हरकत एवं छेड़छाड़ करते हैं. वरीय पदाधिकारी होने की वजह से विभाग की पीड़ित महिला पुलिसकर्मी उनके खिलाफ आवाज नहीं उठा पातीं. उत्पाद थाने का जो थानेदार अवैध उगाही कर अधीक्षक को पैसा नहीं पहुंचाता, उन्हें 2-3 महीने में ही हटा दिया जाता है. यह गहन जांच का विषय है.
मद्य निषेध सचिव ने जांच के दिए हैं आदेश....
भाजपा विधायक ने जनहित में उत्पाद अधीक्षक समस्तीपुर को तत्काल स्थानांतरित करने की मांग किया है. साथ ही इनके खिलाफ जांच कर विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई करने को कहा है. भाजपा विधायक की शिकायत के बाद मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने मद्य निषेध विभाग के सचिव को जांच के लिए पत्र भेजा. इसके बाद विभागीय सचिव ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं. 7 जुलाई 2026 को विभाग के उप सचिव जितेन्द्र कुमार ने ईआईबी के उपायुक्त को जांच कर 15 दिनों में रिपोर्ट देने को कहा. हालांकि जांच पूर्ण नहीं की गई.
क्या कहते हैं जांच अधिकारी....
मद्य निषेध विभाग ने ईआईबी के उपायुक्त सुरेन्द्र प्रसाद को जांच का जिम्मा दिया है. जब हमने इस गंभईर आरोपों की जांच के संबंध में जांच अधिकारी सुरेन्द्र प्रसाद से पूछा, तो उन्होंने बताया कि 2-4 रोज में रिपोर्ट दे देंगे. हमने पूछा कि क्या आप समस्तीपुर जाकर जांच किए हैं ? इस पर उन्होंने कहा कि 1 बार समस्तीपुर गए हैं, एक और जाकर रिपोर्ट तैयार करेंगे,इसके बाद विभाग को जांच रिपोर्ट दे देंगे. पूछा गया कि आरोप काफी गंभीर किस्म के हैं, इस पर उन्होंने कहा कि सभी बिंदुओं पर जांच कर रिपोर्ट तैयार किया जायेगा.
वैसे बता दें, मद्य निषेध विभाग ने जिस अधिकारी संजय प्रसाद को ईआईबी का उपायुक्त बना कर रखा है. उन पर भी करप्शन के गंभीर आरोप हैं. इन्हें हीं इतने गंभीर मामले की जांच का जिम्मा दिया गया है. निगरानी विभाग की तरफ से बताया गया है कि सुरेन्द्र प्रसाद के खिलाफ ट्रैप केस (रिश्वत लेते गिरफ्तारी) दर्ज है. इस मामले में वो चार्जशीटेड भी हैं.
सुरेन्द्र प्रसाद के खिलाफ दर्ज है ट्रैप केस..चार्जशीटेड हैं...
समस्तीपुर के तत्कालीन इंस्पेक्टर सुरेन्द्र प्रसाद रिश्वत लेते गिरफ्तार हुए थे. निगरानी ने इनके खिलाफ 20 अप्रैल 2007 को केस सं- 53 दर्ज किया था. विजिलेंस ने इस केस में 18 जून 2007 को ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दिया. जिसका नंबर है CS-95/07. केस की क्या स्थिति है कोई अता पता नहीं.