PATNA: नीट-यूजी पुनर्परीक्षा(री - नीट) के दौरान बिहार में एक बड़े सॉल्वर गैंग का खुलासा हुआ है। लखीसराय जिले में सॉल्वर गैंग के सदस्यों के पकड़े जाने के बाद हुए खुलासे से पूरे बायोमेट्रिक सत्यापन सिस्टम में सेंध लगाने का मामला सामने आया है। गैंग ने असली अभ्यर्थियों की जगह प्रोफेशनल स्कॉलर्स (सॉल्वर्स) को बिठाने के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन में धांधली की। री-नीट परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले 30 लोगों को बिहार पुलिस ने गिरफ्तार किया है, इसमें बायोमेट्रिक्स कंपनी के 3 सुपरवाइजर और 14 स्टाफ समेत कुल 17 करवाती शामिल हैं.


ब्लैकलिस्टेड कंपनी को ठेका

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने री-नीट परीक्षा के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन का ठेका एजुकेशनल कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (EDCIL) को दिया था। EDCIL ने यह काम इनोवेटिव व्यू नामक कंपनी को सौंप दिया। हैरानी की बात यह है कि यह कंपनी पहले ही कई राज्यों द्वारा ब्लैकलिस्टेड घोषित की जा चुकी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 2022 में, जबकि झारखंड और तमिलनाडु सरकारों ने 2025 में इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। जांच एजेंसियां अब इनोवेटिव व्यू कंपनी के पूरे नेटवर्क की छानबीन कर रही हैं।


इस तरह हुई सेटिंग 

री- नीट परीक्षा के लिए 14 जून को एडमिट कार्ड जारी होते ही माफिया ने इनोवेटिव व्यू कंपनी के सुपरवाइजरों को सेट करना शुरू कर दिया। गैंग का प्लान बेहद सूक्ष्म था। असली अभ्यर्थी का बायोमेट्रिक सत्यापन परीक्षा केंद्र से 100-150 मीटर दूर खड़ी गाड़ी में कर लिया जाता था। इसके बाद स्कॉलर (सॉल्वर) परीक्षा केंद्र के अंदर जाता और उसका डमी बायोमेट्रिक लिया जाता। बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद पहचान छिपाने के लिए स्कॉलर के अंगूठे के निशान जानबूझकर बिगाड़ दिए जाते थे।


गुप्त ईमेल ने खोला राज

21 जून को दोपहर 12 बजे बिहार पुलिस मुख्यालय और एनटीए को एक अहम गुप्त ईमेल मिला। ईमेल में बताया गया कि केंद्रीय विद्यालय केंद्र में मधु प्रिया की जगह पूनम कुमारी (बीएचयू की बीएससी नर्सिंग छात्रा) परीक्षा दे रही है।इस सूचना के आधार पर लखीसराय में छापेमारी की गई और गैंग के सदस्य गिरफ्तार हुए। 


PMCH का छात्र था मुख्य सरगना

री नीट परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप में गिरफ्तार व्यक्ति ने खुद को मयंक कश्यप बताया, लेकिन जांच में उसका असली नाम अश्विनी कुमार निकला।मुख्य सेटर अश्विनी कुमार मूल रूप से हाजीपुर (वैशाली) का रहने वाला है। वह पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) का 2022 बैच का थर्ड ईयर एमबीबीएस छात्र है। उसने मयंक कश्यप नाम से सिम कार्ड भी लिया था।अश्विनी बायोमेट्रिक कर्मचारी बनकर परीक्षा केंद्र में घुसा और अंदर स्कॉलर्स की मदद करता रहा।


PMCH में बनाया फर्जी अटेंडेंस 

परीक्षा वाले दिन अश्विनी कुमार लखीसराय केंद्र में मौजूद था, जबकि पीएमसीएच के सर्जरी विभाग में उसकी स्पेशल क्लास की फर्जी अटेंडेंस लगाई गई थी। पीएमसीएच प्रशासन अब इस फर्जी अटेंडेंस की जांच कर रहा है।


60 लाख में हुई डील

पुलिस के अनुसार, गैंग के सरगना ने एक अभ्यर्थी को पास कराने के लिए 60 लाख रुपये तक की डील की थी, जिसमें मुख्य सेटर अश्विनी कुमार को 25 लाख रुपये मिलने थे।


किन अभ्यर्थियों की जगह कौन स्कॉलर बैठा?

जांच में अब तक निम्नलिखित बड़े मामलों का खुलासा हुआ है। 

संजीत कुमार की जगह मंतोष कुमार (जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज, चौथे वर्ष एमबीबीएस का छात्र) ने परीक्षा दिया ।

प्रभात अमन की जगह  विवेक कुमार (एएनएमएमसीएच, गया, चौथे वर्ष के छात्र) ने एग्जाम दिया।

शुभम वर्मा की जगह हिमांशु कुमार (सरकारी मेडिकल कॉलेज, सतना, मध्य प्रदेश, प्रथम वर्ष के छात्र) परीक्षा में शामिल हुआ.।

ईशान सिंह की जगह सौरभ जी झा (एम्स रायबरेली, चौथे वर्ष एमबीबीएस के छात्र) ने परीक्षा दी।

मधुप्रिया की जगह  पूनम कुमारी (बीएचयू, बीएससी नर्सिंग की छात्रा ) ने एग्जाम दिया। पूनम झारखंड की गिरिडीह की रहने वाली हैं और 2021 में जैक बोर्ड की 12वीं साइंस में झारखंड टॉपर रहीं।

अक्षत दुबे की जगह अमन अग्रवाल ( कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज, दिल्ली, एमबीबीएस इंटर्न) ने परीक्षा दिया।

निरंजन की जगह  रौशन कुमार (एनएमसीएच, पटना, बी.फार्मा चौथे वर्ष का छात्र) एग्जाम में शामिल हुआ।

नंदनी राज की जगह  चंचल कुमारी (सरकारी आयुर्वेदिक कॉलेज, ओडिशा, बीएएमएस की छात्रा) एग्जाम में उपस्थित हुई।

राहुल कुमार प्रिंस की जगह  जितेंद्र कुमार (एनएमसीएच, पटना का छात्र) परीक्षा में बैठा।


अभी और खुलासे की उम्मीद

बिहार पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां इनोवेटिव व्यू कंपनी के सुपरवाइजरों, बायोमेट्रिक डेटा और पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही हैं। पुलिस ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।यह घोटाला एक बार फिर राष्ट्रीय परीक्षाओं में आउटसोर्सिंग, बायोमेट्रिक सुरक्षा और ठेकेदारों की छानबीन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।