Bihar Crime News: पटना के चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) गौरव गुंजन और अन्य के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की है। उन पर फर्जी दस्तावेजों और कथित तौर पर गलत प्रमाण पत्रों के आधार पर करीब 457 करोड़ रुपये की रकम भारत से बाहर भेजने में मदद करने का आरोप है। मामला आयकर विभाग की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के बाद दर्ज किया गया है।



प्राथमिकी में गौरव गुंजन पर लोकसेवक को गलत जानकारी देने, कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक साजिश के जरिए धोखाधड़ी करने समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वह पटना के दीघा स्थित मिथिला कॉलोनी के दुलार इंक्लेव में रहते हैं।



आरोप है कि गौरव गुंजन ने मुंबई और बेंगलुरु समेत अन्य शहरों की कुछ कंपनियों की बड़ी रकम विदेश भेजने के लिए आवश्यक प्रमाण पत्र जारी किए। आयकर विभाग की जांच के मुताबिक, विभिन्न कंपनियों से करोड़ों रुपये विदेश भेजे जाने की बात सामने आई है।



जांच में मुंबई के अंधेरी स्थित Jokerplus India Private Limited से वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान करीब 195.26 करोड़ रुपये विदेश भेजे जाने की जानकारी सामने आई। इसी तरह बेंगलुरु की Insure Assist and Technology Private Limited से 2024-25 और 2025-26 में करीब 193.52 करोड़ रुपये विदेश भेजे जाने की बात कही गई है।



इसके अलावा मुंबई की Films@50 से करीब 111.73 करोड़ रुपये, मुंबई की Dharmesh Technology से करीब 9.68 करोड़ रुपये, ओडिशा की Evolox Infotech Private Limited से करीब 20.41 करोड़ रुपये और जानकीपुरम की Vikritai Technologies and Media Private Limited से करीब 11.33 करोड़ रुपये विदेश भेजे जाने का आरोप प्राथमिकी में लगाया गया है। इसके अलावा NRI संजीव कुमार सिंह की करीब 31 लाख रुपये की रकम भी इसी अवधि में विदेश भेजे जाने की बात प्राथमिकी में कही गई है।



यह मामला आयकर विभाग के देशव्यापी सत्यापन अभियान के दौरान सामने आया। अभियान के तहत पटना के अलावा मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, अहमदाबाद और चेन्नई समेत कई शहरों में 394 इकाइयों और 36 पेशेवरों की जांच की गई थी। इसी जांच के दौरान गौरव गुंजन से जुड़ी गतिविधियां भी आयकर विभाग की जांच के दायरे में आईं। इसके बाद 18 अगस्त 2026 को पटना स्थित उनके फ्लैट में तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की गई।



आयकर विभाग का आरोप है कि गौरव गुंजन ने कंपनियों के दस्तावेजों और अन्य जरूरी साक्ष्यों का पर्याप्त सत्यापन किए बिना ही विदेश रकम भेजने के लिए प्रमाण पत्र जारी किए। एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की जिम्मेदारियों में विदेश में रकम भेजने वाले व्यक्ति या कंपनी से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन करना भी शामिल होता है। 



इसमें लाभार्थी और भुगतानकर्ता के बीच समझौता, निवास प्रमाण, भुगतान का उद्देश्य और अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच शामिल हो सकती है। इसके अलावा भुगतान पर लागू टैक्स और TDS की सही दर निर्धारित करना भी आवश्यक होता है। प्राथमिकी में आरोप है कि इन जरूरी प्रक्रियाओं का पर्याप्त रूप से पालन किए बिना प्रमाण पत्र जारी किए गए।




Form 15CB का इस्तेमाल कुछ ऐसे कर-योग्य भुगतानों के संबंध में टैक्स जांच के लिए किया जाता है, जो विदेश में किसी NRI या विदेशी कंपनी को किए जाने हैं। यह प्रमाण पत्र पंजीकृत चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा आयकर विभाग के ई-फाइलिंग सिस्टम के माध्यम से जारी किया जाता है।



इसमें भुगतान की प्रकृति, उस पर लागू TDS और संबंधित आयकर प्रावधानों जैसी जानकारियां दर्ज की जाती हैं। इस मामले में आरोप है कि इसी तरह के प्रमाण पत्रों के आधार पर कंपनियों की बड़ी रकम विदेश भेजी गई।अब EOU ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसी विदेश भेजी गई रकम, संबंधित दस्तावेजों, प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया और इस पूरे मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।