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06-Apr-2026 10:45 PM
By MANOJ KUMAR
MUZAFFARPUR: बिहार पुलिस मुख्यालय की तमाम सख्ती और भ्रष्टाचार के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' की नीति के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात सुधरते नहीं दिख रहे हैं। ताजा मामला मुजफ्फरपुर जिले के पीयर थाना का है, जहाँ एक दलाल के माध्यम से रिश्वत लेते हुए अपर थानेदार का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद मुजफ्फरपुर एसएसपी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी सब-इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद नूनफारा ग्राम से जुड़े एक पुराने मामले से शुरू हुआ। इस केस में सीताराम नामक व्यक्ति को पहले ही जेल भेजा जा चुका था। आरोप है कि इसी मामले में मदद करने और कार्रवाई को हल्का करने के नाम पर शत्रुघ्न राम नामक व्यक्ति से मोटी रकम की मांग की गई थी। पीड़ित शत्रुघ्न राम ने बताया कि थाने का एक कथित दलाल, राम कुमार राय, उसे लगातार पैसों के लिए प्रताड़ित कर रहा था। दबाव इतना अधिक था कि पीड़ित को कर्ज लेकर रुपयों का इंतजाम करना पड़ा। हालांकि, भ्रष्टाचार से तंग आकर उसने इस पूरे खेल को बेनकाब करने का मन बना लिया।
कैमरे में कैद हुआ 'नजराने' का खेल
जब पीड़ित व्यक्ति साहब के आवास पर पैसे देने पहुँचा, तो उसके साथ मौजूद एक साथी ने चतुराई से मोबाइल फोन के जरिए पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो में 2019 बैच के सब-इंस्पेक्टर और वर्तमान अपर थानेदार अभिनंदन कुमार के लिए उनके खास दलाल द्वारा 5000 रुपये स्वीकार करते हुए दृश्य कैद हुए हैं। पीड़ित का यह भी आरोप है कि पुलिस ने किसी प्रभावशाली व्यक्ति के इशारे पर झूठे केस में फंसाकर यह पूरी साजिश रची थी।
विवादों का केंद्र बना पीयर थाना: पीयर थाना पिछले कुछ समय से लगातार नकारात्मक कारणों से सुर्खियों में रहा है। हाल ही में एक सरपंच की बेरहमी से पिटाई के मामले में यहाँ के तत्कालीन थानेदार को निलंबित किया गया था। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि थाना अब दलालों के चंगुल में है। बिना 'सुविधा शुल्क' या बिचौलियों के हस्तक्षेप के यहाँ कोई भी जायज काम होना नामुमकिन सा हो गया है।
एसएसपी की सख्त कार्रवाई
वीडियो वायरल होने और मामला मीडिया में आने के बाद मुजफ्फरपुर के एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने तत्काल जांच के आदेश दिए और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की। "वायरल वीडियो की सत्यता की पूरी तरह जांच की गई है। पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है। अनुशासनहीनता और छवि खराब करने वाले कर्मियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जाएगा। जांच के बाद दोषी पाए जाने पर अपर थानेदार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।"कांतेश कुमार मिश्रा, एसएसपी, मुजफ्फरपुर
इस घटना ने एक बार फिर खाकी की साख पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। जहाँ एक तरफ सरकार पुलिस के आधुनिकीकरण और जनता से जुड़ाव की बात करती है, वहीं इस तरह के 'वसूली कांड' निचले स्तर पर फैले भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करते हैं। अब देखना यह है कि विभाग दलालों के इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।