Bihar Crime News: मोकामा के कुख्यात अपराधी सोनू सिंह और उसके शागिर्द की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने बिहार के आठ जिलों में ताबड़तोड़ छापेमारी की है। हालांकि अब तक पुलिस को सफलता नहीं मिली है। कार्रवाई के लिए तीन डीएसपी के नेतृत्व में अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं, जबकि एसटीएफ की एक विशेष टीम भी तलाश में जुटी हुई है।
सोनू सिंह 24 मई को पंचमहला थाना क्षेत्र के नौरंगा जलालपुर गांव में हुई गोलीबारी मामले का नामजद आरोपी है। इस मामले में जलालपुर निवासी और पैक्स अध्यक्ष मुकेश सिंह के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। एफआईआर में सोनू सिंह, उसके पिता प्रमोद सिंह और सौरव सिंह को आरोपी बनाया गया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार गोलीबारी की घटना के बाद से सोनू सिंह फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए छपरा, सीवान, मोतिहारी, कटिहार, गया, गोपालगंज, समस्तीपुर और बेगूसराय समेत कई जिलों में छापेमारी की गई है।
सूचना मिली थी कि घटना के बाद वह बिहार से बाहर भागने की फिराक में है। इसी को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों में भी सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। पुलिस ने गांव के कई लोगों से पूछताछ भी की, लेकिन अभी तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है।
ग्रामीण एसपी कुंदन कुमार ने बताया कि सोनू सिंह की गिरफ्तारी के लिए लगातार कार्रवाई जारी है। रविवार देर रात भी कई जिलों में छापेमारी की गई, लेकिन वह पुलिस की पकड़ से बाहर है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
नौरंगा जलालपुर गांव निवासी सगे भाई सोनू और मोनू पिछले 18 वर्षों से अपराध की दुनिया में सक्रिय बताए जाते हैं। शुरुआत में दोनों छोटे-मोटे अपराधों को अंजाम देते थे, इसलिए लंबे समय तक पुलिस की नजर से बचे रहे। दोनों भाइयों के खिलाफ पहली प्राथमिकी वर्ष 2009 में मोकामा रेल थाना में लूट के मामले में दर्ज हुई थी। इसके बाद उन्होंने लखीसराय समेत कई इलाकों में लूट और अन्य आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया। धीरे-धीरे दोनों का आतंक और अपराध का नेटवर्क बढ़ता गया।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दोनों भाइयों पर विभिन्न थानों में 30 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। अधिकतर मामलों में दोनों एक साथ नामजद हैं। बेगूसराय के कई थानों में उनके खिलाफ अपहरण के भी केस दर्ज हैं। पटना जिले के बाढ़, मोकामा, खुसरूपुर, कंकड़बाग, हाथीदह और पचमहला थाना के अलावा बेगूसराय के तेघड़ा तथा लखीसराय के बड़हिया और हलसी थाना क्षेत्रों में भी दोनों भाइयों के खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। वर्ष 2019 में दोनों भाइयों ने एक मनरेगा अधिकारी का अपहरण कर लिया था। हालांकि तेघड़ा थाना पुलिस ने समय रहते कार्रवाई करते हुए अधिकारी को सकुशल बरामद कर लिया था।