Bihar News: पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) के सामने मोबाइल पटक कर अमर्यादित व्यवहार करने की आरोपी महिला एसडीपीओ को सरकार ने क्लिनचिट दे दिया है. इस संबंध में गृह विभाग की तरफ से पत्र जारी किया गया है. पटना हाईकोर्ट के आदेश पर आरोपी डीएसपी की बातों को दुबारा सुना गया. इसके बाद इनके पक्ष को स्वीकार कर लिया गया.
दरअसल, आईजी दरभंगा ने 31 मार्च 2017 को झंझारपुर एसडीपीओ कार्यालय का निरीक्षण किया था. इस दौरान मधुबनी के एसपी भी मौजूद थे. आरोप था कि, निरीक्षण के दौरान झंझारपुर के तत्कालीन एसडीपीओ सुश्री निर्मला कुमारी ने सहयोग नहीं किया. आईजी ने तत्कालीन एसडीपीओ को कमियों पर ध्यान देने का सुझाव दिया . इसी पर एसडीपीओ अचानक अमर्यादित तरीके से उंची आवाज में बोलने लगीं. ऊंची आवाज में बोलने के दौरान अपना सरकारी मोबाइल, कैप, एवं अन्य अभिलेखों को फेकना शुरू कर दिया. इस तरह के अमर्यादित व्यवहार और आचरण की वजह से आईजी दरभंगा को निरीक्षण कार्य बीच में छोड़ना पड़ा था. इन आरोपों को लेकर आईजी दरभंगा ने डीजीपी से शिकायत की थी. डीजीपी के आदेश पर आईजी (मुख्यालय) ने गृह विभाग को रिपोर्ट किया था.
शिकायत के बाद, आरोपी एसडीपीओ से 13 सितंबर 2017 को लिखित जवाब मांगा गया. इन्होंने जो जवाब दिया, उसमें अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को खारिज किया. इनके जवाब से असंतुष्ट होते हुए गृह विभाग ने विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय लिया. तिरहुत के आईजी को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया. जांच पदाधिकारी ने तमाम आरोपों को सही पाया. इसके बाद गृह विभाग ने 8 जून 2021 को आरोपी एसडीपीओ सुश्री निर्मला को निंदन और असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतन वृद्धि रोकने का दंड लगाया. दंड दिए जाने के बाद इन्होंने पुनरीक्षण आवेदन दिया. उसे भी सरकार ने रद्द कर दिया. इसके बाद तत्कालीन एसडीपीओ ने पटना हाईकोर्ट का रूख किया.
पटना हाईकोर्ट ने 3 अगस्त 2026 को राज्य सरकार द्वारा दिए गए दंड को निरस्त कर दिया. साथ ही आदेश दिया कि फिर से व्यक्तिगत सुनवाई की जाए. सुनवाई के दौरान एसडीपीओ द्वारा समर्पित आवेदन की समीक्षा में पाया गया कि आरोपी अधिकारी द्वारा उठाए गए दो बिंदु –निरीक्षी पदाधिकारी आईजी द्वारा निरीक्षण प्रतिवेदन का विधिवत निर्गत नहीं होना एवं निरीक्षी पदाधिकारी का संचालन के दौरान गवाही के लिए उपस्थित नहीं होना विचारणीय है. विचार के दौरान पाया गया कि आरोप निरीक्षण के दौरान एक सामान्य शिष्टाचार में कमी का है. ऐसे में इन पर जो दंड दिया गया है वो दंड समानुपातिक नहीं है.
ऐसे में गृह विभाग ने तत्कालीन अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी झंझारपुर सुश्री निर्मला कुमारी जो वर्तमान में बिहार स्वाभिमान विशेष सशष्त्र पुलिस वाल्मिकी नगर की समादेष्टा हैं, इन्हें भविष्य में सचेत रहने की हिदायत दिए जाने का निर्णय लिया . साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि, भविष्य में इस तरह के आचरण की पुनरावृति नहीं हो. हालांकि इन बातों को तत्कालीन एसडीपीओ की चरित्र पुस्तिका में अंकित नहीं किया जायेगा.