CRIME DESK: कहा गया है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं..यह बात मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में सच साबित हुआ है। जहां 36 साल पुराने चोरी के मामले में फरार चल रहे आरोपी को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। वर्ष 1989 से कानून से बचता आ रहा आरोपी कालू अब 65 वर्ष का हो चुका है। उसके खिलाफ न्यायालय द्वारा जारी स्थायी वारंट आज भी प्रभावी था, जिसके आधार पर कोतवाली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया।
1989 में चोरी के मामले में हुआ था गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, वर्ष 1989 में कोतवाली थाना क्षेत्र में हुई एक चोरी के मामले में कालू, पिता सुखलाल, को गिरफ्तार किया गया था। अदालत में पेशी के बाद उसे अगली सुनवाई की तारीख पर उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था, लेकिन वह कोर्ट में पेश नहीं हुआ और फरार हो गया। इसके बाद न्यायालय ने उसके खिलाफ स्थायी वारंट जारी कर दिया।
पहचान छिपाकर तीन दशक तक बचता रहा
स्थायी वारंट जारी होने के बाद कालू अपना गांव छोड़कर दूसरे इलाके में रहने लगा। उसने अपनी पहचान छिपाकर करीब 36 वर्षों तक कानून से बचने की कोशिश की। इस दौरान उसकी उम्र 25 साल से बढ़कर 65 साल हो गई, लेकिन उसके खिलाफ जारी वारंट कभी समाप्त नहीं हुआ। पुलिस समय-समय पर उसकी तलाश करती रही, लेकिन वह लगातार गिरफ्त से बाहर रहा।
सूचना मिलते ही पुलिस ने दबोचा
जुलाई 2026 में कोतवाली पुलिस को कालू के ठिकाने की पुख्ता सूचना मिली। इसके बाद प्रधान आरक्षक रफीक खान और आरक्षक निर्भय ने लगातार प्रयास करते हुए उसकी तलाश की और आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को कोतवाली थाने लाकर 36 साल पुराने स्थायी वारंट की तामील की गई, जिसके बाद उसे न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।
'कानून के हाथ लंबे होते हैं'
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह गिरफ्तारी उन लोगों के लिए एक बड़ा संदेश है, जो यह मानते हैं कि वर्षों तक फरार रहने से कानूनी कार्रवाई समाप्त हो जाती है। अदालत द्वारा जारी स्थायी वारंट तब तक प्रभावी रहता है, जब तक उसकी विधिवत तामील नहीं हो जाती। पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अपराध करने के बाद कानून से लंबे समय तक बच पाना संभव नहीं है। देर-सवेर हर फरार आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना ही पड़ता है।