Bihar News: बिहार में शराबबंदी है. इस कानून को सफल बनाने की जिम्मेदारी उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की है. इस विभाग के अधिकारी शराब सप्लाई को रोकते नहीं, सिर्फ वसूली में लगे रहते हैं. हालात ऐसे हो गए हैं कि उत्पाद विभाग के अधिकारी वर्दी वाले अपहरणकर्ता बन गए हैं. शराब के नाम पर लोगों को पकड़ते हैं, फिर रात भर टॉचर करते हैं, सुबह होते-होते मोटी रकम की वसूली की जाती है. सीधे शब्दों में कहें तो पहले गुंडे लोगों का अपहरण कर फिरौती वसूलते थे, अब वर्दी वाले यह काम कर रहे. जहानाबाद में उत्पाद विभाग के वर्दी वालों का ऐसा चेहरा सामने आया है. खुलासा हुआ तो मामले दबाने की भरसक कोशिश हुई. पीड़ित पक्ष ने जब वरीय अफसरों तक मामले को पहुंचाया तो कार्रवाई की डर से वसूली गई रकम वापस कराई गई।
सवालों के घेरे में उत्पाद विभाग के अधिकारी
पटना से सटे जहानाबाद में उत्पाद विभाग के अधिकारी अपहरणकर्ता बन बैठे हैं. ये लोग आम लोगों को शराब पीने के जुर्म में पकड़ते हैं, फिर पिटाई कर मोटी रकम की वसूली करते हैं. वैसे यह मामला मार्च 2026 की है, तब इस मामले को दबा दिया गया था. खुलासे के डर से उत्पाद विभाग के अधिकारियों ने पैसा वापस कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की थी. अब यह मामला सामने आया है तो जिम्मेदार अधिकारी सवालों के घेरे में हैं. क्या वसूली का पैसा वापस कराने से जुर्म माफ हो जाएगा ? सरकारी सेवकों ने जो कृत्य किया है, उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए ? पैसा की वसूली करने वालों को बचाने वाले क्या कम जिम्मेदार हैं ?
बड़े मामले पर मिट्टी डालने की हुई थी कोशिश
नालंदा के इस्लामपुर थाना क्षेत्र के मनीचक के रहने वाले अम्पू कुमार और श्याम सुंदर शर्मा द्वारा जिलाधिकारी जहानाबाद द्वारा की गई लिखित शिकायत में आरोप लगाया है कि उत्पाद विभाग की टीम ने 2 लाख 10 हजार रू लेकर हमलोगों को छोड़ा है. आवेदन में कहा गया कि 9 मार्च को अम्पू कुमार और श्याम सुंदर शर्मा दोनों गया से इस्लामपुर की तरफ जा रहे थे. जहानाबाद के हुलासगंज के चौहरमल चौक के पास उत्पाद विभाग के अधिकारी वाहन की जांच कर रहे थे. जब उनकी गाड़ी वहां पहुंची तो इन लोगों ने गाड़ी रोका और चाबी छीन लिया. साथ ही दोनों का मोबाइल भी ले लिया. इसके बाद सहायक अवर निरीक्षक संतोष कुमार एवं निरीक्षक मुकेश कुमार गाली गलौज और मारपीट करने लगे. श्याम सुंदर शर्मा के पैकेट में रखे ₹60000 निकाल लिया गया. इसके बाद मारपीट करते हुए साहू बीघा नहर पर ले जाकर अम्पू कुमार से ₹100000 की मांग की गई. अम्पू ने मोबाइल नंबर 77620 ##### से 82921 ##### पर कॉल कर ₹100000 अपने पिता को लाने को कहा. अम्पू के पिताजी द्वारा साहू बीघा नहर पर लाकर मद्य निषेध विभाग के निरीक्षक मुकेश कुमार को उक्त राशि दी गई। अवर निरीक्षक रणजीत सिंह के द्वारा वीडियो बनाया गया जिसमें हमको कहा गया कि जैसा बोलेंगे वैसा ही बोलना है. इसके बाद हमने (अम्पू) उस वीडियो में कहा कि मारपीट नहीं किया गया है, न हीं पैसे का लेनदेन किया गया है. यह कहवाकर गाड़ी की चाबी और मोबाइल दे दिया गया.
जब तक 2.10 वसूला नहीं एक को बिठाये रखा
आवेदन में आगे लिखा गया है कि इसके बाद भी श्याम सुंदर शर्मा को गिरफ्तार कर रखा गया था. इनके छोड़ने की एवज में ₹50000 की मांग की गई. अम्पू ने अपने घर से ₹50000 लाकर सिहीं पेट्रोल पंप से आगे सहायक अवर निरीक्षक नवदीप सिंह को दिया. इस तरह से कुल मिलाकर 2 लाख 10 हजार रुपए दिया गया, तब जाकर श्याम सुंदर शर्मा को छोड़ा गया.
पीड़ित के पिता बोले- शिकायत के बाद पूरा पैसा वापस किया गया
पीड़ित अम्पू कुमार के पिता मिथिलेश सिंह ने इस घटना के बाद जहानाबाद के उत्पाद अधीक्षक के पास 12 मार्च को शिकायत लेकर पहुंच गए। उन्होंने कहा कि 9 मार्च को मेरे बेटे के साथ उत्पाद थाना के थानाध्यक्ष व अन्य कर्मियों ने जबरन 2 लाख 10 हजार रू लिए हैं. इसके बाद अधीक्षक दिलीप पाठक ने कहा कि आप लिखित में दीजिए। अगले दिन ये आवेदन लेकर डीएम के पास पहुंच गए। आवेदक अम्पू के पिता ने बताया कि 13 तारीख को मैडम को आवेदन दिए। तब मैडम ने अधीक्षक को कहा कि इनका पैसा वापस लौटवाइए, नहीं तो कार्रवाई करें. इशके बाद डेढ़ लाख रू लौटाया गया, फिर पूरा पैसा 2 लाख 10 हजार रू लौटाया गया.
क्या कहते हैं जहानाबाद के उत्पाद अधीक्षक
जहानाबाद उत्पाद के थानाध्यक्ष व अन्य कर्मियों के कृत्य पर अधीक्षक दिलीप कुमार पाठक ने कहा कि उनके पास यह मामला आया था. इसके बाद वे अम्पू कुमार के पिता को लेकर डीएम के पास गए थे. मामले में जांच कराई गई है, लेकिन जांच रिपोर्ट उन तक नहीं आई है. जांच रिपोर्ट के लिए 3-4 दिन पहले पत्राचार किया गया है. उत्पाद अधीक्षक से पूछा गया कि कार्रवाई के डर से आपके दारोगा और इंस्पेक्टर ने वसूली गई राशि 2.10 लाख रू वापस किया है, इसकी जानकारी आपको भी है, आपके समक्ष की राशि वापसी हुई है ? इस पर उन्होंने कहा कि पैसा की वापसी मेरे समक्ष नहीं हुआ है. हालांकि अधीक्षक का बयान ही बहुत कुछ इशारा कर रहा था.