PATNA: भोजपुर में भरत भूषण तिवारी की फेक एनकाउंटर के विरोध में आज रविवार को जन सुराज पार्टी ने पटना के करगिल चौक पर कैंडल मार्च निकाला और दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जेल भेजने की मांग की। जन सुराज पार्टी के नेताओं का कहना है कि भरत भूषण तिवारी का बिहार पुलिस ने फेक एनकांउटर किया है, जो कही से जायज नहीं है।
मृतक के परिजन को एक करोड़ रुपये मुआवजा और घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग जन सुराज ने की है। कहा है कि यदि यह मांगे पूरी नहीं होगी तो जन सुराज का आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। जन सुराज के नेताओं का कहना था कि सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी की पुलिस वालों ने गोली मारकर हत्या कर दी है, लेकिन इसे एनकाउंटर का नाम दिया जा रहा है। जबकि हकीकत में वह एनकाउंटर नहीं था। जब जब जुर्म बढ़ेगा संघर्ष और बढ़ेगा।
मुजफ्फरपुर के जिलाध्यक्ष इम्तियाज वारिश का कहना था कि भरत तिवारी इस धरती का बहादुर बेटा था, जिसकी पुलिसवालों ने निर्मम हत्या कर दी। उन्होंने यह मांग की है कि जो भी पुलिस पदाधिकारी दोषी हैं, उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए। उन्होंने कहा कि वहां के एसपी और एसडीएम सहित कई बड़े अधिकारी इसमें शामिल हैं, इन सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तार किया जाए। इन लोगों ने जो ऑडर कनीय पदाधिकारियों को दिया, उसे उन्होंने पूरा किया।
भरत तिवारी को ठोकने का ऑर्डर दिया तो पुलिस कर्मियों ने ठोक दिया। हम आज उनकी आत्मा की शांति के लिए पटना के करगिल चौक पर मोमबत्ती जलाने आए हैं। करगिल चौक आए जन सुराज के कार्यकर्ताओं के हाथों में जो तख्ती थी, उसमें फर्जी गोली नहीं चलेगी, हमें रक्षक चाहिए..भक्षक नहीं. गोली का नहीं संविधान का राज चलेगा, जनता का एक ही सवाल क्यों हुआ न्याय का बुरा हाल, सरेंडर के बाद हत्या लोकतंत्र पर आघात लिखा हुआ था।
बता दें कि अब बिहार के भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में लेटर पिटीशन दायर किया गया है, जिसमें तत्काल संज्ञान लेने और एनकाउंटर की न्यायिक जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही पुलिस कर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज करने का निर्देश देने की भी अपील की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में लेटर पिटीशन दाखिल
सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील नरेंद्र मिश्रा ने यह लेटर पिटीशन दाखिल किया है। इसमें कहा गया है कि मृतक भरत भूषण तिवारी की कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं थी और उनके परिजनों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह से अवैध थी। याचिका में बिहार सरकार से पूरे मामले पर जवाब तलब करने और स्थिति स्पष्ट करने की भी मांग की गई है।
हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे जांच
इस बीच मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का आदेश दिया है। जांच की जिम्मेदारी हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज को सौंपी गई है, ताकि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जा सके।
दो FIR दर्ज, जांच के दायरे में कई पहलू
पुलिस ने भोजपुर एनकाउंटर मामले में भरत तिवारी से जुड़े दो अलग-अलग FIR दर्ज किए हैं—पहली FIR में अवैध हथियार रखने, सरकारी काम में बाधा डालने, पुलिस पर गोली चलाने और आरोपी को पनाह देने जैसे आरोप शामिल हैं। इस मामले में उनके पिता और भाई को भी आरोपी बनाया गया है। दूसरी FIR सीधे पुलिस एनकाउंटर से संबंधित है।
मां ने भी की FIR की मांग
एनकाउंटर में मारे गए भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी ने भी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने जगदीशपुर DSP और शाहपुर थाना के तत्कालीन SHO पर कार्रवाई की मांग करते हुए आवेदन दिया है।