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पत्रकार मर्डर केस में गुरमीत राम रहीम बरी, अभी जेल में रहेगा या बाहर आएगा डेरा प्रमुख?

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बरी कर दिया। अन्य तीन दोषियों की सजा बरकरार रखी गई है। मृतक के बेटे अंशुल छत्रपति ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की चेतावनी दी।

07-Mar-2026 01:12 PM

By FIRST BIHAR

Ram Rahim: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बरी कर दिया है। यह फैसला विशेष सीबीआई अदालत द्वारा 2019 में दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के करीब सात साल बाद आया है।


मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल की खंडपीठ ने राम रहीम की अपील पर सुनवाई करते हुए उनकी सजा को रद्द कर दिया और उन्हें इस मामले के सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। हालांकि इस मामले में अन्य तीन दोषियों कुलदीप, निर्मल सिंह और किशन लाल की सजा को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है। हाईकोर्ट के इस फैसले पर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने गहरी निराशा जताई है। उन्होंने इसे बड़ा झटका बताते हुए कहा कि वे इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।


बता दें कि पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने जनवरी 2019 में गुरमीत राम रहीम सिंह सहित अन्य आरोपियों को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या की साजिश रचने का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ सभी दोषियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।


हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े साक्ष्यों और दलीलों की विस्तृत समीक्षा के बाद कहा कि गुरमीत राम रहीम के खिलाफ आरोप पर्याप्त रूप से सिद्ध नहीं हो सके। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। हालांकि राम रहीम फिलहाल रोहतक की सुनारिया जेल में ही रहेगा, क्योंकि वह दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सजा काट रहा है।


अक्टूबर 2002 में सिरसा में अपना स्थानीय अखबार ‘पूरा सच’ चलाने वाले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी, जिससे बाद में उनकी मौत हो गई थी। यह मामला उस समय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया था। छत्रपति ने अपने अखबार में डेरा प्रमुख के खिलाफ लगे आरोपों से जुड़ी कई खबरें प्रकाशित की थीं, जिनमें डेरा के भीतर साध्वियों के यौन शोषण के आरोपों से संबंधित एक गुमनाम पत्र भी शामिल था। इसके बाद इस मामले की जांच का दायरा बढ़ा और बाद में इसे सीबीआई को सौंप दिया गया।