Bihar Crime News: बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में कदाचार और भ्रष्टाचार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई की कार्रवाई लगातार तेज हो गई है। EOU के डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लो ने बताया कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और प्रश्नपत्र लीक से जुड़े मामलों की जांच में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।


डीआईजी के अनुसार, BPSC द्वारा आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा-2026 में कदाचार और प्रश्नपत्र लीक से जुड़े पांच मामले मुंगेर, नालंदा, वैशाली, बेगूसराय और नवादा जिलों में दर्ज किए गए थे। इन मामलों की जांच EOU ने अपने हाथ में ली, जिसके बाद अब तक 35 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।


इसके अलावा, सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी परीक्षा-2026 में गड़बड़ी से जुड़े पटना के श्रीकृष्णापुरी थाना कांड की भी जांच चल रही है। इस मामले में अब तक दो लोगों की गिरफ्तारी हुई है। दोनों परीक्षाओं को मिलाकर कुल 37 अभियुक्त गिरफ्तार किए जा चुके हैं।


जांच में यह भी सामने आया है कि बायोमेट्रिक सत्यापन का कार्य करने वाली जयपुर स्थित कंपनी मेसर्स साई एजुकेयर प्राइवेट लिमिटेड के कई कर्मी इस गड़बड़ी में शामिल थे। गिरफ्तार आरोपियों में जिला समन्वयक, बायोमेट्रिक सुपरवाइजर और ऑपरेटर स्तर के कर्मचारी शामिल हैं। इनमें नालंदा के ब्रजेश कुमार, मुंगेर के रामरत्न कुमार उर्फ मास्टर, समीर उर्फ मनीष पासवान सहित कई नाम शामिल हैं।


डीआईजी ने बताया कि जांच में यह भी पाया गया है कि कंपनी के कई कर्मचारी स्वयं AEDO परीक्षा के अभ्यर्थी थे, जबकि नियमों के अनुसार उन्हें इसकी जानकारी देना अनिवार्य था। कुछ कर्मियों का आपराधिक इतिहास होने के बावजूद उनका उचित सत्यापन नहीं किया गया। इसके अलावा कई कर्मियों को अंतिम समय में परीक्षा केंद्रों पर तैनात किया गया, जिनके नाम आयोग को दी गई सूची में शामिल नहीं थे। इन गंभीर अनियमितताओं के आधार पर संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।


इसी तरह, बेगूसराय, छपरा और नालंदा में ब्लूटूथ और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से नकल कराने के मामलों में जैमर सेवा प्रदाता ECIL के कर्मियों की भूमिका और संभावित लापरवाही की भी जांच की जा रही है।


EOU ने बताया कि आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर NEET UG 2026 Re-exam और सिपाही भर्ती परीक्षा को लेकर विशेष निगरानी व्यवस्था की गई है। इसके लिए एक विशेष कोषांग गठित किया गया है, जो पूर्व के आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखेगा और खुफिया सूचनाएं एकत्र करेगा।


डीआईजी ने यह भी जानकारी दी कि आय से अधिक संपत्ति के मामलों में कई अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है। इसमें सुपौल, जमुई, दरभंगा और हाजीपुर के कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। उन्होंने बताया कि संगठित आर्थिक अपराधों पर कार्रवाई के लिए EOU में एक नई शाखा गठित की गई है। साथ ही भूमि एवं राजस्व सुधार विभाग में भ्रष्टाचार मामलों की जांच के लिए विशेष SIT का गठन भी किया गया है।