NEW DELHI: दिल्ली पुलिस ने पीतमपुरा में चल रहे एक कथित फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का खुलासा किया है। पुलिस की माने तो दिल्ली से अमेरिका में रहने वाले लोगों को टेक-सपोर्ट स्कैम में फंसाकर करीब 100 करोड़ रुपये की ठगी की गई। मामले में 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।


गिरफ्तार 11 ठगों के पास से 41 लाख कैश, 29 लैपटॉप, 25 मोबाइल फोन, 8 राउटर और एक suv कार बरामद किया है। पुलिस ने बताया कि यह गिरोह अमेरिकी नागरिकों को पहले टेक्निकल प्रोब्लम का डर दिखाता था और फिर उनके बैंक अकाउंट से जुड़ी जानकारी का हवाला देकर गिफ्ट कार्ड या क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसे ऐंठता था।


दिल्ली के पीतमपुरा में चल रहा था कॉल सेंटर

पुलिस के अनुसार, IFSO यूनिट ने 21 सितंबर को पीतमपुरा गांव में किराये की जगह की तीसरी और चौथी मंजिल पर चल रहे कॉल सेंटर पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में 22 सितंबर को स्पेशल सेल थाने, नई दिल्ली में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया।


कंप्यूटर में मैलवेयर डालकर करते थे संपर्क

पुलिस के मुताबिक, गिरोह कथित तौर पर अमेरिकी नागरिकों के कंप्यूटर में दूर से मैलवेयर इंस्टॉल कराता था। इसके बाद कंप्यूटर स्क्रीन पर एक पॉप-अप दिखाई देता था, जिसमें तकनीकी सहायता के लिए टोल-फ्री नंबर दिया जाता था।जब पीड़ित उस नंबर पर फोन करता था तो कॉल सॉफ्ट-फोन एप्लिकेशन के जरिए पीतमपुरा स्थित कॉल सेंटर पहुंचती थी। यहां मौजूद एजेंट खुद को तकनीकी सहायता कर्मचारी बताते और पीड़ित के कंप्यूटर में वायरस या हैकिंग की समस्या होने का दावा करते थे। इसके बाद पीड़ितों से कथित तौर पर एक सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कराया जाता था, जिससे आरोपियों को कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस मिल जाता था।


फर्जी बैंक अधिकारी बनकर मांगते थे पैसे

पुलिस का आरोप है कि कंप्यूटर के बाद पीड़ितों को उनके बैंक खाते के खतरे में होने की बात बताई जाती थी। इसके बाद कॉल को गिरोह के दूसरे सदस्य के पास ट्रांसफर किया जाता था, जो खुद को बैंक अधिकारी बताता था। कथित फर्जी बैंक अधिकारी अमेरिकी नंबरों से वॉयस एप्लिकेशन के जरिए संपर्क करते थे और तकनीकी या बैंकिंग समस्या ठीक करने के नाम पर पीड़ितों से गिफ्ट कार्ड खरीदने अथवा क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसफर करने को कहते थे।


FBI के नाम से भेजते थे फर्जी दस्तावेज

पुलिस के अनुसार, कुछ मामलों में पीड़ितों पर दबाव बनाने के लिए आरोपियों ने FBI और अन्य अमेरिकी संघीय एजेंसियों की ओर से जारी होने का दावा करने वाले फर्जी दस्तावेज और संचार भी भेजे। गिरोह कथित तौर पर गिफ्ट कार्ड की जानकारी ऑनलाइन ग्रुप के जरिए अपने प्रमुख सदस्यों तक पहुंचाता था। इसके बाद इन गिफ्ट कार्ड को कहीं और रिडीम या कैश कराया जाता था।


फर्जी नामों से करते थे बातचीत

पुलिस के मुताबिक, पीड़ितों से बातचीत के दौरान आरोपी विलियम्स, रयान, सोफी, गेनी और एलेक्स जैसे फर्जी नामों का इस्तेमाल करते थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कवाल प्रीत सिंह उर्फ सनी सिंह, प्रशांत नंदा, अक्षत सिंह उर्फ शिवम, चित्रा नरह, रोहन जयरथ, गौरव सकलानी, सचिन घिल्डियाल उर्फ सचिन शर्मा, इरशाद रहमान, नवनीत उर्फ नवीन, नाइथौजाम और फेबो वांगशू के रूप में हुई है।


पुलिस के अनुसार, IFSO टीम को खुफिया जानकारी के आधार पर इस कॉल सेंटर के बारे में पता चला था। निगरानी के बाद छापेमारी की गई। जांच में भारत और विदेशों में मौजूद गिरोह के अन्य कथित प्रमुख सदस्यों की भी पहचान हुई है,जिसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।