Bihar News: बिहार में भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई को लेकर सरकार के पास तीन हथियार हैं. तीनों लगातार कार्रवाई में जुटी है. हालांकि कार्रवाई से खास सुधार नहीं दिख रहा. जांच एजेंसियां कार्रवाई तो करती हैं, लेकिन कुछ दिनों के बाद ही अधिकांश दागी फिर से मलाईदार पोस्ट लेकर सिस्टम को खुली चुनौती देते हुए दिखाई पड़ते हैं. सिस्टम में बैठे लोग भी दागियों के पक्ष में काम करते दिखते हैं. निगरानी ने हाल ही में वैसे अधिकारियों-कर्मियों की विभागवार सूची जारी की है, जिन पर भ्रष्टाचार के केस दर्ज हैं. मद्य निषेध विभाग के दागियों की लिस्ट देख कर चौंक जाएंगे, जिन पर करप्शन के केस दर्ज है, चार्जशीटेड हैं, वो मुख्यालय में महत्वपूर्ण पद लेकर बैठे हैं या बिठाए गए हैं.
दारू वाले डिपार्टमेंट के आरोपी अफसरों की केस कुंडली
निगरानी ब्यूरो ने दागी अफसरों की लिस्ट जारी किया है. धनकुबेर व रिश्तखोर अफसरों के केस स्टेटस के बारे में भी जानकारी सार्वजनिक की गई है. आज बात करेंगे दारू वाले डिपार्टमेंट के दागियों की . निगरानी ब्यूरो ने 2007 से लेकर 2016 तक एक्साइज विभाग के अफसरों की जानकारी, जिनके खिलाफ डीए या ट्रैप केस दर्ज किया गया है, इस बारे में बताया है. हालांकि विजिलेंस ब्यूरो ने 2016 के बाद इस विभाग के भ्रष्ट अफसरों पर कोई केस दर्ज नहीं किया है. जो भी डीए केस दर्ज हुए हैं वो विशेष निगरानी इकाई या आर्थिक अपराध इकाई ने किया है.
2007 में एक्साइज के चार अफसरों पर डीए-ट्रैप केस
वर्ष 2007 में उत्पाद विभाग के चार अफसरों पर केस दर्ज हुए. जिसमें एक आय से अधिक संपत्ति का तो तीन ट्रैप केस . यानि रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तारी का. सिवान के तत्कालीन उत्पाद सब इंस्पेक्टर सीताराम महतो के खिलाफ 15 अक्टूबर 2007 को डीए केस सं- 117 दर्ज किया गया. इस मामले में निगरानी ने 25 अक्टूबर 2010 को कोर्ट चार्ज सीट सं-88 दर्ज किया. मधेपुरा के तत्कालीन इस्पेक्टर राधेकृष्ण सिंह के खिलाफ 8 जून 2007 को ट्रैप केस सं- 74 दर्ज किया. निगरानी ने 2 अगस्त 2007 को ही चार्ज सीट सं- 188 दाखिल किया. नालंदा के एक्साइज इंस्पेक्टर विजय कुमार चौरसिया के खिलाफ 2 नवंबर 2007 को ट्रैप केस सं- 122 दर्ज किया. विजिलेंस ने 21 दिसंबर 2007 को चार्जशीट सं- 277 दाखिल किया. कोर्ट ने इनके खिलाफ मई 2025 में फैसला सुनाया, जिसमें इनको 1 साल की सजा हुई।
सुरेन्द्र प्रसाद के खिलाफ दर्ज है ट्रैप केस..चार्जशीटेड हैं, फिर भी मौज से नौकरी
समस्तीपुर के तत्कालीन इंस्पेक्टर सुरेन्द्र प्रसाद रिश्वत लेते गिरफ्तार हुए थे. निगरानी ने इनके खिलाफ 20 अप्रैल 2007 को केस सं- 53 दर्ज किया था. विजिलेंस ने इस केस में 18 जून 2007 को ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दिया. जिसका नंबर है CS-95/07. केस की क्या स्थिति है कोई अता पता नहीं. विभाग ने भी कुछ नहीं किया.
तत्कालीन अधीक्षक संजय के खिलाफ 97 लाख की संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव कोर्ट में लंबित
तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक संजय कुमार के खिलाफ निगरानी ने 12 जून 2009 को ट्रैप केस सं- 69 दर्ज किया. इसके बाद संजय कुमार खिलाफ 19 अगस्त 2009 को डीए केस सं- 86 दर्ज हुआ. विजिलेंस ने दोनों केस में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल किया. पहले केस में CS-79/09 31.07.09 और दूसरे केस में CS-98/09 16.10.09 दाखिल की गई. पटना व अन्य जगह के अधीक्षक रहे संजय कुमार के खिलाफ डीए केस सं-86/2009 में Rs 97,75,655/ का जब्ती प्रस्ताव (Confiscation proposal) कोर्ट में निगरानी की तरफ से फाइल की गई है. डीए केस सं-86/2009 में दो निजी व्यक्ति के खिलाफ भी केस दर्ज है. संभवतः ये दोनों तत्कालीन अधीक्षक संजय कुमार के करीबी हैं. इन दोनों के खिलाफ भी कोर्ट में 2011 में ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है.
सहरसा एक्साइज ऑफिस के क्लर्क सजीत कुमार सिंह के खिलाफ 23 जुलाई 2010 को ट्रैस केस सं- 55 दर्ज हुआ. जिसका चार्जशीट सं- CS-76/10, 16-09-10 है. एक्साइज ऑफिस गया के क्लर्क महेन्द्र चौधरी के खिलाफ निगरानी ने 18 नवंबर 2011 को ट्रैप केस सं- 83 दर्ज किया. जिसका चार्जशीट नंबर है- CS-02/12, 04.01.12.
प्रभारी अधीक्षक की 1.62 करोड़ की संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव
औरंगाबाद के तत्कालीन प्रभारी अधीक्षक सरोज कुमार के खिलाफ 23 दिसंबर 2015 को डीए केस सं- 110 दर्ज किया गया, इस मामले में निगरानी ने स्पेशल विजिलेंस कोर्ट में चार्जशीट CS-53/23, 04-09-23 को दाखिल किया. 19 जुलाई 2024 को Rs 1,62,83,255/ जब्ती का प्रस्ताव निगरानी कोर्ट में फाइल की गई है.
निगरानी ब्यूरो ने लास्ट कार्रवाई 25 अक्टूबर 2016 को किया. जिसमें खगड़िया के एक्साइज सब इंस्पेक्टर के खिलाफ ट्रैप केस सं- 112 दर्ज किया. इस केस में चार्जशीट CS-105/16, 21-12-16 दाखिल की गई है.