Bihar Education: बिहार का शिक्षा विभाग इन दिनों पढ़ाई के लिए नहीं करप्शन को लेकर चर्चा में है. विभाग के अधिकारियों ने सरकारी खजाने में ही सेंध लगा दी है. लाखों-लाख रू की अवैध निकासी की गई है. इस घोटाले में कंप्यूटर ऑपरेटर से लेकर डीपीओ-डीईओ तक शामिल हैं. ताजा मामला मोतिहारी का है, जहां शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मियों ने मिलकर 60 लाख रू की अवैध निकासी कर ली. खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है. बड़ा सवाल यही है कि क्या इस घपले में अदना सा ऑपरेटर जिम्मेदार है या वेतन बनाने वाले सरकारी कर्मी (मेकर) और एप्रुवर के रूप में डीपीओ (स्थापना) ? क्या छोटे लोगों पर केस दर्ज करा जिला शिक्षा पदाधिकारी अपने अधीनस्थों को नहीं बचा रहे ?  


 जून 2024 से हो रही थी अवैध निकासी 

जिला शिक्षा पदाधिकारी की तरफ से बताया गया है कि एचआरएमएस प्रणाली से किए गए वेतन भुगतान की जांच की गई.जिसमें पाया गया कि इस कार्य के लिए प्रतिनियुक्त कर्मी इमादुद्दीन शाबिर उर्फ बेताब मदरसा शिक्षक ने स्वयं एवं पत्नी और कंपय्टर ऑपरेटर अमन कुमार द्वार स्वयं एवं मां के बैंक खाते में एचआरएम से छेड़छाड़ कर माह जून 2024 से सितंबर 2026 तक 60 लाख 57 हजार एक सौ अंठावन रू की अवैध निकासी की है. इस कृत्य के लिए इन दोनों के खिलाफ नगर थाने में केस दर्ज कराई गई है.

किस सरकारी कर्मी के आईडी से हुई निकासी? मेकर और अप्रुवर खेल में शामिल 

जिला शिक्षा पदाधिकारी मोतिहारी ने दो छोटे कर्मियों पर केस दर्ज करा कर बचने की कोशिश की है. लेकिन सवाल है कि कंप्यूटर ऑपरेटर किसके आईडी के माध्यम से वेतन बना रहा था. प्रतिनियुक्त कर्मी इमादुद्दीन शाबिर उर्फ बेताब एवं पत्नी और कंप्यूटर ऑपरेटर अमन कुमार एवं मां का वेतन आईडी किसके आदेश से बना? उस समय (2024) में कौन कर्मी मेकर और कौन डीपीओ एप्रुवर थे ? तब से लेकर अब तक जितने मेकर-चेकर और अप्रुवर बने, वो पूर्णरूपेण शक के दायरे में हैं.


तत्कालीन डीपीओ साहेब आलम की भूमिका संदिग्ध 

मोतिहारी जिला शिक्षा पदाधिकारी कहते हैं कि इनलोगों ने फर्जीवाड़ा कर सरकारी राशि की निकासी की है. एचआरएमएस के तहत वेतन निकासी की जो व्यवस्था है,उसमें सरकारी कर्मी (लिपिक) मेकर की भूमिका में होता है. निकासी की अनुमति एप्रुवर देते हैं. यानि डीपीओ (स्थापना) एप्रुवर की भूमिका में होते हैं. जून 2024 से अवैध तरीके से वेतन निकासी का खेल शुरू हुआ है. उस समय डीपीओ स्थापना के पद पर साहेब आलम काबिज थे. बताया जाता है कि साहेब आलम की आरोपी मदरसा शिक्षक जिस पर अवैध निकासी के आरोप हैं, उससे गहरा संबंध था. उके कार्यकाल में ही इमादुद्दीन शाबिर की जिला शिक्षा कार्यालय मोतिहारी में प्रतिनियुक्ति हुई थी. बता दें, वर्तमान में जिला शिक्षा कार्यालय के लिपिक मिथिलेश मेकर की भूमिका में कार्य कर रहे हैं, वहीं एप्रुवर हैं वर्तमान डीपीओ (स्थापना). 

बता दें, मोतिहारी के तत्कालीन डीपीओ (स्थापना) साहेब वर्तमान में जिला शिक्षा पदाधिकारी अररिया के पद पर पदस्थापित हैं. अब देखना होगा ,जांच की आंच कहां तक पहुंचती है. जिम्मदार अफसरों पर कब कार्रवाई हो पाती है,या फिर फाइल को दबा दिया जाता है.