Bihar Education: शिक्षा विभाग के मोतिहारी कार्यालय में बड़ा घोटाला सामने आया है. जिला शिक्षा पदाधिकारी पूर्वी चंपारण ने जब जांच कराई को 60 लाख रू का वेतन घोटाला सामने आया.  खुलासे के बाद डीईओ ने मदरसा शिक्षक और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ नगर थाने में केस दर्ज कराया है. वहीं, जिला शिक्षा पदाधिकारी की सिफारिश पर तीन लिपिकों को भी सस्पेंड कर दिया गया है. क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक ने निलंबित किए गए तीनों लिपिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दिया है. संभावना है कि इन सभी पर भी केस किया जाय. 


निलंबित तीनों लिपिकों के खिलाफ अब कानूनी कार्रवाई होगी

क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक तिरहुत ने 31 अक्टूबर को पत्र जारी किया है. जिसमें उल्लेख किया गया है कि, मोतिहारी के जिला शिक्षा पदाधिकारी ने 30 अक्टूबर को पत्र भेजा. जिसमें उल्लेख किया गया है कि एचआरएमएस पोर्टल पर वेतन भुगतान प्रणाली से अवैध तरीके से 5 बैंक खाते जोड़कर 60 लाख 57 हजार रू की अवैध निकासी की गई। मेकर-चेकर के आईडी का दुरूपयोग किया गया. इस आलोक में डीईओ कार्यालय मोतिहारी के लिपिक विनय प्रसाद, राजीव रंजन कुमार और मिथिलेश कुमार के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई करने की सिफारिश की गई.  जिला शिक्षा पदाधिकारी की रिपोर्ट के बाद आरडीडीई मुजफ्फरपुर ने तीनों लिपिक को सस्पेंड कर दिया है. क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक तिरहुत ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी पूर्वी चंपारण संबंधिक लिपिकों के खिलाफ विधि सम्मत कानूनी कार्रवाई करेंगे. इसे सुनिश्चित करने को कहा गया है. 

 जून 2024 से हो रही थी अवैध निकासी 

जिला शिक्षा पदाधिकारी की तरफ से बताया गया है कि एचआरएमएस प्रणाली से किए गए वेतन भुगतान की जांच की गई.जिसमें पाया गया कि इस कार्य के लिए प्रतिनियुक्त कर्मी इमादुद्दीन शाबिर उर्फ बेताब मदरसा शिक्षक ने स्वयं एवं पत्नी और कंपय्टर ऑपरेटर अमन कुमार द्वार स्वयं एवं मां के बैंक खाते में एचआरएम से छेड़छाड़ कर माह जून 2024 से सितंबर 2026 तक 60 लाख 57 हजार एक सौ अंठावन रू की अवैध निकासी की है. इस कृत्य के लिए इन दोनों के खिलाफ नगर थाने में केस दर्ज कराई गई है.

मेकर-टेकर सस्पेंड पर एप्रुवर पर कब होगी कार्रवाई  

जिला शिक्षा पदाधिकारी मोतिहारी ने ही इस बड़े घोटाले का खुलासा किया है. डीईओ ने आरोपियों के खिलाफ थाने में केस दर्ज कराया. साथ ही मेकर-चेकर की भूमिका में रहे तीन लिपिकों के खिलाफ आरडीडीई को रिपोर्ट किया. इसके बाद तीनों को सस्पेंड कर दिया गया है. हालांकि मेकर-चेकर तो सस्पेंड हो गए पर एप्रुवर पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है. अप्रुवर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) होते हैं. प्रतिनियुक्त कर्मी इमादुद्दीन शाबिर उर्फ बेताब एवं पत्नी और कंप्यूटर ऑपरेटर अमन कुमार एवं मां का वेतन आईडी किसके आदेश से बना? उस समय (2024) में कौन डीपीओ एप्रुवर थे ? वो पूर्णरूपेण शक के दायरे में हैं.


तत्कालीन डीपीओ साहेब आलम की भूमिका संदिग्ध 

बता दें, वेतन निकासी की अनुमति एप्रुवर देते हैं. यानि डीपीओ (स्थापना) एप्रुवर की भूमिका में होते हैं. जून 2024 से अवैध तरीके से वेतन निकासी का खेल शुरू हुआ है. उस समय डीपीओ (स्थापना) के पद पर साहेब आलम काबिज थे. बताया जाता है कि साहेब आलम की आरोपी मदरसा शिक्षक जिस पर अवैध निकासी के आरोप हैं, उससे गहरा संबंध था. उनके कार्यकाल में ही इमादुद्दीन शाबिर की जिला शिक्षा कार्यालय मोतिहारी में प्रतिनियुक्ति हुई थी. 

बता दें, मोतिहारी के तत्कालीन डीपीओ (स्थापना) साहेब वर्तमान में जिला शिक्षा पदाधिकारी अररिया के पद पर पदस्थापित हैं. अब देखना होगा ,जांच की आंच कहां तक पहुंचती है. जिम्मेदार एप्रुवर (डीपीओ स्थापना) पर कब कार्रवाई होती है?