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Bihar News: 35 साल पुराने मामले में बिहार के भ्रष्ट जूनियर इंजीनियर को मिली सजा, 300 रूपये रिश्वत लेते निगरानी ने किया था अरेस्ट

बिहार के नवादा जिले में विद्युत विभाग के जूनियर इंजीनियर सुदामा राय को महज 300 रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े जाने के 35 साल पुराने मामले में दोषी करार देते हुए स्पेशल निगरानी कोर्ट, पटना ने सजा सुनाई।

Bihar News

25-Feb-2026 03:15 PM

By FIRST BIHAR

Bihar News: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी की कार्रवाई लगातार जारी है। 35 साल पहले महज तीन सौ रूपये रिश्वत लेते निगरानी के हत्थे चढ़े विद्युत विभाग के भ्रष्ट जूनियर इंजीनियर को दोषी करार देते गुए पटना की स्पेशल निगरानी कोर्ट ने सजा सुनाया है। इसके साथ ही साथ कोर्ट ने दोषी के ऊपर आर्थिक जुर्माना भी लगाया है।


दरअसल, नवादा जिले के गुनावा गांव निवासी विजय मिस्त्री ने विद्युत अवर प्रमंडल, नवादा में कनीय विद्युत अभियंता के पद पर तैनात सुदामा राय के खिलाफ निगरानी में मामला दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि जूनियर इंजीनियर सुदामा राय ने लेथ मशीन के लिए बिजली कनेक्शन देने के एवज में पांच सौ रुपए रिश्वत की डिमांड की थी।


तीन सौ रुपए पर डील फाइनल हो गई। तब इसको लेकर पीड़ित ने निगरानी से गुहार लगाई और भ्रष्ट जूनियर इंजीनियर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत दर्ज होने के बाद जांच में आरोप को सही पाया गया। 14 अगस्त 1991 को निगरानी की टीम नवादा पहुंची और जैसे ही आरोपी जूनियर इंजीनियर रिश्वत के तीन सौ रुपए ले रहा था उसे रंगेहाथ धर दबोचा।


इस मामले में तत्कालीन अनुसंधानकर्त्ता पुलिस उपाधीक्षक, विद्युत कोषांग, बिहार, पटना अमरनाथ खन्ना द्वारा सटीक और समय पर आरोप-पत्र दायर किया गया। बिहार सरकार की ओर से कृष्ण मुरारी प्रसाद, विशेष लोक अभियोजक निगरानी, पटना ने प्रभावी तरीके से पैरवी की और आरोपी को दोष सिद्ध कराने में सफलता हासिल की। 


आरोपी जूनियर इंजीनियर सुदामा राय को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 में एक वर्ष सश्रम कारावास एवं 10,000/-(दस हजार) रूपये का अर्थदण्ड लगाया गया है। धारा-13(2) सह पठित धारा-13(1)(डी) में एक वर्ष सश्रम कारावास एवं 10,000/-(दस हजार) रूपये का अर्थदण्ड लगाया गया है। अर्थदण्ड की राशि जमा नहीं करने पर एक महीने का साधारण कारावास होगा। दोनों सजा साथ-साथ चलेगी।  


बता दें कि अब तक वर्ष 2026 में कुल 04 भ्रष्टाचार के मामले में न्यायालय द्वारा सजा सुनायी गई है। ये दोषसिद्ध की कार्रवाई मो0 रूस्तम, माननीय न्यायाधीश, निगरानी के न्यायालय पटना द्वारा की गई है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा अभियोजन की कार्यवाही लगातार जारी है।