Bihar EOU Raid: भवन निर्माण विभाग में काली कमाई के कितने धनकुबेर हैं ? यहां के इंजीनियर पत्नी के नाम पर अर्जित संपत्ति को छुपा कर बैठे हैं. ऐसा कृत्य कर खुल्लमखुल्ला सरकार को चैलेंज दे रहे हैं. सरकार का स्पष्ट मानना है, अगर आपने संपत्ति की जानकारी साझा नहीं की, वो अवैध संपत्ति मानी जाएगी. इसके लिए विभागीय और कानूनी कार्रवाई करने का आदेश है. इस संबंध में मुख्य सचिव के स्तर से 2021 में ही स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्गत है.
बिहार के तत्कालीन मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण ने इस संंबंध में सभी सचिव, कमिश्नर,डीएम-एसपी को पत्र लिखा था. बिहार के मुख्य सचिव का पत्रांक- 3/एम0-8/2021 सा.प्र.6268, दिनांक- 26.06.2021 स्पष्ट करता है कि कोई भी सरकारी सेवक सरकार की पूर्व जानकारी के बिना, किसी अचल संपत्ति का अर्जन करता है तो वह गैरकानूनी है. इस आरोप में उक्त सरकारी सेवक के खिलाफ विभागीय और प्रिवेंसन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत आपराधिक केस भी दायर किया जा सकेगा.
मुख्य सचिव के पत्र में क्या है...
मुख्य सचिव के पत्र में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी सरकारी सेवक अपने नाम से या अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम से पट्टे,बंधक खरीद,बिक्री या प्रीतिदान के द्वारा या अन्यथा न करेगा. प्रत्येक सरकारी सेवक वैसी संपत्ति जिसका मूल्य सरकारी सेवक के दो माहों के मूल वेतन जोड़ ग्रेड वेतन से अधिक हो, ऐसे संव्यवहार के पूर्ण होने के एक माह के अंदर सरकार को जानकारी देगा.किसी नियमित या ख्याति प्राप्त व्यापारी के जरिए यह संव्यवहार न करके दूसरी तरह किया जाय, तो इसके लिए सरकारी सेवक को विहित प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी लेनी होगी. सरकारी सेवकों को इस प्रावधान का दृढ़ता से अनुपालन करना है. यदि किसी सरकारी सेवक द्वारा अपनी संपत्ति से संबंधित प्रावधानित ब्योरा विहित प्राधिकार को उपलब्ध नहीं कराता है, तो इसे कदाचार मानते हुए उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ प्रिवेंसन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत आपराधिक केस भी दायर किया जा सकेगा.
खेल देखिए...भवन निर्माण के अधीक्षण अभियंता पत्नी के नाम वाली संपत्ति छुपाकर बैठे हैं
भवन निर्माण विभाग में एक से बढ़कर एक इंजीनियर हैं. एक-एक दिन में पत्नी के नाम पर करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर सरकार की नजरों से छुपा कर बैठे हैं. जबकि ऐसा करने पर प्रिवेंसन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत आपराधिक केस भी दायर किया जा सकता है. भवन निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता वर्तमान में उत्तर बिहार में पदस्थापित हैं. इसके पहले सीमांचल इलाके में बतौर कार्यपालक अभियंता के पद पर पदस्थापित थे. इसके पूर्व राजधानी पटना में मालदार प्रमंडल में पदस्थापित रहे. राजधानी में पदस्थापन के दौरान इन पर गंभीर कदाचार के आरोप लगे थे. अब ये गांधी की ऐतिहासिक धऱती से जुड़े अंचल में पदस्थापित बताये जाते हैं.
इस अधीक्षण अभियंता ने भी नौबतपुर में करोड़ों की संपत्ति बनाई
निगरानी ब्यूरो ने 16 सितंबर को भवन निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता सत्येन्द्र चौधरी के ठिकानों पर छापेमारी की थी. जिसमें नौबतपुर इलाके में बड़ी प्रॉपर्टी का पता चला था. वैसे सिर्फ सत्येन्द्र चौधरी ही नहीं बल्कि कई ऐसे इंजीनियर हैं जो पटना और आसपास में अकूत संपत्ति अर्जित कर बैठे हैं. भवन निर्माण विभाग के दूसरे कार्यपालक अभियंता जो गांधी की ऐतिहासिक जिला वाले अंचल में पदस्थापित हैं, उन्होंने भी नौबतपुर इलाके में मेन रोड़ के किनारे करोड़ों की जमीन पत्नी (#### कुमारी) के नाम पर खरीद की है. इस अधीक्षण अभियंता की पूरी कुंडली भी बाहर आ गई है. बताया जाता है कि अधीक्षण अभियंता (नाम गोपनीय) के अपने लोगों ने ही पटना से लेकर दिल्ली और झारखंड में अर्जित की गई पूरी संपत्ति की जानकारी एजेंसी के पास पहुंचा दिया है.
इस S.E. ने पत्नी के नाम पर बिहटा-सरमेरा रोड पर बेशकीमती जमीन खरीदी
आपको बताते हैं कि, इस अधीक्षण अभियंता (नाम गोपनीय) ने जून 2023 में पत्नी #### कुमारी के नाम पर नौबतपुर अंचल में बिहटा-सरमेरा मेन रोड़ पर व्य़वसायिक जमीन की खरीद की है. यह जमीन चार विभिन्न प्लॉट में खरीद की गई है. कुल रकबा लगभग 25 डिसमिल, यानि आठ कट्ठा भूमि खरीद की गई. सरकार के यहां इस कॉमर्शियल जमीन का वैल्यू लगभग 1 करोड़ 10 लाख बताया गया है. वैसे खरीद के समय भी वास्तविक बाजार मूल्य 2 करोड़ से अधिक बताई गई है. इनकी पत्नी हाउस वाइफ बताई जाती हैं.
पत्नी के नाम पर अर्जित संपत्ति की जानकारी नहीं दे रहे अधीक्षण अभियंता
वर्ष 2022-23 में भवन प्रमंडल के इस अभियंता ने पत्नी #### कुमारी के नाम पर हटिया से लेकर हदसपुरा,दानापुर वाली संपत्ति का उल्लेख किया था. पत्नी के नाम का पैन नंबर भी सार्वजनिक किया था. 2023-24 के बाद इन्होंने अपनी पत्नी के बारे में संपत्ति का ब्योरा बताना बंद कर दिया. सरकार को बताया है कि पत्नी #### कुमारी स्वयं आईटी रिटर्न फाईल करती है.इसी आधार पर पत्नी के नाम पर अर्जित किसी संपत्ति का उल्लेख नहीं कर रहे. सिर्फ लोन जो पति-पत्नी के नाम पर है, उसी का उल्लेख संपत्ति के ब्योरा में किया है.
वैसे सरकार का स्पष्ट मानना है कि स्वयं या पत्नी के नाम पर अर्जित संपत्ति की जानकारी छुपाना अपराध है. वैसे सरकारी सेवकों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ प्रिवेंसन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत आपराधिक केस भी हो सकता है. अब देखना होगा, इस मामले में कब जांच शुरू होती है.