Bihar Crime News: बिहार के भोजपुर जिले के बिछिआंव गांव में मादा कुत्ते के साथ कथित यौन शोषण का मामला सामने आया है। मामले में पुलिस ने शिकायत और उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों के आधार पर एक आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पशु अधिकार संगठन पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) इंडिया के हस्तक्षेप और स्थानीय देखभालकर्ता की शिकायत के बाद यह कार्रवाई की गई।
संदेश थाना पुलिस के अनुसार, स्थानीय देखभालकर्ता मुकेश कुमार की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 62 और 325 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)(a) और 11(1)(i) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस मामले से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रही है।
घटना के बाद सरकारी पशु चिकित्सक ने मादा कुत्ते की चिकित्सकीय जांच की है। फिलहाल कुत्ता स्थानीय देखभालकर्ता की निगरानी में है। संदेश थाना प्रभारी संजीव कुमार ने सोमवार को बताया कि मामले की जांच जारी है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पेटा इंडिया की क्रूरता प्रतिक्रिया टीम की एसोसिएट मैनेजर सलोनी सकरिया ने प्राथमिकी दर्ज करने के लिए संदेश थाना प्रभारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि पशुओं के खिलाफ क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए और उन्हें कानून के तहत अधिकतम सुरक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कई अध्ययनों में पशुओं के प्रति क्रूरता और इंसानों के खिलाफ हिंसा के बीच संबंध सामने आया है। उनके मुताबिक, पशुओं की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानूनी कार्रवाई जरूरी है।
पेटा इंडिया ने केंद्र सरकार से भारतीय न्याय संहिता में संशोधन कर पशुओं के साथ यौन शोषण को स्पष्ट रूप से दंडनीय अपराध बनाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 के तहत पशुओं के साथ यौन हिंसा दंडनीय थी, लेकिन भारतीय न्याय संहिता में इस संबंध में स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
संगठन ने विभिन्न अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा कि पशुओं के खिलाफ यौन हिंसा के कई मामले दर्ज नहीं हो पाते हैं। पेटा इंडिया के अनुसार, पशुओं के साथ क्रूरता करने वाले लोगों में अन्य हिंसक अपराधों में शामिल होने की आशंका भी अधिक हो सकती है।
पेटा इंडिया ने पशुओं के खिलाफ क्रूरता और यौन हिंसा रोकने के लिए कड़े कानूनी प्रावधानों के साथ प्रभावी पुलिस कार्रवाई की जरूरत बताई। संगठन का कहना है कि पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने से समाज में हिंसा के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने और कानून के प्रति सम्मान मजबूत करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल भोजपुर पुलिस मामले की जांच कर रही है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।