BEGUSARAI: बेगूसराय जिले में एक युवती के कथित अपहरण का मामला अब पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय तक पहुंच गया है। पुलिस कार्रवाई में देरी का आरोप लगाते हुए सोमवार को पीड़िता का परिवार एसपी कार्यालय पहुंचा और मुख्य गेट के बाहर सड़क पर बोरा बिछाकर धरने पर बैठ गया।
परिजनों ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया गया तथा घर में रखा करीब चार भर सोना और ₹55 हजार नकद भी साथ ले जाया गया। परिवार ने नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी, युवती की सकुशल बरामदगी और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पीड़िता के पिता रामचंद्र पंडित ने एसपी को दिए आवेदन में बताया कि उनकी पुत्री 15 मई से लापता है। आवेदन के अनुसार, गांव के नक्षत्र पासवान पर युवती को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने का आरोप लगाया गया है। उनका कहना है कि युवती घर से करीब चार भर सोना और ₹55 हजार नकद भी लेकर चली गई।
आवेदन में नक्षत्र पासवान, अंकित कुमार एवं मिथलेश देवी को नामजद करते हुए आरोप लगाया गया है कि तीनों ने सुनियोजित तरीके से युवती को गायब किया है। साथ ही परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है।
पीड़िता के पिता ने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि उन्होंने इस मामले की लिखित शिकायत पहले ही चेरिया बरियारपुर थाना में दी थी, जिसकी प्रति भी एसपी को सौंपे गए आवेदन के साथ संलग्न की गई है। उनका आरोप है कि पूर्व शिकायत के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिसके कारण उन्हें धरना देने को मजबूर होना पड़ा।
आवेदन में यह भी दावा किया गया है कि आरोपित परिवार के कथित रूप से माओवादी संगठन से जुड़े होने की आशंका है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही पुलिस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है। इस संबंध में जांच जारी है।
परिजनों का कहना है कि आरोपितों के कारण गांव में भय का माहौल है और लोग डर के कारण खुलकर सामने नहीं आ पा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर नामजद आरोपियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करने तथा युवती की शीघ्र बरामदगी सुनिश्चित करने की मांग की है।
धरना पर बैठे परिजनों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी बेटी की बरामदगी और आरोपितों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, पुलिस का कहना है कि आवेदन प्राप्त हो गया है। पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विधि-सम्मत कार्रवाई की जाएगी।हालांकि समाचार में लगाए गए आरोप पीड़ित परिवार के आवेदन और बयान पर आधारित हैं।