अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद में साइबर ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। पालड़ी स्थित एक निजी कंपनी के सीनियर अकाउंट मैनेजर से ठग ने उनके बॉस की फोटो और नाम वाली व्हाट्सएप प्रोफाइल बनाकर 30 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। आरोपी ने खुद को बॉस बताते हुए अकाउंट मैनेजर को बताया कि वह एक मीटिंग में व्यस्त है और फोन पर बात नहीं कर सकता।
गांधीनगर के कलोल निवासी 34 वर्षीय सीनियर अकाउंट मैनेजर के मुताबिक, 14 अगस्त की सुबह करीब 10:09 बजे उनके व्हाट्सएप पर एक अज्ञात नंबर से मैसेज आया। इस नंबर की डीपी और नाम उनके बॉस के नाम से मिलते-जुलते थे। मैसेज में पूछा गया, “क्या तुम ऑफिस में हो?” अकाउंट मैनेजर ने हां में जवाब दिया।
इसके बाद आरोपी ने मैसेज किया कि वह एक मीटिंग में है और फोन पर बात नहीं कर सकता, इसलिए केवल मैसेज के जरिए बातचीत करने को कहा। कुछ देर बाद आरोपी ने बताया कि वह एक क्लाइंट के साथ जरूरी प्रोजेक्ट पर चर्चा कर रहा है और एक जगह पेमेंट करना है। उसने अकाउंट मैनेजर से कंपनी के खाते से ट्रांसफर की जा सकने वाली रकम की लिमिट पूछी।
अकाउंट मैनेजर ने जवाब दिया कि 30 लाख रुपये का चेक पहले से जारी होने के कारण फिलहाल 30 लाख रुपये ट्रांसफर किए जा सकते हैं। इसके बाद आरोपी ने ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित एक बैंक खाते की डिटेल भेजी और उसमें 30 लाख रुपये जमा करने को कहा। बॉस का नंबर और प्रोफाइल समझकर अकाउंट मैनेजर ने बताए गए खाते में 30 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
ऐसे खुला 30 लाख की ठगी का राज
30 लाख रुपये ट्रांसफर कराने के बाद आरोपी ने फिर से मैसेज कर 20 लाख रुपये और भेजने को कहा। इस बार अकाउंट मैनेजर को अतिरिक्त रकम ट्रांसफर करने के लिए अनुमति की जरूरत थी। वह 20 लाख रुपये का चेक लेकर अपने बॉस के पास सिग्नेचर कराने पहुंचा।
बॉस के सामने पहुंचते ही पूरा मामला खुल गया। बॉस ने बताया कि उन्होंने न तो 20 लाख रुपये ट्रांसफर करने को कहा था और न ही 30 लाख रुपये का कोई भुगतान करने का निर्देश दिया था। इसके बाद अकाउंट मैनेजर को एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुका है। मामले की शिकायत अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच में दर्ज कराई गई है। पुलिस के पास उस व्हाट्सएप नंबर की जानकारी भी है, जिससे आरोपी ने बॉस की फोटो और नाम का इस्तेमाल कर अकाउंट मैनेजर को झांसे में लिया था।
पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 319(2), 54 और आईटी एक्ट की धारा 43(a), 43(b), 66, 66(c), 66(d) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब व्हाट्सएप नंबर और बैंक खाते की डिटेल के आधार पर आरोपी की तलाश कर रही है। साथ ही ठगी की गई रकम को रिकवर करने की भी कोशिश की जा रही है।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि साइबर ठग सोशल मीडिया प्रोफाइल फोटो और नाम का इस्तेमाल कर कर्मचारियों और कंपनियों को आसानी से निशाना बना रहे हैं। ऐसे में किसी भी बड़े वित्तीय लेनदेन से पहले संबंधित अधिकारी से फोन पर सीधे पुष्टि करना बेहद जरूरी है।