UPSC Success Story Sakshi Jain: किसी ने खूब कहा है कि “कोशिश कर, रास्ता निकलेगा; आज नहीं तो कल निकलेगा…” यह कहावत राजस्थान के टोंक की रहने वाली साक्षी जैन की कहानी पर बिल्कुल सटीक बैठती है। एक साधारण परिवार से निकलकर देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC Civil Services Examination में 37वीं रैंक हासिल करने तक का उनका सफर आसान नहीं रहा। यह कहानी है संघर्ष, धैर्य और लगातार खुद को बेहतर बनाने की।


टोंक जैसे छोटे शहर में पली-बढ़ीं साक्षी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई यहीं पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने जयपुर का रुख किया, जहां उनके सपनों को नई दिशा मिली। पढ़ाई में हमेशा आगे रहने वाली साक्षी ने चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) जैसे कठिन कोर्स को साल 2018 में महज चार साल में और एक ही प्रयास में पास कर लिया। यह उपलब्धि उनके अनुशासन और मेहनत का प्रमाण थी।


जब सुरक्षित करियर छोड़ चुना संघर्ष का रास्ता

सीए बनने के बाद साक्षी ने Barclays जैसी नामी कंपनी में फाइनेंशियल एनालिस्ट के रूप में काम शुरू किया। करियर स्थिर था, सैलरी अच्छी थी, लेकिन उनके भीतर एक खालीपन था। उन्हें महसूस हुआ कि वह कुछ ऐसा करना चाहती हैं, जिससे समाज पर सीधा असर पड़े।


यहीं से उन्होंने बड़ा फैसला लिया, कॉरपोरेट दुनिया छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी करने का। यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य को साफ रखा।


कोरोना के दौर में शुरू हुई तैयारी

जनवरी 2020… जब देश कोरोना महामारी से जूझ रहा था, उसी समय साक्षी ने अपनी तैयारी की शुरुआत की। कोचिंग बंद थीं, माहौल अनिश्चित था, लेकिन उन्होंने ऑनलाइन माध्यम को अपना सहारा बनाया।

अपने ऑप्शनल विषय ‘कॉमर्स एंड अकाउंटेंसी’ के लिए उन्होंने एक विशेष कोर्स किया, जिसने उनकी तैयारी की नींव मजबूत की। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी रणनीति तैयार की और पढ़ाई को व्यवस्थित किया।


बार-बार असफलता, फिर भी नहीं टूटी हिम्मत

साल 2021 में उन्होंने पहली बार परीक्षा दी, लेकिन प्रीलिम्स भी पास नहीं कर सकीं। यह झटका बड़ा था, लेकिन उन्होंने इसे हार नहीं बनने दिया।

इसके बाद 2022 से 2025 तक उन्होंने लगातार चार बार प्रीलिम्स और मेंस परीक्षा पास की और हर बार इंटरव्यू तक पहुंचीं। लेकिन हर बार अंतिम सूची से नाम बाहर रह गया।

सोचिए, जब मंजिल बस एक कदम दूर हो और हर बार हाथ से फिसल जाए—ऐसी स्थिति में टूट जाना आसान होता है। लेकिन साक्षी ने हार मानने की बजाय खुद को और मजबूत किया।


कमजोरी को ताकत में बदला

साक्षी ने अपनी तैयारी का गहराई से विश्लेषण किया। उन्होंने देखा कि जनरल स्टडीज में उनके अंक स्थिर थे, लेकिन निबंध और ऑप्शनल विषय में उतार-चढ़ाव आ रहा था। उन्होंने इन्हीं कमजोरियों पर काम किया। निबंध लेखन में सुधार किया, ऑप्शनल विषय को और मजबूत किया। इसका नतीजा यह हुआ कि उनका मेंस स्कोर बढ़कर 816 तक पहुंच गया, जो उनके लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।


इंटरव्यू में दिखा असली आत्मविश्वास

UPSC का इंटरव्यू सिर्फ ज्ञान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व की परीक्षा होती है। साक्षी ने इस बार इंटरव्यू को अलग नजरिए से लिया। उन्होंने खुद को मानसिक रूप से तैयार किया और पूरे आत्मविश्वास के साथ बोर्ड के सामने गईं। खास बात यह रही कि वह उस दिन की आखिरी कैंडिडेट थीं, लेकिन थकान या दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।


इस बार उन्हें इंटरव्यू में 201 अंक मिले और यही उनके चयन की सबसे बड़ी वजह बनी।


किताबों से बाहर की भी थी लड़ाई

यह सफर सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं था। लंबे समय तक तैयारी करने से उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ा। उन्होंने योग और नियमित वॉक के जरिए खुद को संतुलित रखा। इसके अलावा समाज का दबाव, बार-बार की असफलता और खुद पर संदेह जैसी मानसिक चुनौतियां भी सामने आईं। लेकिन हर बार उनके परिवार ने उनका साथ दिया और उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।


आखिरकार 2025 में, पांचवें प्रयास में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने 37वीं रैंक हासिल कर अपने सपने को सच कर दिखाया।