Success Story: UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी का फैसला आसान नहीं होता। खासकर तब, जब यह पता न हो कि सफलता हासिल करने में कितना समय लगेगा। महाराष्ट्र की तेजस्वी सातपुते ने भी UPSC को करियर का रास्ता चुनने पर लोगों के ताने और मजाक का सामना किया। लेकिन उन्होंने इन बातों का जवाब अपनी मेहनत और सफलता से दिया। पहले प्रयास में असफल होने के बाद उन्होंने अपनी तैयारी को और मजबूत किया और दूसरे प्रयास में UPSC में 198वीं रैंक हासिल कर IPS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।
तेजस्वी सातपुते महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के सेवगांव की रहने वाली हैं। उनका परिवार साधारण पृष्ठभूमि से है। उनकी मां प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका रही हैं, जबकि पिता खेती से जुड़े रहे और बाद में कारोबार भी किया। एक वीडियो में तेजस्वी ने बताया है कि बचपन में उनका सपना पायलट बनने का था। हालांकि, कुछ परिस्थितियों के कारण वह इस दिशा में आगे नहीं बढ़ सकीं। इसके बाद उन्होंने पढ़ाई और करियर के लिए दूसरी राह चुनी।
स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद तेजस्वी ने शुरुआत में बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में करियर बनाने के बारे में सोचा। बाद में उन्होंने अपना फैसला बदला और कानून की पढ़ाई करने का निर्णय लिया। इसके बाद उन्होंने LLB में दाखिला लिया। LLB की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें UPSC सिविल सेवा परीक्षा के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने अपने दोस्तों से परीक्षा और उसकी तैयारी को लेकर बातचीत की। धीरे-धीरे UPSC में उनकी रुचि बढ़ती गई और उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू करने का फैसला किया।
तेजस्वी के लिए UPSC का सफर शुरुआत से आसान नहीं था। बायोटेक्नोलॉजी से LLB और फिर UPSC की तैयारी का फैसला लेने के कारण उन्हें लोगों की बातें सुननी पड़ीं। तेजस्वी के मुताबिक, UPSC की तैयारी के दौरान कई लोग उनका मजाक उड़ाते थे। उनसे पूछा जाता था कि वह आखिर एक क्षेत्र में टिक क्यों नहीं पा रही हैं। उनके करियर की दिशा बार-बार बदलने को लेकर सवाल भी उठाए जाते थे। हालांकि, तेजस्वी ने इन बातों को अपने लक्ष्य के बीच नहीं आने दिया। उन्होंने आलोचनाओं पर ध्यान देने के बजाय अपनी तैयारी पर फोकस बनाए रखा।
LLB की पढ़ाई के दौरान तेजस्वी ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा का पहला प्रयास किया, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। यह उनके लिए पहला बड़ा प्रतियोगी परीक्षा अनुभव भी था। पहले प्रयास में असफलता के बाद उनके परिवार और आसपास के लोगों की ओर से भी सवाल उठने लगे। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी को नए सिरे से शुरू करने का फैसला किया। असफलता के बाद तेजस्वी ने अपनी तैयारी के तरीके में बदलाव किया। उन्होंने पुणे छोड़कर मुंबई जाने का फैसला किया और वहां रहकर पूरी तरह UPSC की तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया।अगले एक साल तक उन्होंने लगातार मेहनत की और परीक्षा की तैयारी में खुद को पूरी तरह झोंक दिया। उनका लक्ष्य स्पष्ट था—अगले प्रयास में सफलता हासिल करना।
तेजस्वी की मेहनत रंग लाई। वर्ष 2012 में उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में 198वीं रैंक हासिल की और IPS अधिकारी बनने का अपना सपना पूरा किया। उन्होंने इतिहास और मराठी साहित्य को अपने वैकल्पिक विषय के तौर पर चुना था। UPSC में सफलता के बाद तेजस्वी महाराष्ट्र कैडर की 2012 बैच की IPS अधिकारी बनीं।
IPS बनने के बाद तेजस्वी सातपुते ने महाराष्ट्र पुलिस में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने पुलिस विभाग में विभिन्न पदों पर काम किया और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वर्तमान में वह पुणे में तैनात हैं। हाल ही में उन्हें पुणे क्राइम ब्रांच में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है।
तेजस्वी सातपुते की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो करियर को लेकर बदलाव और असफलता के दौर से गुजर रहे हैं। उनका सफर बताता है कि लोगों की बातों और शुरुआती असफलता से ज्यादा महत्वपूर्ण अपने लक्ष्य पर विश्वास बनाए रखना और उसके लिए लगातार मेहनत करना है।