NEET UG 2026: देशभर में आयोजित NEET UG परीक्षा इस बार सिर्फ मेडिकल प्रवेश परीक्षा ही नहीं रही, बल्कि हाईटेक निगरानी और सख्त व्यवस्था के कारण चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। 4 मई को हुई इस परीक्षा में करीब 97 प्रतिशत अभ्यर्थियों की उपस्थिति दर्ज की गई, जो अपने आप में एक बड़ा आंकड़ा है। लेकिन परीक्षा खत्म होते ही कई संदिग्ध गतिविधियों का खुलासा होने से हड़कंप मच गया है।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी National Testing Agency द्वारा आयोजित इस परीक्षा में पहली बार बड़े स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सीसीटीवी आधारित निगरानी का इस्तेमाल किया गया। इसी तकनीक के जरिए 150 से अधिक ऐसे अभ्यर्थियों की पहचान की गई है, जिनकी गतिविधियां सामान्य परीक्षा मानकों से अलग पाई गईं। अब इन सभी संदिग्ध अभ्यर्थियों से जल्द ही पूछताछ की जाएगी।
AI और फेस रिकॉग्निशन से खुली गड़बड़ियों की परत
इस बार परीक्षा में AI आधारित फेस रिकॉग्निशन और बिहेवियर एनालिसिस सिस्टम का उपयोग किया गया था। इन तकनीकों की मदद से अभ्यर्थियों की हर गतिविधि पर नजर रखी गई। जिन छात्रों का व्यवहार असामान्य पाया गया—जैसे बार-बार इधर-उधर देखना, इशारों में बातचीत करना या दूसरों से संपर्क करने की कोशिश करना, उन्हें तुरंत चिन्हित कर लिया गया।
कुछ मामलों में पहचान पत्र और परीक्षा दे रहे अभ्यर्थी के चेहरे में भी अंतर पाया गया, जिससे दूसरे की जगह परीक्षा देने की आशंका जताई जा रही है। यह मामला परीक्षा की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है, जिसे एजेंसी ने गंभीरता से लिया है।
परीक्षा केंद्रों पर क्या-क्या मिला
जांच के दौरान कुछ परीक्षा केंद्रों से चौंकाने वाली चीजें सामने आई हैं।
- कुछ अभ्यर्थियों के पास मोबाइल फोन पाए गए
- एडमिट कार्ड में छेड़छाड़ के संकेत मिले
- डमी कैंडिडेट यानी दूसरे की जगह परीक्षा देने के मामले सामने आए
खासकर अजमेर और रायपुर के कुछ परीक्षा केंद्रों पर गड़बड़ी की आशंका ज्यादा जताई गई है। यहां परीक्षा केंद्र बदलने और फर्जीवाड़े के संकेत मिलने के बाद जांच और तेज कर दी गई है।
टेलीग्राम चैनलों पर भी थी नजर
परीक्षा से पहले ही National Testing Agency ने सख्ती दिखाते हुए 75 से अधिक टेलीग्राम चैनलों पर निगरानी शुरू कर दी थी। इन चैनलों के जरिए पेपर लीक या गलत जानकारी फैलाने की कोशिशों को रोकने का प्रयास किया गया। इसके साथ ही परीक्षा के दौरान तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके।
अधिकारियों ने क्या कहा
अधिकारियों के मुताबिक, AI सिस्टम ने उन अभ्यर्थियों को चिन्हित किया है जिनकी गतिविधियां सामान्य से अलग थीं। अब इन सभी संदिग्ध उम्मीदवारों से विस्तार से पूछताछ की जाएगी। यदि जांच में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या धोखाधड़ी की पुष्टि होती है, तो संबंधित अभ्यर्थियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई में परीक्षा से निष्कासन, भविष्य की परीक्षाओं पर प्रतिबंध और कानूनी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। एजेंसी ने साफ कर दिया है कि परीक्षा की पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि अब प्रतियोगी परीक्षाओं में तकनीक की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। AI और डिजिटल निगरानी के कारण नकल या फर्जीवाड़ा करना पहले की तुलना में काफी मुश्किल हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सभी बड़ी परीक्षाओं में इसी तरह की हाईटेक निगरानी व्यवस्था लागू की जा सकती है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।