NEET Paper Leak: बिहार में NEET परीक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। पेपर लीक और सॉल्वर गैंग की चर्चाओं के बीच अब मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। नवादा जिले के वारिसलीगंज से सामने आए इस मामले ने शिक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि इस पूरे मामले में IGIMS से जुड़े कुछ कर्मचारियों की भूमिका होने का भी शक जताया जा रहा है, जिसके बाद जांच की मांग तेज हो गई है।


मिली जानकारी के अनुसार शहर के स्टेशन रोड निवासी अधिवक्ता सुमंत कुमार गुप्ता ने वारिसलीगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। शिकायत में बताया गया है कि उनके मुवक्किल और एसएन सिन्हा कॉलेज के फिलॉसफी विभाग के एचओडी नरेंद्र कुमार के बेटे को NEET UG 2024 में पास कराने और मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी की गई।


आरोप है कि बेगूसराय जिले के पन्हास गांव निवासी सत्यजीत सिंह ने मेडिकल कॉलेज में नामांकन कराने का भरोसा देकर पैसे लिए। पीड़ित परिवार के अनुसार 3 अक्टूबर 2024 से लेकर 16 मई 2025 के बीच अलग-अलग किस्तों में करीब 11 लाख 13 हजार 253 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए। इसके अलावा कई बार नकद रुपये भी दिए गए थे।


पीड़ित परिवार का कहना है कि आरोपी लगातार भरोसा दिलाता रहा कि उसका मेडिकल कॉलेज और परीक्षा से जुड़े लोगों से संपर्क है, जिसके जरिए एडमिशन आसानी से हो जाएगा। परिवार को लंबे समय तक भरोसे में रखा गया, लेकिन जब न रिजल्ट आया और न एडमिशन हुआ, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ।


इस मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ, जब पीड़ित पक्ष ने IGIMS के कुछ कर्मचारियों की भूमिका पर भी शक जताया। शिकायत में कहा गया है कि पूरे मामले में मेडिकल कॉलेज से जुड़े कुछ लोग भी शामिल हो सकते हैं, इसलिए इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। हालांकि अभी तक पुलिस की ओर से किसी कर्मचारी की संलिप्तता की पुष्टि नहीं की गई है।


वारिसलीगंज थानाध्यक्ष पंकज कुमार सैनी ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। पुलिस ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, मोबाइल कॉल डिटेल और अन्य दस्तावेजों की जांच में जुटी हुई है। जल्द ही आरोपियों से पूछताछ की जा सकती है।


इधर बिहार में NEET को लेकर सॉल्वर गैंग का मामला भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। हाल ही में पावापुरी पुलिस ने वाहन जांच के दौरान दो लग्जरी गाड़ियों से तीन संदिग्ध लोगों को पकड़ा था। जांच में पता चला कि ये लोग परीक्षा में फर्जी तरीके से अभ्यर्थियों को पास कराने वाले नेटवर्क से जुड़े थे।


पुलिस ने मोबाइल जांच और पूछताछ के बाद मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी समेत कई जिलों में छापेमारी की, जहां से चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार लोगों की पहचान मनोज कुमार, गौरव कुमार, सुभाष कुमार और हर्षराज के रूप में हुई है।


पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि NEET पास कराने के लिए पहले एडवांस में डेढ़ से दो लाख रुपये लिए जाते थे। इसके बाद पूरी डील 50 से 60 लाख रुपये तक में तय होती थी। योजना यह थी कि असली छात्रों की जगह परीक्षा में सॉल्वर बैठाए जाएंगे, लेकिन पुलिस की कार्रवाई से पूरा नेटवर्क सामने आ गया।


इस पूरे मामले ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। हर साल लाखों छात्र मेहनत करके NEET जैसी परीक्षा की तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और एडमिशन के नाम पर ठगी जैसी घटनाएं उनकी मेहनत पर सवाल खड़े कर रही हैं।


NEET विवाद को लेकर सांसद पप्पू यादव ने भी केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि देश में अब तक कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं, लेकिन दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होने से ऐसे गिरोह लगातार सक्रिय हैं। उन्होंने मांग की कि पेपर लीक और शिक्षा में ठगी करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।


फिलहाल नवादा में दर्ज हुए इस नए मामले के बाद पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है।