Nana Patekar Education: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया. गुरुवार सुबह गोवा स्थित अपने घर पर कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर से फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर है. करीब पांच दशक के करियर में नाना पाटेकर ने अपनी दमदार आवाज, अलग अंदाज और प्रभावशाली अभिनय से हिंदी और मराठी सिनेमा में अलग पहचान बनाई.
लेकिन फिल्मों में पहचान बनाने से पहले नाना पाटेकर का जीवन काफी संघर्षों से गुजरा. उन्होंने कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था. पढ़ाई के साथ परिवार की आर्थिक मदद के लिए वह फिल्मी पोस्टर पेंट किया करते थे. यही काम आगे चलकर उनकी कला की पढ़ाई और फिर अभिनय के सफर का हिस्सा बना.
नाना पाटेकर ने कहां तक की पढ़ाई
नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था. उन्होंने मुंबई के समर्थ विद्यालय से स्कूली शिक्षा हासिल की. इसके बाद उन्होंने कला के क्षेत्र में पढ़ाई की और सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट तथा सर जे.जे. इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड आर्ट से जुड़े रहे. उन्होंने एप्लाइड आर्ट में डिप्लोमा हासिल किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक कमर्शियल आर्टिस्ट और विज्ञापन एजेंसी में काम किया.
13 साल की उम्र में शुरू किया था काम
नाना पाटेकर का बचपन आर्थिक परेशानियों के बीच गुजरा. जब वह करीब 13 साल के थे, तब परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी. उस समय उन्होंने पढ़ाई के साथ फिल्मी पोस्टर पेंट करने का काम शुरू किया.
रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें इस काम के लिए करीब 35 रुपये महीने मिलते थे और काम के बदले एक समय का खाना भी मिलता था. वह स्कूल के बाद कई किलोमीटर पैदल चलकर पोस्टर पेंट करने जाते थे. नाना ने बाद में अपने संघर्ष के इस दौर का कई बार जिक्र किया था.
कमर्शियल आर्टिस्ट से थिएटर तक पहुंचे
कला की पढ़ाई पूरी करने के बाद नाना पाटेकर ने कमर्शियल आर्टिस्ट के तौर पर काम किया. इसी दौरान थिएटर में उनकी दिलचस्पी बढ़ती गई. स्कूल के दिनों से ही उनका झुकाव रंगमंच की ओर था और आगे चलकर थिएटर उनके अभिनय करियर की मजबूत नींव बना.
नाना पाटेकर ने 1978 में फिल्म ‘गमन’ से हिंदी सिनेमा में कदम रखा. इसके बाद ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया. उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले और 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया.
सेना से भी रहा खास जुड़ाव
नाना पाटेकर का जुड़ाव सिर्फ फिल्मों और थिएटर तक सीमित नहीं रहा. 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने सेना के साथ प्रशिक्षण लिया था. बाद में उन्हें टेरिटोरियल आर्मी में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल की रैंक भी दी गई.
नाना पाटेकर की जिंदगी का सफर आर्थिक संघर्ष से शुरू होकर कला की पढ़ाई, पोस्टर पेंटिंग, थिएटर और फिर भारतीय सिनेमा के बड़े नामों में शामिल होने तक पहुंचा. उनकी कहानी बताती है कि मुश्किल परिस्थितियों के बीच भी अपनी कला और मेहनत के दम पर आगे बढ़ा जा सकता है.