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22-Dec-2025 01:48 PM
By First Bihar
JEE Main & JEE Advanced Difference: भारत में हर साल लाखों छात्र इंजीनियर बनने का सपना लेकर जेईई (JEE – Joint Entrance Examination) की तैयारी करते हैं। यह परीक्षा न सिर्फ देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा मानी जाती है, बल्कि इसमें प्रतिस्पर्धा भी बेहद कड़ी होती है। ऐसे में छात्रों और अभिभावकों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड में आखिर अंतर क्या है, किस परीक्षा से किन संस्थानों में दाख़िला मिलता है और इनकी तैयारी की सही रणनीति क्या होनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि जेईई सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि सीमित सीटों और लाखों उम्मीदवारों के बीच चयन की प्रक्रिया है। इसलिए सही जानकारी और स्पष्ट योजना के बिना इस परीक्षा में सफलता पाना मुश्किल हो सकता है। इस रिपोर्ट में हम जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड से जुड़े सभी अहम पहलुओं को विस्तार से समझते हैं।
जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड क्या हैं?
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए जेईई परीक्षा दो चरणों में आयोजित की जाती है— जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड। दोनों परीक्षाओं का उद्देश्य, परीक्षा पैटर्न और कठिनाई स्तर अलग-अलग होता है।
जेईई मेन का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा किया जाता है, जबकि जेईई एडवांस्ड की जिम्मेदारी हर साल बारी-बारी से देश के अलग-अलग आईआईटी (IIT) को सौंपी जाती है। ACE4 इंस्टीट्यूट के को-फाउंडर गणेश पांडे के अनुसार, जेईई मेन दरअसल जेईई एडवांस्ड के लिए एक स्क्रीनिंग परीक्षा है। जेईई एडवांस्ड के ज़रिए देश के 23 आईआईटी में दाख़िला मिलता है।
जेईई मेन से कहां मिलता है दाख़िला?
जेईई मेन के स्कोर के आधार पर छात्रों को देश के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश मिलता है, जिनमें शामिल हैं-
31 राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT)
26 भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT)
लगभग 26 सरकारी वित्तपोषित तकनीकी संस्थान (GFTI)
इसके अलावा कई राज्य और निजी इंजीनियरिंग कॉलेज
जेईई मेन 2026 के लिए 14 लाख से अधिक छात्रों ने पंजीकरण कराया है, लेकिन इनमें से केवल लगभग 2.5 लाख छात्र ही जेईई एडवांस्ड के लिए पात्र हो पाते हैं।
कितनी बार दे सकते हैं परीक्षा?
जेईई मेन: अधिकतम 3 बार (12वीं में रहते हुए और उसके बाद लगातार दो साल)
जेईई एडवांस्ड: केवल 2 बार (12वीं में और उसके अगले साल)
पात्रता (Eligibility Criteria)
उम्मीदवार के पास 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स विषय होना अनिवार्य है। वहीं, सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए 12वीं में 75% अंक या बोर्ड के टॉप 20 पर्सेंटाइल में होना जरूरी है। आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC) के लिए न्यूनतम अंक सीमा 65% है। पर्सेंटाइल नियम इसलिए लागू किया गया है ताकि अलग-अलग बोर्डों के रिजल्ट में असमानता का असर छात्रों पर न पड़े।
परीक्षा पैटर्न
जेईई मेन
3 घंटे की कंप्यूटर आधारित परीक्षा
फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स—तीनों का समान वेटेज
एमसीक्यू और न्यूमेरिकल वैल्यू आधारित प्रश्न
एमसीक्यू में नेगेटिव मार्किंग, न्यूमेरिकल में नहीं
जेईई एडवांस्ड
दो पेपर (पेपर-1 और पेपर-2), दोनों 3-3 घंटे के
एमसीक्यू, न्यूमेरिकल और मैट्रिक्स-मैच टाइप सवाल
प्रश्नों की संख्या और मार्किंग स्कीम हर साल बदलती है
दोनों परीक्षाओं का सिलेबस मुख्य रूप से कक्षा 11वीं और 12वीं के फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स पर आधारित होता है, लेकिन जेईई एडवांस्ड का कठिनाई स्तर कहीं अधिक गहरा और कॉन्सेप्चुअल होता है।
जेईई मेन कब होता है?
जेईई मेन साल में दो बार आयोजित किया जाता है
पहला सत्र: जनवरी
दूसरा सत्र: अप्रैल
छात्र दोनों सत्रों में परीक्षा दे सकते हैं और जिसमें बेहतर स्कोर होता है, उसी के आधार पर अंतिम रैंक तैयार की जाती है। अंतिम रैंक अप्रैल सत्र के बाद घोषित की जाती है। जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड दोनों ही परीक्षाएं इंजीनियरिंग की राह में अहम भूमिका निभाती हैं। जहां जेईई मेन से देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों का रास्ता खुलता है, वहीं जेईई एडवांस्ड आईआईटी में प्रवेश का एकमात्र माध्यम है। सही रणनीति, समय प्रबंधन और कॉन्सेप्ट की मजबूत समझ ही इन परीक्षाओं में सफलता की कुंजी