NDA First Woman Fighter Pilot: हरियाणा के चरखी दादरी जिले के छप्पर गांव की रहने वाली इशिता सांगवान भारतीय वायु सेना के इतिहास में नया अध्याय जोड़ने जा रही हैं। वह नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के जरिए फाइटर स्ट्रीम में पहुंचने वाली पहली महिला फाइटर पायलट बन गई हैं। 13 जून 2026 को हैदराबाद के डुंडीगल स्थित एयर फोर्स एकेडमी (AFA) की पासिंग आउट परेड में उन्होंने अपना परमानेंट कमीशन हासिल किया।


इशिता की यह उपलब्धि सुप्रीम कोर्ट के 2021 के उस ऐतिहासिक फैसले के पांच साल बाद आई है, जिसमें महिलाओं को NDA में प्रवेश की अनुमति दी गई थी। उस समय इशिता 12वीं कक्षा में पढ़ रही थीं। उनके पिता चरण सिंह सांगवान ने फोन कर उन्हें यह खबर दी थी कि अब लड़कियां भी NDA में शामिल हो सकती हैं। यही बातचीत उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुई।


इसके बाद इशिता ने बोर्ड परीक्षा की तैयारी के साथ NDA प्रवेश परीक्षा की भी तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने लिखित परीक्षा, सर्विस सिलेक्शन बोर्ड (SSB) इंटरव्यू, मेडिकल टेस्ट और कम्प्यूटराइज्ड पायलट सिलेक्शन सिस्टम (CPSS) जैसी सभी कठिन प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक पार किया और फाइटर पायलट बनने का सपना साकार किया।


इशिता बचपन से ही पढ़ाई में उत्कृष्ट रही हैं। उनके पिता बताते हैं कि वह लगातार कई घंटों तक पढ़ाई कर सकती थीं और हमेशा अपनी कक्षा के टॉप छात्रों में शामिल रहती थीं। पढ़ाई के साथ-साथ वह राज्य स्तरीय बास्केटबॉल खिलाड़ी भी रही हैं। खेल और शिक्षा के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा साबित की।


उनकी जुड़वां बहन आस्था सांगवान, जो वर्तमान में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं, कहती हैं कि इशिता हमेशा से कुछ अलग और बड़ा करने का सपना देखती थीं। पढ़ाई हो या खेल, वह हर चुनौती को स्वीकार करने के लिए तैयार रहती थीं। पेड़ों पर चढ़ना, आउटडोर गतिविधियों में हिस्सा लेना और कठिन परिस्थितियों का सामना करना उनकी पसंदीदा आदतों में शामिल था।


इशिता का परिवार मूल रूप से हरियाणा के चरखी दादरी का निवासी है, हालांकि उनकी अधिकांश शिक्षा राजस्थान में हुई। उन्होंने चूरू और नागौर में पढ़ाई की। उनके पिता एक स्कूल के प्रिंसिपल हैं, जबकि उनकी मां अनीता सांगवान हिंदी शिक्षिका हैं।


इस सफलता के बीच परिवार को अपनी दिवंगत दादी लिछमा देवी की कमी भी महसूस हो रही है। परिवार के अनुसार, इशिता अपनी दादी के बेहद करीब थीं और अक्सर उनसे कहती थीं कि एक दिन वह बड़ी अधिकारी बनेंगी। दादी को हमेशा विश्वास था कि उनकी पोती कुछ बड़ा करके दिखाएगी।


पुणे के खडकवासला स्थित NDA में तीन वर्षों की कठोर सैन्य ट्रेनिंग पूरी करने के बाद इशिता ने हैदराबाद की एयर फोर्स एकेडमी में फाइटर पायलट की विशेष ट्रेनिंग हासिल की। अब वह भारतीय वायु सेना में महिला अधिकारियों की उस नई पीढ़ी का हिस्सा बन गई हैं, जो कॉम्बैट एविएशन में नई ऊंचाइयों को छू रही है।


हरियाणा के एक छोटे से गांव से लेकर फाइटर जेट के कॉकपिट तक का इशिता का सफर देशभर की लाखों युवतियों के लिए प्रेरणा बन गया है। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी सपना असंभव नहीं होता।