Lady-Singham-UPSC-Success-Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाती है। हर साल लाखों अभ्यर्थी इस परीक्षा की तैयारी करते हैं, लेकिन सफलता हासिल कुछ ही उम्मीदवार कर पाते हैं। IPS अफसर सिमाला प्रसाद की कहानी ऐसे ही संघर्ष और आत्मविश्वास की मिसाल है। जिन्होंने बिना किसी कोचिंग में पढ़े पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 51 हासिल की और IPS बनीं।


साहित्य और प्रशासनिक पृष्ठभूमि वाला परिवार

सिमाला प्रसाद का जन्म 8 अक्टूबर 1980 को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हुआ था। उनका परिवार प्रशासनिक सेवा और साहित्य से जुड़ा रहा है। उनके पिता डॉ. भागीरथ प्रसाद 1975 बैच के IAS अधिकारी रहे हैं। वे बाद में सांसद भी बने और दो विश्वविद्यालयों में कुलपति के पद पर भी जिम्मेदारी संभाली।


उनकी मां मेहरुन्निसा परवेज हिंदी की प्रसिद्ध लेखिका थीं। उन्हें वर्ष 2005 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था। ऐसे परिवार में पली-बढ़ीं सिमाला को बचपन से ही प्रशासन और साहित्य का माहौल मिला, लेकिन उन्होंने अपनी पेशेवर पहचान खुद बनाने का फैसला किया।


कॉमर्स की पढ़ाई से पुलिस सेवा तक का सफर

सिमाला प्रसाद ने कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया और समाजशास्त्र विषय से मास्टर डिग्री की। पीजी तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद सिमाला प्रसाद ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा पास की और डीएसपी बनीं।


डीएसपी के रूप में नौकरी करते हुए उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। बिना किसी कोचिंग के उन्होंने पढ़ाई की जो काफी चुनौतीपूर्ण था। सेल्फ स्टडी कर पहले ही प्रयास में उन्होंने UPSC में ऑल इंडिया रैंक 51 हासिल की और IPS बनीं।


पुलिस सेवा के साथ अभिनय में भी आजमाया हाथ

सिमाला प्रसाद का जुड़ाव सिर्फ पुलिस सेवा तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में भी काम किया। वर्ष 2016 में फिल्म 'अलिफ' से उन्होंने बड़े पर्दे पर डेब्यू किया। इसके बाद वर्ष 2019 में वह फिल्म 'नक्काश' में नजर आईं।


जून 2026 में रिलीज हुई क्राइम थ्रिलर फिल्म 'द नर्मदा स्टोरी' में उन्होंने सब-इंस्पेक्टर की भूमिका निभाई। अभिनय में उनकी रुचि कॉलेज के दिनों से रही है। भोपाल में रहते हुए वह थिएटर से भी जुड़ी थीं, जिसका अनुभव आगे चलकर फिल्मों में काम आया।


मां की तरह लेखन में भी बनाई पहचान

सिमाला प्रसाद ने अपनी मां की तरह लेखन के क्षेत्र में भी कदम रखा। इस साल की शुरुआत में उन्होंने एक नॉन-फिक्शन किताब लिखी, जिसमें अपने अनुभवों और सफर को अपने नजरिए से प्रस्तुत किया है।


MPPSC पास करने से लेकर डीएसपी बनने और फिर नौकरी के साथ बिना कोचिंग UPSC पास कर IPS बनने तक सिमाला प्रसाद का सफर कई अलग-अलग क्षेत्रों से होकर गुजरा है। सिमाला प्रसाद की कहानी में प्रशासनिक सेवा, पुलिस, अभिनय और लेखन—चारों क्षेत्रों का अनुभव देखने को मिलता है।