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28-Mar-2026 05:42 PM
By First Bihar
BPSC TRE 4: बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा चौथे चरण की शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 का विज्ञापन जारी नहीं होने से अभ्यर्थियों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। लंबे समय से नोटिफिकेशन का इंतजार कर रहे लाखों अभ्यर्थियों ने अब आंदोलन की चेतावनी दे दी है, जिससे आयोग और शिक्षा विभाग बिहार की चिंता बढ़ गई है।
छात्र नेता दिलीप कुमार ने साफ तौर पर ऐलान किया है कि अगर आगामी 3 दिनों के भीतर TRE-4 का विज्ञापन जारी नहीं किया गया, तो अभ्यर्थी फिर से सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि आयोग और शिक्षा विभाग की ओर से लगातार देरी की जा रही है, जिससे 10 लाख से अधिक शिक्षक अभ्यर्थी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
मीडिया से बातचीत के दौरान दिलीप कुमार ने बताया कि करीब डेढ़ महीने पहले आयोग की ओर से कहा गया था कि शिक्षक भर्ती की अधियाचना प्राप्त हो चुकी है और जल्द ही TRE-4 का विज्ञापन जारी कर दिया जाएगा। लेकिन अब तक कोई आधिकारिक सूचना सामने नहीं आई है, जिससे अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने 18 मार्च को हुए आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय आयोग के अधिकारियों ने बताया था कि अधियाचना पहले आई थी, लेकिन बाद में इसे शिक्षा विभाग द्वारा वापस ले लिया गया। उस दौरान यह भी आश्वासन दिया गया था कि मार्च के अंत तक विज्ञापन जारी कर दिया जाएगा। अब मार्च खत्म होने को है, लेकिन अभी तक कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है।
दिलीप कुमार ने स्पष्ट किया कि आयोग के पास अब भी 31 मार्च तक का समय है। यदि इस अवधि में विज्ञापन जारी नहीं होता है, तो अभ्यर्थी एक बार फिर बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ शिक्षक भर्ती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अन्य लंबित भर्तियों को लेकर भी आवाज उठाई जाएगी।
छात्र नेता ने राज्य के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री द्वारा बार-बार अलग-अलग बयान दिए जा रहे हैं, जिससे अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने मंत्री को अपने पद की गरिमा बनाए रखने और स्पष्ट जानकारी देने की सलाह दी।
इसके साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि 30 मार्च को बेगूसराय में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों की एक बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में शिक्षक भर्ती, लाइब्रेरियन, दारोगा और सिपाही जैसी विभिन्न भर्तियों से जुड़े उम्मीदवार शामिल होंगे और अपनी मांगों को लेकर रणनीति तैयार करेंगे।
दिलीप कुमार ने यह भी कहा कि अब अभ्यर्थियों का भरोसा आयोग और शिक्षा विभाग दोनों से उठता जा रहा है। उनका आरोप है कि जानबूझकर भर्ती प्रक्रिया में देरी की जा रही है, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों से भर्ती प्रक्रिया के नाम पर केवल रोस्टर तैयार करने की बात कही जा रही है, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
इस पूरे मामले ने बिहार में शिक्षक भर्ती को लेकर एक बार फिर सियासी और सामाजिक माहौल गरमा दिया है। लाखों अभ्यर्थी अब आने वाले कुछ दिनों पर नजर टिकाए हुए हैं, क्योंकि इन्हीं दिनों में यह तय होगा कि उन्हें नौकरी की दिशा में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा या फिर एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।