Bihar Teacher News: बिहार में BPSC TRE-3 के तहत हुई शिक्षक नियुक्ति में आरक्षण को लेकर बड़ी गड़बड़ी सामने आई है. जांच के दौरान उत्तर प्रदेश और ओडिशा के ऐसे अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं, जिन्हें बिहार की आरक्षित श्रेणियों का लाभ देकर शिक्षक के पद पर नियुक्त किया गया. मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सभी जिलों में नियुक्त शिक्षकों के प्रमाणपत्र और आरक्षण से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है.
जानकारी के अनुसार TRE-3 के तहत 2025 में नियुक्त किए गए शिक्षकों में कई ऐसे अभ्यर्थी मिले हैं, जिनका आवासीय पता बिहार के बाहर का है, लेकिन उन्हें बिहार की आरक्षित श्रेणी में नियुक्ति मिली है. इनमें पिछड़ा वर्ग से लेकर आरक्षित महिला कोटे तक का लाभ लेने वाले अभ्यर्थी शामिल हैं. शुरुआती जांच में एक दर्जन से अधिक ऐसे शिक्षकों की जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है. इनमें महिलाओं की संख्या अधिक बताई जा रही है.
एक प्रखंड में मिले चार से पांच शिक्षक
जांच के दौरान अलग-अलग प्रखंडों में ऐसे शिक्षकों की जानकारी सामने आ रही है, जिन्हें बिहार के आरक्षित कोटे का लाभ देकर नियुक्त किया गया. कुछ प्रखंडों में चार से पांच ऐसे शिक्षक मिले हैं. विभाग की ओर से सभी प्रखंडों में नियुक्त शिक्षकों की श्रेणीवार जांच कराई जा रही है.
अभी पांच से छह प्रखंडों से जांच रिपोर्ट आना बाकी है. ऐसे में बाहर के राज्यों के अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है. जांच पूरी होने के बाद सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को शपथपत्र भी देना होगा कि उनके प्रखंड में बिहार से बाहर के किसी अभ्यर्थी को आरक्षित कोटे का लाभ देकर नियुक्त नहीं किया गया है.
सरैया में चार महिला शिक्षकों की नियुक्ति पर सवाल
मुजफ्फरपुर के सरैया प्रखंड में जांच के दौरान चार महिला शिक्षकों की नियुक्ति सामने आई है, जिनका पता ओडिशा और उत्तर प्रदेश का बताया गया है. इन सभी की नियुक्ति आरक्षित महिला कोटे में हुई है.
मुजफ्फरपुर के जिला शिक्षा पदाधिकारी कुमार अरविन्द सिन्हा ने बताया कि TRE-3 के तहत नियुक्त सभी शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच कराई जा रही है. जांच में आरक्षण और आवासीय प्रमाणपत्र समेत नियुक्ति से जुड़े सभी दस्तावेजों को देखा जा रहा है.
दिव्यांग कोटे से नियुक्ति की भी जांच
TRE-3 की काउंसिलिंग और नियुक्ति के दौरान ही बिहार से बाहर के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ दिए जाने का मामला सामने आया था. इसके बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा और सभी जिलों से जांच कर रिपोर्ट मांगी गई.
अब आरक्षित श्रेणियों के साथ-साथ दिव्यांग कोटे से हुई नियुक्तियों की भी जांच की जा रही है. विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि किन-किन श्रेणियों में बाहर के अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिली और उनके दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई.
काउंसिलिंग में शामिल अधिकारी-कर्मियों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा
जिला शिक्षा पदाधिकारी के अनुसार जिन अभ्यर्थियों का रिजल्ट जिस श्रेणी में आया, उसी श्रेणी में उनकी काउंसिलिंग भी करा दी गई. इस दौरान उनके आवासीय पते और आरक्षण से जुड़े दस्तावेजों की जांच में किस स्तर पर चूक हुई, इसकी पड़ताल की जा रही है.
अब यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग किस काउंटर पर हुई थी और उस समय वहां कौन अधिकारी और कर्मचारी तैनात थे. काउंसिलिंग से जुड़े रिकॉर्ड को भी जांच के दायरे में लिया गया है.
मुजफ्फरपुर में शिक्षकों के दोहरे वेतन का मामला भी सामने आया
इसी बीच मुजफ्फरपुर जिले में शिक्षकों के वेतन भुगतान से जुड़ी एक और अनियमितता सामने आई है. ऑडिट टीम की जांच में 250 से अधिक ऐसे शिक्षकों की जानकारी मिली है, जिन्हें एक से दो महीने तक दोहरा वेतन मिलने की बात सामने आई है.
जांच के दौरान शनिवार को कई शिक्षक शिक्षा कार्यालय पहुंचे. इनमें बड़ी संख्या उन शिक्षकों की बताई जा रही है, जो विशिष्ट शिक्षक से एचटी यानी प्रधान शिक्षक बने हैं. इन शिक्षकों के बैंक खाते, वेतन भुगतान और अन्य रिकॉर्ड की जांच की जा रही है.
करीब 35 शिक्षक पहले दिन रिकॉर्ड लेकर पहुंचे
ऑडिट टीम के सामने पहले दिन करीब 35 शिक्षक अपने बैंक खाते और वेतन से जुड़े दस्तावेज लेकर पहुंचे. राज्य स्तर से उपलब्ध कराई गई सूची के आधार पर ऑडिट टीम भुगतान की जांच कर रही है.
जिन शिक्षकों ने दोहरा वेतन प्राप्त किया है, उनमें से करीब आधा दर्जन शिक्षकों ने राशि वापस करने के लिए चालान भी जमा कर दिया है. वहीं कई शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने दोहरा भुगतान तो प्राप्त किया, लेकिन राशि वापस नहीं की है. इन मामलों की भी जांच की जा रही है.
PRAN जनरेट होने के बीच हुआ दोहरा भुगतान
अधिकारियों के अनुसार विशिष्ट शिक्षक से प्रधान शिक्षक बनने वाले शिक्षकों का PRAN जनरेट किया जाना था. इसी दौरान वेतन भुगतान को लेकर तत्काल प्रक्रिया शुरू की गई. इसी प्रक्रिया में कुछ शिक्षकों को विशिष्ट शिक्षक के पद का वेतन और प्रधान शिक्षक के पद का वेतन दोनों मिल गया.
अब यह जांच की जा रही है कि भुगतान की प्रक्रिया में यह गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन-कौन लोग हैं.
उपस्थिति के आधार पर वेतन भुगतान पर भी सवाल
शिक्षकों के वेतन भुगतान के लिए उपस्थिति का रिकॉर्ड जरूरी होता है. उपस्थिति पर प्रधानाध्यापक और संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर भी होते हैं. ऐसे में दो अलग-अलग पदों के लिए एक ही अवधि में उपस्थिति दर्ज होने और दोनों जगह से वेतन भुगतान होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
जांच में यह देखा जा रहा है कि संबंधित शिक्षकों की उपस्थिति किस रिकॉर्ड के आधार पर स्वीकृत हुई और भुगतान की प्रक्रिया में किस स्तर पर सत्यापन किया गया.
फर्जी उपस्थिति मामले में डीएम ने बनाई दो सदस्यीय कमेटी
मुजफ्फरपुर में ई-शिक्षा कोष पर फर्जी उपस्थिति के मामलों की जांच के लिए जिलाधिकारी ने दो सदस्यीय कमेटी का गठन किया है. कमेटी अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान ई-शिक्षा कोष पर दर्ज उपस्थिति के मामले के साथ-साथ अन्य शिक्षकों की कथित फर्जी उपस्थिति की भी जांच करेगी.
कमेटी में वरीय उपसमाहर्ता विकास कुमार और अपर समाहर्ता संजय कुमार को शामिल किया गया है. दोनों अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है.
डीएम ने बताया कि विधान परिषद सदस्य वंशीधर व्रजवासी के अर्द्धसरकारी पत्र और माड़ीपुर निवासी अनूप कुमार के आवेदन के आधार पर जांच कराई जा रही है. इन शिकायतों में शिक्षा विभाग से जुड़ी अनियमितता, काम में बाधा और ई-शिक्षा कोष पर फर्जी उपस्थिति समेत कई मामले शामिल हैं.
सकरा में मध्याह्न भोजन से जुड़े गबन के आरोप की भी जांच
शिक्षा विभाग से जुड़े मामलों की जांच के दौरान सकरा प्रखंड में मध्याह्न भोजन में कथित गबन के मामले को भी जांच के दायरे में लिया गया है. कमेटी और संबंधित अधिकारी शिकायतों में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की जांच करेंगे.