Bihar Exam Fraud: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे फर्जीवाड़े पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है. आयोग ने कुल 155 अभ्यर्थियों को विभिन्न परीक्षाओं से प्रतिबंधित कर दिया है, जिनमें से 113 अभ्यर्थियों को आजीवन किसी भी BPSC परीक्षा में शामिल होने से अयोग्य घोषित किया गया है. इस कदम को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा फैसला माना जा रहा है.


आयोग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई उन अभ्यर्थियों पर की गई है जो परीक्षा प्रक्रिया में धांधली, नकल और फर्जी तरीकों का इस्तेमाल करते हुए पकड़े गए थे. BPSC ने साफ किया है कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी.


टीआरई परीक्षाओं में सबसे ज्यादा गड़बड़ी सामने आई

शिक्षक भर्ती परीक्षाओं (TRE) में सबसे अधिक अनियमितताएं पाई गईं. TRE-3 परीक्षा में 66 अभ्यर्थियों पर कार्रवाई हुई, जिनमें से 65 को आजीवन प्रतिबंधित कर दिया गया, जबकि एक पर अन्य दंड लगाया गया.


इसी तरह TRE-2 परीक्षा में कुल 49 अभ्यर्थी कदाचार में शामिल पाए गए. इनमें से 47 अभ्यर्थियों को हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया, जबकि दो अभ्यर्थियों पर 5 साल का प्रतिबंध लगाया गया है. यह संख्या बताती है कि इस परीक्षा में बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आई थी.


विद्यालय अध्यापक परीक्षा में भी कार्रवाई

कक्षा 1 से 12वीं तक के लिए आयोजित विद्यालय अध्यापक परीक्षा में भी नकल और अनियमितता के मामले सामने आए. इस परीक्षा में 20 अभ्यर्थियों को दोषी पाया गया, जिन पर 5 साल का प्रतिबंध लगाया गया है.


आयोग का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखना उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है, और इसलिए हर स्तर पर सख्त कार्रवाई की जा रही है.


70वीं संयुक्त परीक्षा में भी पकड़े गए आरोपी

BPSC की प्रतिष्ठित 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में भी फर्जीवाड़े के मामले सामने आए. इस परीक्षा में 13 अभ्यर्थी कदाचार करते हुए पकड़े गए.


इनमें से एक अभ्यर्थी को आजीवन प्रतिबंधित किया गया, जबकि 12 अभ्यर्थियों को 3 साल के लिए परीक्षा से बाहर कर दिया गया है. इससे पहले 68वीं और 69वीं परीक्षाओं में भी कई अभ्यर्थियों पर 3 से 5 साल तक का प्रतिबंध लगाया जा चुका है.