Bihar Success Story: बिहार के लाल ने एक बार फिर से कमाल कर दिखाया है. सारण जिले के ग्रामीण इलाके से निकलकर नीरज कुमार सिंह ने अपनी मेहनत के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है. कभी परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि पढ़ाई की फीस जुटाना मुश्किल होता था, लेकिन अब नीरज अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स लोवेल में पीएचडी कर रहे हैं. विश्वविद्यालय ने उन्हें करीब 2 करोड़ 6 लाख की फुल-फंडेड स्कॉलरशिप दी है.


नीरज ने 24 अगस्त 2026 से ‘एजुकेशन लीडरशिप’ विषय में पीएचडी की शुरुआत की है. 2026-27 बैच में इस विषय पर शोध करने वाले करीब 60 शोधार्थियों में नीरज इकलौते भारतीय हैं.


2.6 करोड़ की मिलेगी फुल-फंडेड स्कॉलरशिप

यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स लोवेल की ओर से नीरज को करीब 2 करोड़ 6 लाख की फुल-फंडेड स्कॉलरशिप मिली है. इसमें ट्यूशन फीस की पूरी छूट, हेल्थ इंश्योरेंस और नियमित छात्रवृत्ति शामिल है. यानी उनकी पढ़ाई और शोध से जुड़े प्रमुख खर्च विश्वविद्यालय की ओर से वहन किए जाएंगे.


पान की दुकान चलाते थे नीरज के पिता

नीरज का परिवार आर्थिक रूप से काफी सामान्य स्थिति में था. उनके पिता प्रमोद सिंह पान की दुकान चलाते थे, जबकि उनकी मां गीता देवी अक्सर बीमार रहती थीं. तीन भाइयों वाले परिवार में पढ़ाई का खर्च जुटाना आसान नहीं था.


दसवीं के बाद नीरज की पढ़ाई जारी रखना भी चुनौती बन गया था. आसपास के शुभचिंतकों की मदद से उन्होंने आगे की पढ़ाई जारी रखी और धीरे-धीरे अपनी शैक्षणिक यात्रा को आगे बढ़ाया.


UPenn, TISS और JPU से पढ़ाई

पीएचडी तक पहुंचने से पहले नीरज ने देश और विदेश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई की. उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया यानी UPenn, मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, चेन्नई के राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान और जय प्रकाश विश्वविद्यालय से शिक्षा हासिल की है.


नीरज से जब पुचा गया उनका लक्ष्य क्या है तो उन्होंने बताया कि आगे चलकर मुझे प्रोफेसर बनना है और शिक्षा के क्षेत्र में शोध के जरिए काम करना है. अमेरिका पहुंचने के बाद नीरज को यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स लोवेल में टीचिंग असिस्टेंट की जिम्मेदारी भी मिली है. शैक्षणिक सत्र 2026-27 में वे ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन के छात्रों की पढ़ाई में सहयोग करेंगे.


यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ एजुकेशन ने नीरज को उनके शोध कार्य के लिए विशेष वर्कस्पेस भी उपलब्ध कराया है.


बहुभाषी और समावेशी शिक्षा पर करेंगे शोध

नीरज का शोध बहुभाषी शिक्षा, शिक्षा में बराबरी और समावेशी शिक्षा जैसे विषयों पर केंद्रित है. उनका प्रयास ऐसे शैक्षिक मॉडल पर काम करना है, जिसमें भाषा या सामाजिक-आर्थिक स्थिति की वजह से कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे.


उनका शोध शिक्षा व्यवस्था में बराबरी और सभी बच्चों को बेहतर अवसर देने से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहेगा.


नीरज ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने प्रोफेसरों, मेंटर्स, दोस्तों और सहयोगियों को दिया है. उनका कहना है कि लगातार मेहनत और सही मार्गदर्शन के जरिए विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है.