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बिहार में उच्च शिक्षा सुधार पर सख्ती: खराब प्रदर्शन वाले संस्थानों का होगा शैक्षणिक ऑडिट, वोकेशनल कोर्स की फीस होगी एकसमान

Bihar News: बिहार में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं. राज्यपाल की बैठक में कमजोर संस्थानों का शैक्षणिक ऑडिट कराने का निर्देश दिया गया है.

03-Apr-2026 01:57 PM

By FIRST BIHAR

Bihar News: बिहार सरकार राज्य में उच्च शिक्षा की गिरती गुणवत्ता, शोध और नवाचार की कमी को लेकर गंभीर हो गई है और इसे सुधारने के लिए कई सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रही है। हाल ही में राज्यपाल की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद सरकार ने शोध संस्थानों को अधिक वित्तीय सहायता देने और कमजोर प्रदर्शन वाले संस्थानों का शैक्षणिक अंकेक्षण (एजुकेशनल ऑडिट) कराने का फैसला लिया है।


बिहार लोक भवन में राज्यपाल एवं कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन की अध्यक्षता में कुलपतियों की बैठक आयोजित हुई, जिसमें उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ाने, शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने और शोध व नवाचार को बढ़ावा देने पर विस्तृत चर्चा की गई। राज्यपाल ने कुलपतियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे संस्थानों में नवाचार और शोध को प्राथमिकता दें और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस पहल करें।


सरकार ने यह भी तय किया है कि जो संस्थान शोध और नवाचार के क्षेत्र में बेहतर कार्य करेंगे, उन्हें अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा। वहीं, जो संस्थान गुणवत्ता सुधार के लिए नई पहल नहीं करेंगे, उनका प्रदर्शन के आधार पर शैक्षणिक ऑडिट कराया जाएगा।


इसके साथ ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की गाइडलाइन के पालन में हो रही मनमानी पर भी नकेल कसने की तैयारी है। बिहार लोक भवन के विश्वविद्यालय शाखा के एक अधिकारी के अनुसार, राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में वोकेशनल कोर्स की फीस में एकरूपता लाने का निर्णय लिया गया है और इस संबंध में कुलपतियों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।


अधिकारी ने बताया कि कई संस्थानों में वोकेशनल कोर्स की फीस और नामांकन प्रक्रिया में असमानता की शिकायतें मिल रही थीं। इसे ध्यान में रखते हुए सभी उच्च शिक्षण संस्थानों, खासकर निजी संस्थानों को UGC की गाइडलाइन का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।


गौरतलब है कि इससे पहले भी UGC उच्च शिक्षण संस्थानों की मनमानी और फीस वृद्धि पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकारों को सख्त कदम उठाने के निर्देश दे चुका है। शिक्षा विभाग द्वारा भी समय-समय पर कुलपतियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहे हैं।