Bihar School Scam: बिहार के भागलपुर प्रमंडल में सरकारी स्कूलों की राशि में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है. भागलपुर और बांका जिले के सरकारी स्कूलों से कुल 1 करोड़ 22 लाख 88 हजार 333 रुपये की अवैध और अतिरिक्त निकासी की गई है. शिक्षा विभाग की जांच में 43 अलग-अलग मामले सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है. मामले में संबंधित बैंक खातों पर होल्ड लगाने के साथ दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है.


क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक कार्यालय की ओर से 31 अक्टूबर 2026 तक तैयार की गई रिपोर्ट में इस वित्तीय अनियमितता का खुलासा हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, भागलपुर जिले में सबसे अधिक गड़बड़ी सामने आई है. यहां 31 मामलों में 1 करोड़ 4 लाख 68 हजार 135 रुपये की अधिक निकासी की गई. वहीं बांका जिले में 12 मामलों के जरिए 18 लाख 20 हजार 198 रुपये की अतिरिक्त निकासी का मामला सामने आया है.


अब तक 67 लाख से अधिक की हुई वसूली

मामले का खुलासा होने के बाद शिक्षा विभाग ने अवैध रूप से निकाली गई राशि की वसूली शुरू कर दी है. दोनों जिलों को मिलाकर अब तक 67 लाख 61 हजार 841 रुपये की वसूली की जा चुकी है. हालांकि, अभी भी 55 लाख 26 हजार 492 रुपये की राशि बकाया है.


जिलावार आंकड़ों के मुताबिक, भागलपुर में अब तक 53 लाख 43 हजार 173 रुपये की वसूली हुई है, जबकि 51 लाख 24 हजार 962 रुपये अभी भी बाकी हैं. वहीं बांका जिले में 14 लाख 18 हजार 668 रुपये की वसूली की गई है. यहां 4 लाख 1 हजार 530 रुपये की राशि की वसूली अभी शेष है.


बैंक खातों पर लगाया गया होल्ड, FIR भी दर्ज

शिक्षा विभाग ने वित्तीय अनियमितता के मामले में कार्रवाई तेज कर दी है. भागलपुर जिले में 46 लाख 87 हजार 811 रुपये बैंक खातों में होल्ड कराए गए हैं, ताकि संबंधित राशि का दुरुपयोग नहीं हो सके. इसके अलावा गबन और धोखाधड़ी के मामले में दोषी पाए गए कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ संबंधित थानों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है.


भागलपुर प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक सुभाष कुमार गुप्ता ने सभी संबंधित कर्मचारियों और पदाधिकारियों को बकाया राशि जल्द से जल्द सरकारी खजाने में जमा कराने का निर्देश दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत राशि जमा नहीं कराने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.


क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक कार्यालय के अनुसार, फिलहाल तैयार की गई रिपोर्ट औपबंधिक है. इसे अंतिम रूप देने के बाद पूरक प्रतिवेदन भी सौंपा जाएगा. ऐसे में जांच के दौरान वित्तीय अनियमितता से जुड़े कुछ और मामले सामने आने की संभावना है.


सरकारी स्कूलों के लिए जारी होने वाली राशि का इस्तेमाल विद्यालयों की जरूरतों और बच्चों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में किया जाता है. ऐसे में स्कूलों की राशि की अवैध निकासी के इस मामले ने शिक्षा विभाग की वित्तीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब विभाग के सामने बकाया 55 लाख रुपये की वसूली और पूरे मामले में जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की चुनौती है.