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19-Mar-2026 10:39 AM
By First Bihar
Bihar News: बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब गांव-गांव के छात्र भी कंप्यूटर की पढ़ाई कर सकेंगे और तकनीक से जुड़ पाएंगे। बिहार सरकार ने फैसला लिया है कि नए शैक्षणिक सत्र से, यानी 1 अप्रैल से कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए कंप्यूटर विषय को सिलेबस में शामिल किया जाएगा।
इस योजना की तैयारी पूरी कर ली गई है। राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने इस नए पाठ्यक्रम को तैयार किया है और स्कूलों तक किताबें भेजने का काम भी शुरू हो चुका है। इसका उद्देश्य यह है कि सरकारी स्कूलों के बच्चे भी प्राइवेट स्कूलों के बच्चों की तरह डिजिटल शिक्षा का लाभ उठा सकें।
अब तक देखा गया है कि सरकारी स्कूलों के छात्र कंप्यूटर शिक्षा में थोड़ा पीछे रह जाते थे, लेकिन इस नए कदम से उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। बच्चे अब कंप्यूटर के बारे में शुरू से ही सीखेंगे, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे भविष्य में तकनीकी क्षेत्र में भी बेहतर कर सकेंगे।
नए सिलेबस की खास बात यह है कि यह सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगा। इसे बहुत ही आसान और प्रैक्टिकल तरीके से तैयार किया गया है। बच्चे कंप्यूटर के अलग-अलग हिस्सों को पहचानना सीखेंगे, जैसे माउस, कीबोर्ड, मॉनिटर आदि। इसके अलावा वे यह भी समझेंगे कि कंप्यूटर कैसे काम करता है।
छात्रों को ऑपरेटिंग सिस्टम, मल्टीटास्किंग और यूजर इंटरफेस जैसी जरूरी चीजें भी सिखाई जाएंगी। यानी वे सिर्फ कंप्यूटर देखेंगे ही नहीं, बल्कि उसे चलाना और इस्तेमाल करना भी सीखेंगे। इसके साथ ही आज के समय की जरूरी तकनीक जैसे ‘क्लाउड कंप्यूटिंग’ के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि इस सिलेबस में साइबर सुरक्षा पर भी खास ध्यान दिया गया है। बच्चों को सिखाया जाएगा कि इंटरनेट का सुरक्षित उपयोग कैसे करें और साइबर अपराध से कैसे बचें। इससे वे डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रह सकेंगे और सही तरीके से तकनीक का उपयोग कर पाएंगे।
इस पूरे बदलाव को सफल बनाने के लिए NCERT ने भी स्कूलों और शिक्षकों को खास निर्देश दिए हैं। इसमें कहा गया है कि बच्चों को सीधे नए विषय पढ़ाने से पहले उनकी बुनियादी समझ मजबूत की जाए। यानी पहले उन्हें बेसिक चीजें अच्छे से समझाई जाएं, ताकि वे नए सिलेबस को आसानी से सीख सकें।
शिक्षकों से यह भी कहा गया है कि वे पढ़ाई को आसान और दिलचस्प बनाएं। बच्चों को सिर्फ रटाने के बजाय उन्हें समझाकर और प्रैक्टिकल तरीके से पढ़ाया जाए। इससे बच्चे पढ़ाई में ज्यादा रुचि लेंगे और बेहतर तरीके से सीख पाएंगे।
सरकार का यह कदम डिजिटल साक्षरता को बढ़ाने की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सरकारी स्कूलों के बच्चे भी तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकेंगे। इससे उनके भविष्य के अवसर भी बढ़ेंगे।