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21-Feb-2026 07:15 AM
By FIRST BIHAR
Bihar News: विज्ञान, तकनीक और कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बिहार सरकार ने राज्य के सभी 38 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित कोर्स अनिवार्य करने का फैसला किया है। यह पहल NASSCOM के सहयोग से की जा रही है, ताकि छात्रों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ा जा सके और उनकी रोजगार क्षमता को सशक्त बनाया जा सके।
बिहार टेक्निकल यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक डॉ. बिजेंद्र कुमार ने बताया कि 22 जनवरी को विश्वविद्यालय और नैसकॉम के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे। नैसकॉम के पास एआई से जुड़े 400 से अधिक कोर्स उपलब्ध हैं, जिनमें से बिहार के लिए 56 एआई आधारित कोर्स को मंजूरी दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिविल, मैकेनिकल समेत सभी इंजीनियरिंग शाखाओं के छात्रों के लिए एआई कोर्स करना अनिवार्य होगा। इसके लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और सभी 38 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में ये कोर्स निःशुल्क कराए जाएंगे।
फिलहाल नैसकॉम की ओर से इन कोर्स को सर्टिफिकेट कोर्स के रूप में मान्यता दी गई है। हालांकि, विश्वविद्यालय की योजना है कि भविष्य में इन्हें क्रेडिट सिस्टम से जोड़ा जाए और ऑफलाइन मोड में नियमित कक्षा शिक्षण के रूप में शुरू किया जाए। विश्वविद्यालय यह भी चाहता है कि आगे चलकर इन कोर्स के अंक परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली में शामिल किए जाएं, ताकि छात्रों को अलग से एआई सर्टिफिकेट अपलोड करने की आवश्यकता न पड़े।
नैसकॉम की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे 56 एआई कोर्स पूरी तरह ऑनलाइन होंगे। इनकी अवधि अलग-अलग है—कुछ कोर्स 40 घंटे के हैं, जबकि कुछ 200 घंटे से अधिक के। कोर्स पूरा करने के बाद छात्रों को प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा, जिससे उन्हें उच्च शिक्षा और रोजगार में लाभ मिल सकेगा।
वहीं, बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि तकनीकी शिक्षा में नवाचार को ध्यान में रखते हुए एआई आधारित कोर्स अनिवार्य किए गए हैं। उनका कहना है कि नैसकॉम के साथ किया गया यह करार छात्रों की शिक्षा को समय और बाजार की मांग के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सरकार का मानना है कि इस पहल से छात्रों को आधुनिक तकनीकों की गहरी समझ मिलेगी और वे वैश्विक तकनीकी विकास के साथ कदम मिला सकेंगे। राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एआई कोर्स को अनिवार्य करना बिहार की तकनीकी शिक्षा को नई दिशा देने वाला निर्णय माना जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में स्किल डेवलपमेंट और रोजगार के अवसर दोनों मजबूत होंगे।