Success Story: नज़रों में अंधेरा सही, इरादों में उजाला होना चाहिए, मंजिल खुद झुक जाएगी, बस चलने का जज्बा होना चाहिए… इन पंक्तियों को सच कर दिखाया है केरल के रहने वाले अजय आर राज ने, जो मुश्किल हालात के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश करते हैं. महज 8 साल की उम्र में उनकी आंखों की रोशनी कम होने लगी थी. परिवार की आर्थिक स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं थी. उनके पिता ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का खर्च चलाते थे, लेकिन इन मुश्किलों के बीच अजय ने पढ़ाई नहीं छोड़ी.


अजय ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और आगे चलकर दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने इंग्लिश लिटरेचर में मास्टर्स की डिग्री हासिल की और कॉलेज में पढ़ाने लगे. नौकरी के साथ-साथ उनका UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी का सपना भी चलता रहा.


पहले प्रयास में मिली 730वीं रैंक

UPSC की तैयारी के दौरान अजय को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. शुरुआती प्रयासों में सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने तैयारी जारी रखी. आखिरकार उन्होंने पहली बार UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की और 730वीं रैंक हासिल की. इस रैंक के आधार पर उनका चयन रेलवे सर्विस में हुआ.


लेकिन अजय का लक्ष्य इससे आगे का था. उन्होंने दोबारा परीक्षा देने का फैसला किया और अपनी तैयारी जारी रखी. अपने पांचवें प्रयास में उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में 109वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल कर ली.


अजय के पिता ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का खर्च उठाते थे, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं. सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद परिवार ने अजय की पढ़ाई में उनका साथ दिया. अजय ने भी अपनी परिस्थितियों को पढ़ाई के रास्ते में नहीं आने दिया.


अजय का कहना है कि उनकी दृष्टिबाधिता उनकी जिंदगी का एक हिस्सा है. वह इसे अपनी उपलब्धियों को कम करने या बढ़ाने वाली चीज के तौर पर नहीं देखते. खाली समय में उन्हें उकुलेले बजाना और तैराकी करना पसंद है.


8 साल की उम्र में आंखों की रोशनी कम होने से शुरू हुई मुश्किलों के बावजूद अजय ने पढ़ाई जारी रखी, शिक्षक बने, पहली बार UPSC पास किया और फिर दोबारा परीक्षा देकर 109वीं रैंक हासिल की. उनकी कहानी दिखाती है कि किसी लक्ष्य तक पहुंचने के रास्ते में मुश्किलें आ सकती हैं, लेकिन लगातार कोशिश करने से सफलता का रास्ता भी निकल सकता है.