Kisan Credit Card Rules Revised: किसानों को खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए आसानी से कर्ज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. नए नियम 1 जनवरी 2027 से मंजूर होने वाले किसान क्रेडिट कार्ड लोन पर लागू होंगे. हालांकि, पुराने लोन पहले वाली व्यवस्था के अनुसार ही चलते रहेंगे.
RBI के नए दिशा-निर्देशों का उद्देश्य किसानों को कम कागजी प्रक्रिया में समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है. यह नियम कमर्शियल बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB) और ग्रामीण सहकारी बैंकों पर लागू होंगे.
6 साल की होगी KCC क्रेडिट सुविधा
नए नियमों के तहत किसान क्रेडिट कार्ड को 6 साल की अवधि वाली एक संयुक्त क्रेडिट सुविधा के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा. इससे किसानों को खेती के अलावा अन्य कृषि आधारित जरूरतों के लिए भी लोन लेने में आसानी होगी.
KCC के जरिए अब इन जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा:
- फसल उत्पादन के लिए शॉर्ट टर्म लोन
- पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन
- फसल कटाई के बाद के खर्च
- किसान परिवार की घरेलू जरूरतें
- कृषि उपकरणों और संसाधनों का रखरखाव
- फसल, स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा
- कृषि उत्पादों की बिक्री और मार्केटिंग
- खेती से जुड़े निवेश
फसल सीजन को लेकर भी नया नियम
RBI ने पहली बार किसान क्रेडिट कार्ड के लिए फसल सीजन को तय किया है.
- कम अवधि वाली फसल के लिए अवधि 12 महीने तक होगी.
- लंबी अवधि वाली फसल के लिए अवधि 12 से 18 महीने तक तय की गई है.
फसल सीजन में बुवाई से लेकर कटाई और बिक्री तक का पूरा समय शामिल होगा.
2 लाख तक के लोन पर नहीं लगेगी गारंटी
किसानों के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि 2 लाख रुपये तक के कृषि लोन पर अब गारंटी या गिरवी रखने की जरूरत नहीं होगी.
नए नियमों के अनुसार:
- 2 लाख रुपये तक का कृषि लोन बिना गारंटी मिलेगा.
- किसान अपनी इच्छा से सोना या चांदी गिरवी रख सकते हैं.
- 2 लाख से अधिक के लोन पर बैंक अपनी नीति के अनुसार फैसला करेंगे.
- कुछ परिस्थितियों में 3 लाख रुपये तक के लोन पर भी छूट दी जा सकती है.
इन किसानों को मिलेगा फायदा
KCC योजना का लाभ सिर्फ जमीन मालिक किसानों तक सीमित नहीं रहेगा. नए नियमों में कई अन्य किसानों को भी शामिल किया गया है.
लाभ लेने वालों में शामिल हैं:
- जमीन के मालिक किसान
- बटाई पर खेती करने वाले किसान
- किरायेदार किसान
- मौखिक पट्टेदार किसान
- स्वयं सहायता समूह (SHG)
- जॉइंट लाइबिलिटी ग्रुप (JLG)
RBI के अनुसार बैंक किसान की फसल, आमदनी और भुगतान क्षमता के आधार पर लोन की अवधि तय करेंगे. साथ ही समय-समय पर किसान की लोन सीमा की समीक्षा भी की जाएगी.