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Electricity Tariff Hike: बिहार के उपभोक्ताओं को लग सकता है बड़ा झटका, नए टैरिफ प्रस्ताव से बढ़ सकते हैं बिजली दर

Electricity Tariff Hike: 2026-27 के नए टैरिफ प्रस्ताव से राज्य में बिजली दरें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. मंजूरी मिलने पर घरेलू, कृषि और औद्योगिक उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर पड़ेगा.

Electricity Tariff Hike

23-Jan-2026 03:06 PM

By FIRST BIHAR

Electricity Tariff Hike: राज्य में बिजली उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का सामना करना पड़ सकता है। राज्य विद्युत नियामक आयोग में बिजली वितरण कंपनियों ने वर्ष 2026-27 के लिए नया टैरिफ प्रस्ताव दाखिल किया है, जिसके तहत आने वाले समय में बिजली दरों में बदलाव की तैयारी की जा रही है। 


यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। बिजली कंपनियों ने घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग दरों का प्रस्ताव रखा है। कंपनियों का तर्क है कि बढ़ती लागत, लाइन लॉस और रखरखाव खर्च के कारण टैरिफ संशोधन अनिवार्य हो गया है।


प्रस्ताव के मुताबिक, बिजली कंपनियों ने करीब 67 हजार करोड़ रुपये की वित्तीय आवश्यकता जताई है। इसमें ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क को मजबूत करने के साथ-साथ नई परियोजनाओं पर होने वाला खर्च शामिल है। विशेष रूप से 16 जिलों में बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए अतिरिक्त निवेश का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि आपूर्ति व्यवस्था बेहतर हो सके।


यदि यह टैरिफ प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो घरेलू उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। इसका सबसे अधिक असर मध्यम और निम्न आय वर्ग के उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहले से महंगाई झेल रहे लोगों के लिए यह एक और आर्थिक बोझ साबित हो सकता है।


बिजली दरों में बदलाव का प्रभाव केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा। कृषि उपभोक्ताओं और छोटे उद्योगों की लागत भी बढ़ सकती है, जिससे उत्पादन खर्च में इजाफा और आगे चलकर महंगाई बढ़ने की आशंका है। किसान संगठनों ने पहले ही किसी भी तरह की दर वृद्धि का विरोध करने के संकेत दे दिए हैं।


राज्य विद्युत नियामक आयोग इस टैरिफ प्रस्ताव पर सार्वजनिक सुनवाई आयोजित करेगा। इसमें उपभोक्ता, सामाजिक संगठन और विशेषज्ञ अपनी आपत्तियां और सुझाव रख सकेंगे। सभी पक्षों को सुनने के बाद ही आयोग अंतिम फैसला लेगा। आयोग का कहना है कि निर्णय लेते समय उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी। अब सबकी निगाहें नियामक आयोग के निर्णय पर टिकी हैं।