VAISHALI: बिहार में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था का दावा एनडीए की सरकार करती है, लेकिन इसकी जमीनी हकीकत किसी से छिपी हुई नहीं है। कभी मरीजों को एम्बुलेंस नहीं मिल पाता है तो कभी ऑक्सीजन, कभी दवाईयां नहीं मिल पाती है तो कभी बेड और इलाज करने वाले डॉक्टर।
कल सोमवार 11 MAY को हमने आपको मोतिहारी में स्वास्थ्य व्यवस्था का क्या हाल है, यह बताया था। कैसे पताही सीएचसी में अस्पताल के बेड पर नहीं बल्कि बाहर खड़ी एम्बुलेंस में मरीज को ऑक्सीजन देनी पड़ी। जबकि अस्पताल के हरेक वार्ड में ऑक्सीजन पाइप लाइन बिछी हुई है। लेकिन कनेक्शन अभी तक नहीं किया गया है। जिससे मरीज को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ऑक्सीजन पाइप लाइन यहां शो पीस बना हुआ है। जो स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल तो उठा ही रहा है, साथ ही स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल भी खोल रही है। चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था की एक नई तस्वीर बिहार के वैशाली जिले से सामने आई है। जो स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली की एक बेहद शर्मनाक तस्वीर है, जिसने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
( मोतिहारी के पताही CHC में ऑक्सीजन पाइपलाइन का बुरा हाल, एम्बुलेंस में मरीज का हुआ इलाज)
वही स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती दूसरी तस्वीर वैशाली के महनार से आई है। जिसमें एक घायल मरीज जिंदगी और मौत के बीच सड़क पर तड़पता रहा, लेकिन उसे समय पर न ऑक्सीजन मिल सका और न ही एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध हो पाई। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि मौके पर कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे, लेकिन किसी ने भी पीड़ित की मदद नहीं की।
स्थानीय लोग लगातार एंबुलेंस और ऑक्सीजन की मांग करते रहे, गुहार लगाते रहे, लेकिन सरकारी व्यवस्था मानो पूरी तरह संवेदनहीन हो चुकी थी। जिस स्वास्थ्य विभाग पर करोड़ों रुपये खर्च होने का दावा किया जाता है, वही विभाग एक घायल इंसान को बुनियादी इलाज तक उपलब्ध नहीं करा सका।
लोगों का कहना है कि अगर समय रहते ऑक्सीजन और एंबुलेंस मिल जाती, तो शायद मरीज की हालत इतनी गंभीर नहीं होती। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सरकारी एंबुलेंस सेवाएं किसके लिए हैं? क्या गरीब और जरूरतमंद लोगों की जिंदगी की अब कोई कीमत नहीं रह गई है?
वैशाली में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली का यह कोई पहला मामला नहीं है। कभी अस्पतालों में डॉक्टर नहीं मिलते, कभी दवाओं की कमी सामने आती है, तो कभी ऑक्सीजन और एंबुलेंस जैसी जरूरी सुविधाएं नदारद रहती हैं। हर घटना के बाद जांच और कार्रवाई का आश्वासन जरूर दिया जाता है, लेकिन हालात जस के तस बने रहते हैं।
घायल मरीज सड़क पर तड़पता रहा और पूरा सिस्टम मूकदर्शक बना खड़ा रहा। जिस विभाग को लोगों की जिंदगी बचाने की जिम्मेदारी दी गई है, वही विभाग अब लोगों के भरोसे को तोड़ता नजर आ रहा है। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की पूरी तरह अनदेखी है। अब लोग प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक महनार में गरीब और घायल लोग इसी तरह सिस्टम की बेरुखी का शिकार होते रहेंगे?
वैशाली से मुन्ना खान की रिपोर्ट