Bihar News : बाढ़ प्रभावित लोगों और उनके मवेशियों के लिए बनाए गए राहत शिविर में रखे चोकर को लेकर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के तेरसिया स्थित बाढ़ राहत शिविर का निरीक्षण कर लौटते ही मवेशियों के लिए रखा गया चोकर वापस ले जाने का आरोप लगा। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सोमवार को तेरसिया स्थित बाढ़ राहत शिविर का जायजा लेने पहुंचे थे। मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान शिविर में बाढ़ पीड़ितों और उनके पशुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया गया। मुख्यमंत्री के लौटने के कुछ ही देर बाद पशुपालन विभाग की एंबुलेंस से शिविर में रखा गया चोकर दोबारा ले जाने की बात सामने आई।
बताया गया कि मवेशियों के लिए लाए गए चोकर के करीब आठ बोरे कर्मियों ने एंबुलेंस पर फिर से लाद दिए और वहां से लेकर चले गए। इस पूरी घटना से जुड़ी रिकॉर्डिंग सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।
जिला पशुपालन पदाधिकारी हटाए गए
मामले में जिला पशुपालन पदाधिकारी उदय दत्ता कुमार पर कार्रवाई की गई है। उन्हें पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह हाजीपुर के अनुमंडल पशुपालन पदाधिकारी रंजीत कुमार शर्मा को जिला पशुपालन पदाधिकारी का नया प्रभार सौंपा गया है।
इसके साथ ही उदय दत्ता कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने और प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने एंबुलेंस चालक और मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच के निर्देश दिए हैं।
वायरल ऑडियो से बढ़ा विवाद
मामले को तूल देने वाली एक वायरल रिकॉर्डिंग भी सामने आई है। इसमें संबंधित पदाधिकारी के हवाले से यह बात कही जा रही है कि चोकर मवेशियों में बांटने के लिए नहीं लाया गया था। रिकॉर्डिंग में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के कारण चोकर को विशेष रूप से रखवाए जाने की बात कही जाने का दावा किया गया है।
वहीं, मौके पर मौजूद कुछ कर्मियों की ओर से चोकर की गुणवत्ता खराब होने की बात भी कैमरे पर कही गई। कर्मियों ने कथित तौर पर खराब चोकर की जगह दूसरा चोकर लाने की बात कही। हालांकि, प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए अब जांच और कार्रवाई का रास्ता अपनाया है।
डीएम ने आरोपों को बताया गलत और निराधार
पूरे मामले पर वैशाली की जिला पदाधिकारी वर्षा सिंह ने प्रेस वार्ता कर प्रशासन का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि चोकर को केवल मुख्यमंत्री को दिखाने के लिए राहत शिविर में रखा गया था और मुख्यमंत्री के जाते ही उसे हटाया गया—यह आरोप गलत और निराधार है।
डीएम ने कहा कि राहत शिविर में पशुओं के लिए उपलब्ध कराए जा रहे चारे से जुड़े मामले में लापरवाही या अनियमितता को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने एंबुलेंस चालक, संबंधित अधिकारी और उनकी टीम के खिलाफ डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत मामला दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
अब इस पूरे प्रकरण में जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि राहत शिविर से चोकर वापस ले जाने के पीछे वास्तविक वजह क्या थी और इसमें किस-किस की भूमिका रही। फिलहाल जिला प्रशासन की कार्रवाई के बाद पशुपालन विभाग के स्तर पर भी मामला गंभीर बन गया है।