SUPAUL: बिहार के सुपौल में इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। राघोपुर के बोचहा धार में पानी के बीच एक नवजात बच्ची रोती हुई मिली। पटुआ छुड़ा रहीं महिलाओं ने अपनी जान की परवाह किए बिना उसे पानी से बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल बच्ची की हालत ठीक बताई जा रही है।
कहते हैं कि जिंदगी और मौत के बीच का फासला कभी-कभी चंद पलों का होता है। जब दुनिया में आई एक नन्ही सी जान पानी के बीच जिंदगी और मौत से जूझ रही थी, तब उसकी किस्मत ने ऐसी करवट ली कि कुछ महिलाओं की ममता उसके लिए फरिश्ता बन गई। पानी के बीच से आ रही मासूम की सिसकियों ने महिलाओं का ध्यान खींचा और फिर जो हुआ,उसने इंसानियत को एक बार फिर जिंदा कर दिया।
घटना सुपौल जिले के राघोपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत विशनपुर दौलत पंचायत के भगता टोला स्थित बोचहा धार (नदी) की है। शनिवार की सुबह धार में एक नवजात बच्ची मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। जानकारी के अनुसार, शनिवार की सुबह भगता टोला की कुछ महिलाएं बोचहा धार में पटुआ छुड़ाने का काम कर रही थीं। इसी दौरान अचानक पानी के बीच से किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। पहले महिलाओं को समझ नहीं आया कि आखिर आवाज कहां से आ रही है। लेकिन जब दोबारा ध्यान से सुना तो उन्हें महसूस हुआ कि पानी के बीच कोई मासूम जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा है। फिर क्या था, महिलाओं ने एक पल की भी देरी नहीं की।
अपनी जान की परवाह किए बिना वे कमर भर पानी में उतर गईं और आवाज की दिशा में खोजबीन करने लगीं। कुछ ही देर बाद उनकी नजर पानी में पड़ी एक नवजात बच्ची पर पड़ी। बच्ची को देखते ही महिलाओं का कलेजा कांप उठा। उन्होंने तत्काल उसे पानी से बाहर निकाला। उस वक्त मासूम की हालत देखकर हर कोई भावुक हो गया। इसके बाद महिलाओं ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए बच्ची को बिना देर किए रेफरल अस्पताल राघोपुर पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने बच्ची की जांच कर प्राथमिक उपचार शुरू किया।
एहतियात के तौर पर उसे ऑक्सीजन भी लगाया गया और अस्पताल में भर्ती कर लिया गया। इस पूरी घटना की प्रत्यक्षदर्शी भगता टोला वार्ड 11 निवासी पिंकी देवी ने बताया कि वह अन्य महिलाओं के साथ धार में पटुआ छुड़ा रही थीं। इसी दौरान बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। आवाज सुनकर सभी महिलाएं पानी में उतरीं और तलाश करने पर नवजात बच्ची पानी में मिली। इसके बाद उसे सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। पिंकी देवी ने बताया कि मासूम को इस हालत में देखकर उनका मन बेहद व्यथित हो गया। उन्होंने बच्ची को गोद लेने और अपने घर में रखकर उसका पालन-पोषण करने की इच्छा भी जताई। एक ओर जहां इस घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है,वहीं पिंकी देवी की ममता और महिलाओं की तत्परता की इलाके में सराहना हो रही है।
वहीं,रेफरल अस्पताल राघोपुर के डॉ राजेन्द्र गुप्ता ने बताया कि कुछ महिलाएं नवजात बच्ची को अस्पताल लेकर पहुंची थीं। जांच के बाद बच्ची की स्थिति फिलहाल ठीक बताई गई है। एहतियात के तौर पर उसे ऑक्सीजन दिया गया है और प्रारंभिक उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है।
वहीं घटना की सूचना मिलने पर डायल-112 की पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी ली। फिलहाल इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर किसने इस मासूम को पानी में छोड़ा ? किस मजबूरी या निर्दयता के कारण एक नवजात को इस हाल में छोड़ दिया गया ? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे। लेकिन इस कहानी का सबसे भावुक पहलू यह है कि जिस मासूम को पानी में बेसहारा छोड़ दिया गया था,उसे कुछ अनजान महिलाओं ने अपनी ममता और हिम्मत से नई जिंदगी दे दी। जिस दुनिया में कदम रखते ही उसे अपनों का साथ नहीं मिला,उसी दुनिया में उसे कुछ ऐसी महिलाएं मिल गईं, जिन्होंने इंसानियत का फर्ज निभाकर उसे मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया।