Bihar News: सुपौल जिला मुख्यालय के बसबिट्टी रोड स्थित एक मदरसे में मंगलवार सुबह चार नाबालिग छात्राओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई. इलाज के दौरान 9 वर्षीय छात्रा अलफिसा परवीन की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य छात्राओं का अलग-अलग निजी क्लीनिकों में इलाज चल रहा है. घटना के बाद मृतका के परिजनों ने बच्ची के गले पर चोट के निशान मिलने का दावा करते हुए उसकी मौत को संदिग्ध बताया है. मामले की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी.


मृतका की पहचान सदर थाना क्षेत्र के नेमुआ वार्ड संख्या-3 निवासी मो. कमरे आलम की बेटी अलफिसा परवीन के रूप में हुई है. बताया गया कि अलफिसा जामिअतुस सालिहात एजुकेशनल ट्रस्ट द्वारा संचालित मदरसे में पढ़ती थी.


मृतका की मां साजदा खातून के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब छह बजे मदरसे से फोन आया कि अलफिसा की तबीयत अचानक खराब हो गई है और उसे लगातार उल्टियां हो रही हैं. सूचना मिलते ही परिजन मदरसे पहुंचे. वहां बच्ची अचेत अवस्था में मिली और वह बोलने की स्थिति में नहीं थी.


परिजनों का आरोप है कि वे बच्ची को इलाज के लिए ले जाने लगे तो मदरसे की एक महिला शिक्षिका ने उन्हें रोकने का प्रयास किया. इसके बाद परिजन किसी तरह बच्ची को लेकर नजदीकी क्लीनिक पहुंचे. वहां से उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए सदर अस्पताल सुपौल रेफर कर दिया गया. सदर अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद अलफिसा को मृत घोषित कर दिया.


अस्पताल में बच्ची के गले पर निशान देखने के बाद परिजनों का गुस्सा बढ़ गया. मृतका की मां ने बेटी की मौत को संदिग्ध बताते हुए जहर देने या फंदा लगाने की आशंका जताई है. हालांकि, पुलिस ने अभी तक हत्या या मौत के किसी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.


वहीं मदरसा संचालक खलीलउर्रहमान ने बच्चियों की तबीयत खराब होने की वजह फूड प्वाइजनिंग बताई है. उनका कहना है कि सोमवार रात एक बच्ची की मां बाहर से समोसे लेकर आई थी और उसे खाने के बाद बच्चियों की तबीयत बिगड़ी.


घटना में तीन अन्य छात्राओं की भी तबीयत खराब हुई है. इनमें सदर थाना क्षेत्र के महेशपुर बसबिट्टी निवासी आफिया, त्रिवेणीगंज के प्रतापपुर निवासी सहाना खातून और लौकहा थाना क्षेत्र के बरुआरी निवासी हलिमा सादिया शामिल हैं.


तीनों छात्राओं को दो अलग-अलग निजी क्लीनिकों में भर्ती कराया गया है. इनमें एक बच्ची की हालत चिंताजनक बताई जा रही है. स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम ने मदरसे में मौजूद अन्य बच्चों की भी स्वास्थ्य जांच की.


घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक शरथ आर.एस. भारी पुलिस बल के साथ मदरसे पहुंचे. पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने परिसर की जांच की और वहां मौजूद परिस्थितियों की जानकारी ली. पुलिस ने मृतका के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है.


घटना के बाद सदर एसडीओ मनोहर कुमार साहु और शिक्षा विभाग के डीपीओ आलोक शेखर आनंद ने भी मदरसे की जांच की. प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान मदरसा संचालन से संबंधित वैध निबंधन, सरकारी स्वीकृति या अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया जा सका.


प्रशासन ने मदरसे को बिना मान्यता संचालित पाया, जिसके बाद मौके पर ही मदरसे को सील कर दिया गया. यहां पढ़ने वाले सभी 53 बच्चों को सुरक्षित उनके घर भेज दिया गया.


पुलिस के अनुसार, छात्रा की मौत के वास्तविक कारण का पता पोस्टमार्टम और विसरा जांच के बाद ही चल सकेगा. पुलिस ने घटनास्थल से संबंधित साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.